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पीएम किसान मानधन योजना के सात साल, 25 लाख किसानों को पेंशन का सहारा; जानें योजना से जुड़ने के नियम

newz@gmail.com | Sep 14, 2026, 20:04 IST

पीएम किसान मानधन योजना ने 12 सितंबर 2026 को सात साल पूरे किए। फरवरी 2026 तक 24,96,252 किसान योजना से जुड़े हैं। पात्र किसानों को 60 साल बाद हर महीने 3,000 रुपए पेंशन मिलती है। सरकार किसान के बराबर अंशदान देती है। जानें पेंशन, पात्रता, अंशदान और आवेदन की पूरी जानकारी।

मानधन योजना

छोटे और सीमांत किसानों के लिए अच्छी खबर है। प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना ने सात साल पूरे कर लिए हैं। यह योजना 12 सितंबर 2019 को शुरू हुई थी। इसका मकसद किसानों को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा देना है।

फरवरी 2026 तक 24,96,252 किसान इसमें रजिस्टर हो चुके हैं। यानी करीब 25 लाख किसान योजना से जुड़ चुके हैं। पात्र किसानों को 60 साल की उम्र के बाद पेंशन मिलती है। हर महीने न्यूनतम 3,000 रुपए की सुनिश्चित पेंशन मिलती है।

सरकार भी जमा करती है बराबर राशि

पीएम किसान मानधन योजना की खास बात अंशदान व्यवस्था है। किसान जितनी राशि जमा करता है, सरकार उतनी राशि देती है। इस तरह दोनों के योगदान से पेंशन फंड तैयार होता है।

योजना कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत चलती है। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) इसके संचालन में सहयोग करता है। यह योजना स्वैच्छिक और अंशदायी पेंशन योजना है।

किसान 60 साल की उम्र तक नियमित अंशदान करता है। राशि किसान की उम्र के हिसाब से तय होती है। भुगतान बैंक खाते से ऑटो-डेबिट के जरिए होता है।

उम्र के हिसाब से कितना अंशदान

योजना में कम उम्र में जुड़ने पर अंशदान कम रहता है। 18 साल की उम्र में 55 रुपए मासिक जमा करने होते हैं। 20 साल की उम्र में यह राशि 61 रुपए है।

25 साल की उम्र में किसान को 80 रुपए देने होते हैं। 30 साल की उम्र में मासिक अंशदान 105 रुपए है। 35 साल की उम्र में यह राशि 150 रुपए हो जाती है।

40 साल की उम्र में किसान को 200 रुपए मासिक देने होते हैं। इसके बराबर राशि केंद्र सरकार भी जमा करती है। इस तरह उम्र के अनुसार पेंशन फंड तैयार होता रहता है।

हरियाणा में सबसे ज्यादा नामांकन

राज्यों में योजना का लाभ लेने वालों की संख्या अलग-अलग है। नामांकन के मामले में हरियाणा सबसे आगे है। वहां करीब 5.75 लाख किसान योजना से जुड़े हैं।

बिहार 3.46 लाख से ज्यादा नामांकन के साथ दूसरे स्थान पर है। झारखंड और उत्तर प्रदेश में 2.5 लाख से अधिक किसान जुड़े हैं। छत्तीसगढ़ में भी दो लाख से ज्यादा किसानों ने नामांकन कराया है।

ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु में भी किसान जुड़े हैं। महाराष्ट्र में भी योजना के लाभार्थियों की संख्या काफी है।

फरवरी तक 540.66 करोड़ रुपए खर्च

योजना के संचालन और विस्तार पर खर्च भी हुआ है। फरवरी 2026 तक 540.66 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। बढ़ते नामांकन से किसानों की जागरूकता का संकेत मिलता है।

खेती में आमदनी कई जोखिमों से प्रभावित होती है। मौसम और बाजार में बदलाव इसका बड़ा कारण है। ऐसे में वृद्धावस्था की नियमित आय महत्वपूर्ण हो जाती है।

