अमरूद की खेती करने वाले किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। वैज्ञानिकों ने पांच बेहतर किस्में तैयार की हैं। इनमें उत्पादन, फल का आकार और स्वाद तीनों बेहतर हैं। कुछ किस्में छह साल में 90 से 100 किलो तक उपज दे सकती हैं। किसान अपने इलाके के मुताबिक सही किस्म चुन सकते हैं।
क्यों खास हैं ये किस्में
अमरूद की खेती में सिर्फ उपज मायने नहीं रखती। फल की गुणवत्ता भी उतनी ही अहम मानी जाती है। इसी को ध्यान में रखकर वैज्ञानिकों ने पांच उन्नत किस्में विकसित की हैं। इनमें CISH-Lalit, Awadh Bhushan, CISH-Dhawal, CISH-Lalima और CISH-Shweta शामिल हैं। हर किस्म की अपनी अलग खासियत है। किसी में उत्पादन ज्यादा है तो किसी में फल का आकार बड़ा है। कुछ किस्मों में विटामिन C की मात्रा भी अधिक पाई जाती है। कुछ किस्में प्रसंस्करण यानी प्रोसेसिंग के लिए भी उपयुक्त मानी गई हैं।
CISH ने कीं विकसित
इन किस्मों को CISH (Central Institute For Subtropical Horticulture) ने विकसित किया है। यह संस्थान सबट्रॉपिकल फलों पर काम करता है। कुछ किस्में छह साल की उम्र में अच्छा उत्पादन देती हैं। एक पौधे से 90 से 100 किलो तक अमरूद मिल सकता है। वहीं एक किस्म की औसत उत्पादकता 38.4 टन प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से कहीं ज्यादा है। किसान अपने इलाके और मकसद के हिसाब से सही किस्म चुन सकते हैं।
CISH-Lalit की खासियत
CISH-Lalit एप्पल अमरूद से चुनकर तैयार की गई किस्म है। इसकी उत्पादकता आम व्यावसायिक किस्मों से ज्यादा आंकी गई है। छह साल की उम्र में एक पौधे से करीब 100 किलो अमरूद मिलता है। इसके फल सख्त और गुलाबी गूदे वाले होते हैं। एक फल का वजन करीब 185 से 200 ग्राम रहता है। इसमें मिठास और खट्टेपन का अच्छा संतुलन मिलता है। इस किस्म में प्रति 100 ग्राम करीब 250 मिलीग्राम विटामिन C पाया जाता है।
यह किस्म ताजा खाने के साथ प्रसंस्करण के लिए भी अच्छी मानी गई है। CISH-Lalit देश के प्रमुख अमरूद उत्पादक इलाकों में अच्छी तरह उग सकती है। इसे उत्तर प्रदेश आंध्र प्रदेश कर्नाटक के लिए अनुशंसित किया गया है। साथ ही उत्तराखंड और महाराष्ट्र के लिए भी यह उपयुक्त मानी गई है। यह किस्म कटाई-छंटाई यानी प्रूनिंग पर भी अच्छी प्रतिक्रिया देती है। इससे किसान पौधे का आकार अपने हिसाब से नियंत्रित कर सकते हैं।
अवध भूषण के फायदे
Awadh Bhushan किस्म सरदार अमरूद की हाफ-सिब आबादी से चुनकर विकसित की गई है। फल देने के तीसरे साल में इसका उत्पादन करीब 27.5 किलो प्रति पेड़ रहता है। छठे साल तक यह बढ़कर करीब 79 किलो प्रति पेड़ तक पहुंच जाता है। इसके फल बड़े और लगभग गोल आकार के होते हैं। इनका रंग आकर्षक पीला-हरा होता है। एक फल का औसत वजन करीब 300 ग्राम तक रहता है। इसलिए यह किस्म खासतौर पर ताजा खाने के लिए उपयुक्त मानी गई है। इस किस्म को 2025 में जारी किया गया था। उसी साल इसका व्यावसायीकरण भी शुरू हो गया।
CISH-Dhawal में ज्यादा उपज
