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कटनी के किसान लालजी मौर्य कमा रहे सालाना 12 लाख मुनाफा, मॉडल देखने पहुंचे कलेक्टर

newz@gmail.com | Aug 31, 2026, 18:02 IST

कटनी के कन्हवारा गांव के किसान लालजी मौर्य 12 एकड़ जमीन पर फसल विविधीकरण और पशुपालन के दम पर सालाना 10 से 12 लाख रुपए कमा रहे हैं। उनका मॉडल देखने कलेक्टर आशीष तिवारी खुद उनके खेत पहुंचे।

कटनी का किसान

कटनी के किसान ने किया कमाल। सही तकनीक और सही सोच से खेती बदल सकती है। यह घाटे का नहीं फायदे का काम बन सकती है। कटनी जिले के कन्हवारा गांव के किसान लालजी मौर्य ने यही साबित किया है। वे अपने दो भाइयों के साथ 12 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं। फसल विविधीकरण, नई तकनीक और पशुपालन को उन्होंने साथ जोड़ा है। इससे वे सालाना 10 से 12 लाख रुपए कमा रहे हैं। उनके इस मॉडल को देखने कलेक्टर खुद खेत पहुंचे। हाल ही में कलेक्टर आशीष तिवारी उनके खेत गए थे।

12 एकड़ में मिश्रित खेती

कटनी जिले के कन्हवारा गांव में किसान लालजी मौर्य रहते हैं। वे अपने दो भाइयों के साथ मिलकर खेती करते हैं। तीनों भाई मिलकर 12 एकड़ जमीन संभालते हैं। इस जमीन पर वे वैज्ञानिक तरीके से खेती करते हैं। पारंपरिक तरीकों की जगह वे नई तकनीक अपनाते हैं।

फसल विविधीकरण उनकी खेती का मुख्य आधार है। एक ही खेत में कई फसलें साथ उगाई जाती हैं। इससे जोखिम कम होता है और आमदनी बढ़ती है।

मौजूदा सीजन में कौन सी फसल

मौर्य परिवार ने खरीफ सीजन 2026-27 में अलग-अलग फसलें लगाई हैं। करीब 9 एकड़ में धान की बुवाई की गई है। धान की खेती में DSR पद्धति अपनाई गई है। DSR का मतलब है डायरेक्ट सीडेड राइस (Direct Seeded Rice) तकनीक। एक एकड़ में अरहर की फसल लगाई गई है। आधा एकड़ खेत गन्ने के लिए रखा गया है। आधा एकड़ में अदरक की खेती की जा रही है।

आधे एकड़ में कद्दू भी उगाया जा रहा है। करीब आधे एकड़ में आम के पौधे भी लगे हैं। आने वाले सालों में आम के बगीचे से भी आमदनी मिलेगी।

तीनों सीजन का फसल चक्र

मौर्य परिवार साल के तीनों सीजन में खेत का उपयोग करता है। खरीफ सीजन में धान, उड़द और अरहर बोई जाती है। साथ में मौसमी सब्जियां भी लगाई जाती हैं। रबी सीजन में गेहूं, चना और मसूर की खेती होती है। इस दौरान मिर्च और गोभी भी उगाई जाती है।

जायद सीजन में उड़द, मूंग और ककड़ी बोई जाती है। तरबूज और खरबूजा भी जायद की फसलें हैं। इस तरह खेत कभी खाली नहीं रहता। हर सीजन में अलग फसल से कमाई होती रहती है।

कलेक्टर पहुंचे खेत पर

हाल ही में कलेक्टर आशीष तिवारी लालजी मौर्य के खेत पहुंचे। उन्होंने खेत में जाकर अलग-अलग फसलें देखीं। कलेक्टर ने किसान से फसल उत्पादन की जानकारी ली। उन्होंने आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के बारे में भी पूछा।

कलेक्टर ने खेती से जुड़ी कई गतिविधियों को बारीकी से समझा। इस दौरान उन्होंने पशुपालन विभाग की डेयरी प्लस योजना की जानकारी दी। कलेक्टर ने किसान को इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। उनके इस दौरे से क्षेत्र के किसानों में भी उत्साह बढ़ा है।

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धान में नई DSR तकनीक

लालजी मौर्य खेती में लगातार नई तकनीक अपना रहे हैं। धान की खेती में वे DSR पद्धति का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस तकनीक में धान की सीधी बुवाई होती है। इसमें पौध रोपाई की जरूरत नहीं पड़ती। इससे पानी और मजदूरी दोनों की बचत होती है।

सब्जियों और अनाज की खेती में भी वे कतार पद्धति अपनाते हैं। इससे फसल का बेहतर प्रबंधन हो पाता है। गन्ना और अदरक जैसी नकदी फसलें भी उनके मॉडल का हिस्सा हैं।

पशुपालन से अतिरिक्त कमाई

लालजी मौर्य सिर्फ खेती तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने पशुपालन को भी अपनी आय का हिस्सा बनाया है। उनके पास उन्नत नस्ल की गायें हैं। इसके अलावा उनके पास चार भैंसें भी हैं। इन पशुओं से रोजाना दूध का उत्पादन होता है।

दूध बेचकर परिवार को अतिरिक्त आमदनी मिलती है। खेती और पशुपालन का यह मेल उनके मॉडल की खासियत है। इसे इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल भी कहा जाता है।

सालाना मुनाफा 10-12 लाख

किसान लालजी मौर्य के मुताबिक उनका सालाना मुनाफा 10 से 12 लाख रुपए है। यह मुनाफा तीनों सीजन की फसलों को मिलाकर होता है। इसमें पशुपालन से मिलने वाली आय भी शामिल है। अलग-अलग फसलों से जोखिम बंट जाता है।

एक फसल में नुकसान होने पर दूसरी फसल भरपाई कर देती है। यही उनके मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है। आधुनिक तकनीक और फसल विविधीकरण मिलकर मुनाफा बढ़ाते हैं।

दूसरे किसानों के लिए सीख


कन्हवारा के लालजी मौर्य का मॉडल कई किसानों के लिए मिसाल बन सकता है। यह दिखाता है कि खेती सिर्फ पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। फसल विविधीकरण अपनाकर आय के कई जरिए बनाए जा सकते हैं। आधुनिक तकनीक से लागत भी कम होती है। पशुपालन जोड़ने से अतिरिक्त कमाई का रास्ता खुलता है। 12 एकड़ में अलग-अलग फसलें उगाकर उन्होंने जोखिम कम किया है।

तीनों सीजन में खेत का पूरा उपयोग करना उनकी सफलता की कुंजी है। यह मॉडल क्षेत्र के अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रहा है। डेयरी प्लस योजना की जानकारी से भी उन्हें आगे फायदा मिल सकता है। खेती, बागवानी और पशुपालन का यह मेल गांव में नई कहानी लिख रहा है। यह मुनाफे की कहानी है।

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