प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में एवोकाडो की खेती पर बात की। यह कार्यक्रम का 137वां एपिसोड था। पीएम मोदी ने कहा कि पहले भारत में एवोकाडो के बारे में बहुत कम लोग जानते थे।
अब हालात बदल गए हैं। यह फल आज कई घरों की खाने की मेज तक पहुंच चुका है। पीएम मोदी ने बताया कि एवोकाडो की मांग और कीमत दोनों तेजी से बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि यह फल स्वास्थ्य को लेकर जागरूक लोगों के बीच खास पसंद बन गया है।
जानिए आंध्र प्रदेश के किसान वरदराज की कहानी
प्रधानमंत्री ने आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले के किसान वरदराज का जिक्र किया। वरदराज सालों से अपने खेत में टमाटर और केले उगाते आ रहे थे। एक दिन उन्होंने अपने दोस्त के खेत में एवोकाडो की फसल देखी। इसके बाद उन्होंने यूट्यूब पर इसके बारे में जानकारी जुटानी शुरू की।
धीरे-धीरे वरदराज ने अपने खेत में भी एवोकाडो लगाना शुरू किया। पीएम मोदी के मुताबिक वे अब तक करीब चार टन एवोकाडो उगा चुके हैं। वरदराज अब सीधे स्थानीय दुकानों को अपनी उपज बेचते हैं। इससे उनकी कमाई में साफ बदलाव आया है।
तमिलनाडु और कर्नाटक के किसानों की सफलता
प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु के कोडाइकनाल के किसान चंद्रशेखरन का भी उदाहरण दिया। उन्होंने आधे हेक्टेयर जमीन पर एवोकाडो की खेती शुरू की है। इससे उन्हें अच्छी कीमत मिलने लगी है और उनकी आय बढ़ी है।
पीएम मोदी ने कर्नाटक के चिक्कमगलुरु के किसानों का भी जिक्र किया। यहां किसानों ने अपने कॉफी बागानों के साथ ही एवोकाडो की खेती भी शुरू कर दी है। इस तरह उन्हें कॉफी और काली मिर्च के अलावा एवोकाडो से भी अतिरिक्त कमाई मिल रही है।
शहरों के एवोकाडो टोस्ट से किसानों को फायदा
प्रधानमंत्री ने शहरी जीवनशैली और किसानों की कमाई के बीच एक दिलचस्प संबंध बताया। उन्होंने कहा कि शहर के रेस्तरां में अक्सर एवोकाडो टोस्ट की बात होती है। लेकिन इसी एवोकाडो के जरिए देश के किसानों ने कमाई का नया रास्ता खोज लिया है।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत में उगाया गया एवोकाडो सिर्फ शहरी खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ा रहा। यह किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद कर रहा है। उनके मुताबिक यह उदाहरण बताता है कि नई फसलों को अपनाने से किसान कैसे फायदा उठा सकते हैं।
नई फसल से मिल रहा नया विकल्प
पीएम मोदी के इन उदाहरणों से साफ है कि पारंपरिक फसलों के अलावा नई फसलें भी किसानों के लिए फायदेमंद हो सकती हैं। वरदराज और चंद्रशेखरन जैसे किसानों ने यूट्यूब और अपने आसपास के अनुभव से सीखकर नई शुरुआत की। इससे उनकी आमदनी में सुधार हुआ।
कर्नाटक के किसानों का उदाहरण दिखाता है कि एक ही खेत में कई फसलें मिलाकर उगाने से भी फायदा हो सकता है। कॉफी के साथ एवोकाडो लगाने से किसानों को अतिरिक्त कमाई मिल रही है। यह तरीका दूसरे किसानों के लिए भी मददगार साबित हो सकता है।
देश में बढ़ रही एवोकाडो की खेती
पीएम मोदी के इस जिक्र के बाद एवोकाडो खेती को लेकर देशभर में चर्चा बढ़ गई है। दक्षिण भारत के कई राज्यों में किसान अब इस फसल की तरफ रुख कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक में इसके अच्छे नतीजे सामने आए हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सही जलवायु और वैज्ञानिक तरीके अपनाने से एवोकाडो की खेती और भी फायदेमंद हो सकती है। शहरी बाजारों में बढ़ती मांग किसानों के लिए एक बड़ा मौका बन सकती है। आने वाले समय में और भी किसान इस फसल को अपना सकते हैं।
एवोकाडो की कीमत कितनी है
भारत में उगाया गया एवोकाडो 220 से 350 रुपए प्रति किलो में बिकता है। वहीं विदेश से आने वाला एवोकाडो 500 से 700 रुपए या इससे भी ज्यादा में मिलता है। यही वजह है कि स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। कम कीमत में लोकल एवोकाडो लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
उत्पादन में हुआ बड़ा इजाफा
एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2023 में एवोकाडो का उत्पादन करीब 6 हजार टन था। यह आंकड़ा 2026 तक बढ़कर करीब 9 हजार टन तक पहुंच गया। इससे साफ है कि किसान और बाजार दोनों इस फसल को गंभीरता से ले रहे हैं। बढ़ता उत्पादन आने वाले समय में कीमतों को भी संतुलित कर सकता है।
सेहत के लिए फायदेमंद है एवोकाडो
एवोकाडो को सेहत के लिए काफी अच्छा माना जाता है। यह दिल की सेहत के लिए फायदेमंद बताया जाता है, क्योंकि यह खराब कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल (Low Density Lipoprotein) को कम करने में मदद करता है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है।
इसके अलावा एवोकाडो में एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो त्वचा की देखभाल में सहायक होते हैं। यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। इसमें मौजूद मल्टीविटामिन शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने का काम करते हैं।
खेती में आती हैं कई चुनौतियां
एवोकाडो की खेती आसान नहीं मानी जाती। एक किलो एवोकाडो उगाने में करीब 1000 से 2000 लीटर पानी खर्च होता है। यह दूसरी फसलों के मुकाबले काफी ज्यादा है। इसलिए पानी की उपलब्धता वाले इलाकों में ही यह खेती बेहतर तरीके से हो पाती है।
एवोकाडो के पौधे से पहली पैदावार मिलने में तीन से पांच साल का समय लगता है। इस दौरान किसान को धैर्य रखना पड़ता है। खेती के लिए बिना पाले वाला मौसम और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी जरूरी होती है। शुरुआती चरण में पौधों पर निवेश भी ज्यादा करना पड़ता है।
इसके अलावा फंगस और कीड़ों से बचाव भी एक बड़ी चुनौती है। सही देखभाल न होने पर पूरी फसल को नुकसान पहुंच सकता है। यही वजह है कि एवोकाडो की खेती को विशेषज्ञों की सलाह के साथ ही शुरू करने की सिफारिश की जाती है।
एवोकाडो खाने के अलग-अलग तरीके
एवोकाडो को खाने के कई तरीके लोकप्रिय हो रहे हैं। इसे टोस्ट पर लगाकर खाया जाता है, जो शहरों में खासा पसंद किया जाता है। सलाद और चाट में भी इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है।
इसके अलावा एवोकाडो स्मूदी भी काफी लोकप्रिय है, जिसे सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। कुछ लोग इसे टाकोज में डालकर खाते हैं। वहीं बाउल के रूप में परोसा गया एवोकाडो भी युवाओं में पसंद किया जा रहा है। इन अलग-अलग तरीकों ने इसे रोजमर्रा के खाने का हिस्सा बना दिया है।
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