CISH-Dhawal ज्यादा उत्पादन देने वाली किस्म के रूप में जानी जाती है। इसकी औसत उत्पादकता करीब 38.4 टन प्रति हेक्टेयर आंकी गई है। यह 2021-22 के राष्ट्रीय औसत 15.6 टन प्रति हेक्टेयर से दोगुने से भी ज्यादा है। इस किस्म के एक पौधे से 80 से 90 किलो उत्पादन मिलता है। इसके फलों में मुलायम बीजों की संख्या मध्यम स्तर की होती है। फल में 13.4 डिग्री ब्रिक्स TSS यानी टोटल सॉल्युबल सॉलिड्स (Total Soluble Solids) पाया जाता है। इसमें अम्लता करीब 0.42 प्रतिशत रहती है। प्रति 100 ग्राम में 250 मिलीग्राम से ज्यादा विटामिन C भी मिलता है। यह किस्म ताजा सेवन और प्रसंस्करण दोनों के लिए उपयुक्त बताई गई है। यह बारिश के मौसम में भी अच्छा प्रदर्शन करती है, जो खास बात है।
CISH-Lalima का आकर्षक रंग
CISH-Lalima एप्पल अमरूद की हाफ-सिब आबादी से चुनकर तैयार की गई किस्म है। इसके फल गोल और मध्यम आकार के होते हैं। फल का छिलका मोटा होता है और रंग गहरा लाल यानी क्रिमसन होता है। इस किस्म में रंगीन फलों का अनुपात भी अधिक रहता है। फल का गूदा सख्त होता है। वजन करीब 185 से 200 ग्राम रहता है। इसमें मिठास और खट्टेपन का संतुलित स्वाद मिलता है। इस किस्म में 150 से 220 मिलीग्राम विटामिन C प्रति 100 ग्राम मिलता है। इसमें अच्छी उत्पादन क्षमता के साथ लंबी शेल्फ लाइफ भी है। इसलिए इसे ताजा खाने के साथ प्रसंस्करण के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
CISH-Shweta की खासियत
CISH-Shweta भी ज्यादा उत्पादन देने वाली किस्म मानी जाती है। छह साल की उम्र में एक पौधा करीब 90 किलो अमरूद देता है। इसके फल मध्यम आकार के और लगभग गोल होते हैं। एक फल का वजन करीब 225 ग्राम रहता है। फल की बाहरी त्वचा क्रीमी सफेद रंग की होती है। इसका गूदा बर्फ जैसा सफेद रहता है। इसमें 12.5 से 13.2 प्रतिशत TSS पाया जाता है। इसमें करीब 300 मिलीग्राम विटामिन C प्रति 100 ग्राम मिलता है। इसके फलों की कीपिंग क्वालिटी भी काफी अच्छी है। यह जैविक और अजैविक दोनों तरह के तनावों को अच्छी तरह सह सकती है। CISH-Shweta देश के अलग-अलग अमरूद उत्पादक इलाकों में उगाई जा सकती है। यह ताजा सेवन और प्रसंस्करण दोनों के लिए उपयुक्त है। बारिश के मौसम में भी इसकी खेती अच्छी रहती है।
किसान कौन सी किस्म चुनें
अमरूद किसानों के लिए सही किस्म का चुनाव बेहद जरूरी माना जाता है। ज्यादा उत्पादन चाहने वालों के लिए CISH-Dhawal और CISH-Lalit बेहतर विकल्प हैं। बड़े और आकर्षक फल चाहने वालों के लिए Awadh Bhushan फायदेमंद हो सकती है। लंबी शेल्फ लाइफ और रंगीन फल चाहने वालों के लिए CISH-Lalima अच्छा विकल्प है।
बारिश में भी अच्छी उपज चाहने वालों को CISH-Dhawal या CISH-Shweta चुननी चाहिए। ज्यादा विटामिन C वाली किस्में सेहत के लिहाज से भी अहम मानी जाती हैं। इससे किसानों को बाजार में बेहतर दाम मिलने की भी संभावना बढ़ जाती है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सही किस्म से आमदनी बढ़ सकती है। किसान अपने इलाके की जलवायु और मंडी की मांग देखकर किस्म चुनें। नए बाग लगाने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेना फायदेमंद रहता है। इससे किसान गलत किस्म चुनने के जोखिम से बच सकते हैं।
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