मानधन योजना किसानों को इसी जरूरत के लिए सुरक्षा देती है। हालांकि, इसका लाभ पात्रता पूरी करने वाले किसानों को ही मिलता है।

किसान मानधन योजना का फायदा परिवार को भी

योजना में किसान के परिवार के लिए भी प्रावधान है। पेंशन पाने वाले किसान की मृत्यु होने पर जीवनसाथी को लाभ मिलता है। जीवनसाथी को पेंशन की 50 प्रतिशत राशि मिलती है।

इस हिसाब से परिवार पेंशन 1,500 रुपए प्रति माह होती है। अगर किसान की मृत्यु 60 साल से पहले होती है, तब भी विकल्प मौजूद है। जीवनसाथी योजना जारी रख सकता है। इसके लिए निर्धारित अंशदान जमा करना होगा। दूसरा विकल्प योजना से बाहर निकलने का है। ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार लाभ तय होता है।

कौन किसान ले सकता है लाभ

यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए है। किसान के पास अधिकतम दो हेक्टेयर कृषि योग्य जमीन होनी चाहिए। आवेदन के समय उम्र 18 से 40 साल के बीच होनी चाहिए।

किसान का नाम राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के भूमि रिकॉर्ड में होना चाहिए। कुछ श्रेणियों को योजना से बाहर रखा गया है। इनमें राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के सदस्य शामिल हैं।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) से जुड़े लाभार्थी भी बाहर हैं। आयकरदाता और संस्थागत भूमि धारक भी पात्र नहीं हैं। सांसद, विधायक और मंत्री भी इस योजना में शामिल नहीं हो सकते।

इन पेशेवरों को भी नहीं मिलेगा लाभ

पंजीकृत डॉक्टर, इंजीनियर और वकील भी योजना से बाहर हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट और आर्किटेक्ट भी पात्र नहीं हैं। केंद्र और राज्य सरकार के नियमित कर्मचारी भी शामिल नहीं हो सकते।

सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त अधिकारी भी योजना में पात्र नहीं हैं। हालांकि, मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS) को छूट दी गई है। चतुर्थ श्रेणी और ग्रुप-डी कर्मचारियों को भी छूट है।

कैसे करें योजना में रजिस्ट्रेशन

पात्र किसान नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर आवेदन कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के लिए आधार कार्ड जरूरी है। बैंक खाते की जानकारी और मोबाइल नंबर भी चाहिए।

सीएससी पर किसान का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जाता है। इसके बाद ऑटो-डेबिट की मंजूरी ली जाती है। पहली किस्त जमा होने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

किसान को पेंशन अकाउंट नंबर और पेंशन कार्ड जारी किया जाता है। इसके बाद रिकॉर्ड एलआईसी को भेजे जाते हैं। किसान अपनी सुविधा से अलग-अलग अंतराल में अंशदान दे सकता है। मासिक, त्रैमासिक और अर्धवार्षिक विकल्प उपलब्ध हैं।

बुढ़ापे में नियमित आय का सहारा

पीएम किसान मानधन योजना का उद्देश्य सिर्फ पेंशन देना नहीं है। इसका लक्ष्य किसानों को सामाजिक सुरक्षा देना भी है। करीब 25 लाख किसानों का जुड़ना इसका बड़ा आधार है।

खेती करने वाले परिवारों के लिए वृद्धावस्था में आय की चिंता रहती है। मानधन योजना ऐसी चिंता को कुछ हद तक कम कर सकती है। पात्र किसानों को भविष्य के लिए नियमित पेंशन का भरोसा मिलता है। हालांकि, योजना में शामिल होने से पहले पात्रता जांचना जरूरी है। अंशदान और नियमों की जानकारी भी समझनी चाहिए। इससे किसान अपने लिए सही फैसला ले सकते हैं।

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