दिल्ली में रबी अभियान को लेकर बड़ा राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन हुआ। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसकी अध्यक्षता की। देशभर के कृषि मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी इसमें शामिल हुए। सम्मेलन में किसानों को लेकर कई बड़े ऐलान हुए। शिवराज ने कहा कि केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना होगा। यह काम राजनीति से ऊपर उठकर हो। उनके मुताबिक सरकारें आती-जाती रहती हैं, पर देश और किसान हमेशा रहेंगे।
सम्मेलन में क्या हुआ खास
केंद्रीय मंत्री ने मंच से ही 10 राज्यों को बड़ी वित्तीय मदद सौंपी। यह मदद प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत दी गई। कुल रकम 1082 करोड़ रुपए से ज्यादा की रही।
इस रकम में छत्तीसगढ़ को भी हिस्सा मिला है। छत्तीसगढ़ को 181 करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं। पश्चिम बंगाल को सबसे ज्यादा 290 करोड़ रुपए मिले। हरियाणा को 198 करोड़ रुपए और बिहार को 114 करोड़ रुपए मिले।
अरुणाचल प्रदेश, कर्नाटक, मिजोरम, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और पंजाब को भी रकम मिली है। शिवराज सिंह के मुताबिक केंद्र सिर्फ नीति नहीं बनाता। समय पर संसाधन भी देता है।
किसानों के हित में नई रणनीति
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में किसानों का हित सबसे ऊपर रखा गया है। उनके मुताबिक अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों से भारतीय उत्पादों को नया बाजार मिलेगा। उन्होंने ‘टीम एग्रीकल्चर’ की बात भी कही। उनके अनुसार इसी भावना से भारत दुनिया का फूड बास्केट बन सकता है।
कृषि विकास दर के आंकड़े
शिवराज सिंह के मुताबिक 2015 के बाद कृषि विकास दर 3 से बढ़कर 4.5 प्रतिशत हुई है। उनके अनुसार वार्षिक खाद्यान्न उत्पादन में बढ़ोतरी भी दोगुनी से ज्यादा हुई है। पहले यह बढ़ोतरी करीब 40 लाख टन सालाना थी। अब यह बढ़कर 84 लाख टन सालाना तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा केंद्रीय मंत्री ने खुद सम्मेलन में साझा किया।
उन्होंने रबी खाद्यान्न उत्पादन का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक 2023-24 से 2025-26 के बीच रबी उत्पादन 205 लाख टन बढ़ा है। उन्होंने इसका श्रेय राज्यों के कृषि विभाग, वैज्ञानिकों और किसानों को दिया।
हर महीने होगी समीक्षा बैठक
केंद्रीय मंत्री ने नई कार्यप्रणाली का ऐलान किया। उनके मुताबिक अब हर महीने राज्यों के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठक होगी। राज्य स्तर पर कृषि मंत्री, सचिव और कृषि विश्वविद्यालयों को जोड़कर टीम बनेगी।
जिला स्तर पर भी बदलाव होगा। कलेक्टर, कृषि अधिकारी, वैज्ञानिक, बैंकर और किसानों की मासिक बैठक होगी। इससे योजनाओं पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।
बैठकों की तारीखें भी तय हुई हैं। हर साल 10 मई को जिला स्तर पर खरीफ बैठक होगी। 17 मई को यह राज्य स्तर पर होगी। इसी तरह 10 सितंबर और 17 सितंबर को रबी की बैठकें होंगी।
खेत बचाओ अभियान की शुरुआत
केंद्रीय मंत्री ने मिट्टी की सेहत पर भी जोर दिया। उन्होंने 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाने का ऐलान किया। इसमें सॉइल हेल्थ कार्ड के आधार पर खाद के सही इस्तेमाल पर जोर रहेगा।
अभियान का एक हिस्सा पूर्वी भारत पर केंद्रित है। झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में यह अभियान खास तौर पर चलेगा। धान कटाई के बाद खाली खेतों में दलहन की खेती बढ़ाई जाएगी। इसे राइस फेलो खेती कहा जाता है।
नकली खाद-बीज पर जीरो टॉलरेंस
शिवराज सिंह ने नकली खाद और बीज पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि किसानों से धोखाधड़ी करना देश के खिलाफ अपराध है। उन्होंने राज्यों को सख्त निर्देश दिए। नकली खाद, बीज और घटिया कीटनाशकों पर कार्रवाई हो।
उन्होंने जबरन टैगिंग को पूरी तरह बंद करने को भी कहा। जबरन टैगिंग में किसान को खाद के साथ अनचाहा उत्पाद खरीदना पड़ता है। मंत्री के मुताबिक देश में बीज और खाद की उपलब्धता पर्याप्त है।
प्राकृतिक खेती पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने खेती को टिकाऊ बनाने पर भी बात की। उन्होंने प्राकृतिक खेती और इंटीग्रेटेड फार्मिंग अपनाने का आह्वान किया। फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को भी मिशन मोड में लाने की बात कही।
इंटीग्रेटेड फार्मिंग का मतलब खेती के साथ पशुपालन, मछली पालन जैसी गतिविधियां जोड़ना है। मंत्री के मुताबिक इससे किसानों की आय के कई स्रोत बन सकते हैं।
फसल बीमा और केसीसी पर निर्देश
केंद्रीय मंत्री ने रबी की तैयारियों पर खास निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बुवाई मिट्टी की नमी और पानी की उपलब्धता देखकर ही हो। उन्होंने फसलों को कीट-रोग से बचाने की पुख्ता व्यवस्था करने को भी कहा।
उन्होंने सभी पात्र किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से जोड़ने के निर्देश दिए। फसल बीमा योजना में पारदर्शी क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट (CCE) कराने की बात भी कही। उनके मुताबिक राज्य के मंत्री खुद योजनाओं की नियमित समीक्षा करें।
तुअर-मसूर की पूरी खरीद
किसानों को सही दाम दिलाने के लिए केंद्रीय मंत्री ने बड़ा वादा किया। उन्होंने कहा कि तुअर, उड़द और मसूर एमएसपी पर पूरी खरीदी जाएगी। उनके मुताबिक भुगतान 48 घंटे में करने की व्यवस्था होगी।
उन्होंने पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन और वैज्ञानिक भंडारण पर भी जोर दिया। उनके अनुसार व्यापार समझौतों से भारतीय फल, सब्जी और अनाज को वैश्विक बाजार मिलेगा।
किसानों के लिए क्या मायने
इस सम्मेलन की घोषणाएं सीधे किसानों की जेब और खेती से जुड़ी हैं। तुअर-मसूर की पूरी खरीद और तेज भुगतान से किसानों को पैसा जल्दी मिल सकता है। नकली खाद-बीज पर सख्ती से ठगी का खतरा कम हो सकता है।
हालांकि ये सभी बातें अभी घोषणा के स्तर पर हैं। इनके लागू होने की समयसीमा और तरीका आगे साफ होगा। किसान अपने कृषि विभाग से इन योजनाओं की जानकारी ले सकते हैं।
सम्मेलन में कौन-कौन रहे मौजूद
सम्मेलन में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी भी शामिल हुए। केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चंद्रा भी मौजूद रहे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट भी उपस्थित रहे।
इनके अलावा राज्यों के अधिकारी, वैज्ञानिक और संस्थानों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। यह सम्मेलन रबी अभियान-2026 के दूसरे दिन आयोजित हुआ।
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