किसान की बात,सूत्र के साथ

महाराष्ट्र में 32 जिलों के 265 तालुका सूखाग्रस्त घोषित, किसानों को कर्ज और बिजली में राहत देगी राज्य सरकार

newz@gmail.com | Sep 26, 2026, 21:20 IST

महाराष्ट्र सरकार ने बारिश की कमी के चलते 32 जिलों के 265 तालुकाओं को सूखाग्रस्त घोषित किया है। प्रभावित किसानों को फसल लोन पुनर्गठन, बिजली बिल राहत, भूमि राजस्व छूट और पानी-चारे की व्यवस्था जैसी सुविधाएं दी जाएंगी।

महाराष्ट्र में सूखा

महाराष्ट्र सरकार ने सूखे जैसे हालात को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है। राज्य के 358 में से 265 तालुकाओं को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। ये क्षेत्र 32 जिलों में फैले हैं। सरकार के अनुसार यह राज्य के करीब 74 फीसदी हिस्से को कवर करते हैं।

सूखाग्रस्त घोषित इलाकों में किसानों को राहत देने के लिए कई कदम उठाए जाएंगे। सरकार ने फसल लोन (Crop Loan) के पुनर्गठन की सुविधा देने का फैसला किया है। इसके साथ खेती से जुड़े कर्ज की वसूली को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है। प्रभावित किसानों को भूमि राजस्व में भी छूट मिलेगी। खेती में इस्तेमाल होने वाले कृषि पंपों के बिजली बिल में राहत देने का प्रावधान किया गया है।

किसानों को बिजली बिल राहत

सरकार ने बताया कि 7.5 हॉर्सपावर तक के कृषि पंपों के बिजली बिल पहले ही माफ किए जा चुके हैं। अब सूखाग्रस्त क्षेत्रों में इससे अधिक क्षमता वाले कृषि पंपों को भी राहत देने की तैयारी है। बारिश की कमी से कई इलाकों में सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। ऐसे में बिजली बिल राहत किसानों के लिए बड़ी मदद मानी जा रही है।

फसल नुकसान का होगा सर्वे

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सभी जिला कलेक्टरों को फसल नुकसान का सर्वे शुरू करने के निर्देश दिए हैं। सर्वे के दौरान फसलों की स्थिति की तस्वीरें और GPS लोकेशन दर्ज की जाएगी।

इसके आधार पर नुकसान की रिपोर्ट तैयार होगी। सरकार ने कहा है कि किसानों को कितनी आर्थिक सहायता दी जाएगी, इसका फैसला सर्वे रिपोर्ट के बाद होगा। फसल नुकसान के लिए अलग से सरकारी आदेश जारी किया जाएगा। इसके बाद राहत राशि और सहायता का स्वरूप तय किया जाएगा।

गांवों में पानी और चारे की व्यवस्था

सूखाग्रस्त गांवों में जरूरत पड़ने पर पानी के टैंकर भेजे जाएंगे। सरकार ने लोगों और पशुओं के लिए पेयजल व्यवस्था करने की बात कही है।किसानों के लिए पानी बचाने वाले कामों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेती पर निर्भर मजदूरों और किसानों के लिए अनाज उपलब्ध कराया जाएगा।

पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था करने का फैसला भी लिया गया है। ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के नियमों में जरूरत के अनुसार बदलाव किए जाएंगे। इससे ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सकेगा।

इन इलाकों में ज्यादा असर

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में सबसे ज्यादा 74 तालुका सूखाग्रस्त घोषित किए गए हैं। इसके बाद अमरावती में 56 तालुका शामिल हैं। नासिक डिवीजन के 49, नागपुर के 39, पुणे के 35 और ठाणे के 12 तालुका प्रभावित घोषित किए गए हैं।

मराठवाड़ा के जालना, बीड, लातूर, धाराशिव, नांदेड, परभणी और हिंगोली जैसे जिले भी इस सूची में शामिल हैं। विदर्भ, नासिक, पुणे और कोंकण क्षेत्र के कई इलाकों में भी सूखे की स्थिति बनी है।

राज्य में 18.8 फीसदी कम बारिश

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में जून से 18 सितंबर तक 755.9 मिलीमीटर बारिश हुई है। इस अवधि में सामान्य बारिश का आंकड़ा करीब 932.3 मिलीमीटर रहता है। इस हिसाब से राज्य में करीब 18.8 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है। सरकार ने सूखा प्रबंधन संहिता के तहत ट्रिगर-1 सक्रिय किया है।

इस व्यवस्था में बारिश में कमी और लंबे समय तक बारिश नहीं होने जैसी परिस्थितियों को देखा जाता है। इसके आधार पर राहत उपाय शुरू किए जाते हैं।

किसान संगठनों ने उठाई मांग

सरकार के फैसले पर विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि प्रभावित किसानों को सीधे आर्थिक सहायता देने की जरूरत है। किसान संगठनों ने फसल नुकसान के आधार पर मुआवजा देने की मांग की है। इसके अलावा कर्ज राहत और फसल बीमा भुगतान की मांग भी उठाई गई है।

ये भी पढ़ें…

महाराष्ट्र में सूखा: 20 जिलों में फसलें तबाह, बेहाल किसान सूखी फसल पर चला रहे ट्रैक्टर

ICAR-IWMI के बीच जल प्रबंधन पर समझौता, पानी बचाने वाली खेती को मिलेगा बढ़ावा

कमजोर बारिश के बीच सरकार ने रबी उत्पादन लक्ष्य 17.77 करोड़ टन तय किया, किसानों की चिंता बढ़ी

त्योहारी सीजन से पहले चीनी स्टॉक सीमा दोगुनी, गन्ना किसानों को भुगतान की उम्मीदें बढ़ीं

GENERAL newz@gmail.com

Read more