केंद्र सरकार ने देश के करोड़ों किसान परिवारों को बड़ी राहत दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फैसला लिया। पीएम किसान योजना अब 2026-27 से 2030-31 तक जारी रहेगी। यह फैसला 11 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली से सामने आया। सरकार ने इसके लिए कुल 3.15 लाख करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। यानी अगले पांच साल तक किसानों को सीधी नकद मदद मिलती रहेगी।
कैबिनेट का फैसला क्या है
मंत्रिमंडल ने पीएम किसान योजना को पांच साल और चलाने की मंजूरी दी है। नया दौर वर्ष 2026-27 से शुरू होकर 2030-31 तक चलेगा। इस पूरे समय के लिए 3.15 लाख करोड़ रुपए की राशि तय हुई है। सीधा हिसाब लगाएं तो यह औसतन करीब 63,000 करोड़ रुपए हर साल बैठता है।
इस फैसले से देश भर के भूमिधारक किसान परिवारों को भरोसा मिला है। भूमिधारक यानी वे किसान, जिनके नाम पर खेती की जमीन दर्ज है। उन्हें अगले पांच साल तक सीधी नकद सहायता मिलती रहेगी।
माना जा रहा है कि योजना को आगे भी बजट मिलता रहेगा। इससे योजना रुकने को लेकर किसानों के मन में उलझन नहीं रहेगी। योजना करीब सात साल से चल रही है। अब इसे 2030-31 तक बढ़ाने से किसानों को लंबे समय का भरोसा मिला है।
किसानों को कैसे मिलता है पैसा
पीएम किसान योजना फरवरी 2019 में शुरू हुई थी। इसके तहत पात्र किसान परिवारों को हर साल 6,000 रुपए मिलते हैं। यह रकम तीन बराबर किस्तों में दी जाती है। हर किस्त में आम तौर पर 2,000 रुपए सीधे खाते में आते हैं। यह प्रक्रिया साल में तीन बार दोहराई जाती है।
पैसा आधार सत्यापन और डीबीटी (Direct Benefit Transfer) प्रणाली से भेजा जाता है। इसमें बीच के बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाती है। सरकार का कहना है कि इससे सही किसान तक पैसा पहुंचता है। डिजिटल पहचान और सीधे भुगतान से यह काम तय समय पर होता है।
लाभार्थियों की सूची की जांच राज्य सरकारें करती हैं। यह सत्यापन आगे भी पहले की तरह जारी रहेगा। मकसद साफ है कि अपात्र लोग योजना से बाहर रहें। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान समेत सभी राज्यों में यही व्यवस्था रहेगी।
अब तक कितना पैसा बंटा
योजना के आंकड़े काफी बड़े हैं। अब तक 23 किस्तें जारी हो चुकी हैं। इनमें किसानों के खातों में 4.47 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा पहुंचे हैं। पिछली यानी 23वीं किस्त में 9.49 करोड़ से ज्यादा किसानों को लाभ मिला। उस एक किस्त में 18,984 करोड़ रुपए से ज्यादा जारी किए गए थे।
सरकार के मुताबिक कोविड-19 के दौर में भी योजना का पैसा मिलता रहा। इस दौरान किसानों को 1.71 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा मिले। तब खेती से जुड़ी बाकी आमदनी पर असर पड़ा था।
महिला किसानों को भी योजना से बड़ा फायदा हुआ है। उन्हें अब तक 1.06 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा मिल चुके हैं। लाभार्थियों में लगभग हर चौथी किसान महिला है।
योजना का असर क्या रहा
नीति आयोग (National Institution for Transforming India) ने इस योजना का असर परखा। यह आकलन आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय का है।
इसके मुताबिक 92 प्रतिशत से ज्यादा लाभार्थियों ने रकम खेती में लगाई। करीब 85 प्रतिशत किसानों ने माना कि उनकी खेती की आमदनी बेहतर हुई है। साहूकारों और अनौपचारिक कर्ज पर उनकी निर्भरता भी घटी है।
उत्पादन में बढ़त का दावा
सरकार के मुताबिक 2020-21 से 2025-26 के बीच खेती में अच्छी बढ़त दर्ज हुई। इस दौरान खेती का रकबा लगभग 9.65 प्रतिशत बढ़ा। उत्पादकता करीब 10.53 प्रतिशत बढ़ी। कुल खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 21.18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
सरकार इस बढ़त का एक कारण पीएम किसान जैसी योजनाओं को मानती है। इन योजनाओं से किसानों को आर्थिक राहत मिली। ये आंकड़े सरकार की ओर से दिए गए हैं।
प्रधानमंत्री ने क्या कहा
फैसले के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा कि सरकार किसानों की मजबूती और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है। उनके मुताबिक इस विस्तार से अन्नदाताओं को बीज और खाद में सहारा मिलेगा। खेती की दूसरी जरूरतों में भी मदद मिलेगी।
खेती के जानकार भी इस रकम को खास मानते हैं। उनका कहना है कि बीज, खाद और सिंचाई का शुरुआती खर्च भारी पड़ता है। छोटे कृषि उपकरणों का खर्च भी इसमें आता है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह रकम खास तौर पर मददगार है। बुवाई के मौसम में अक्सर नकदी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
24वीं किस्त और ई-केवाईसी
पीएम किसान की 24वीं किस्त अभी जारी नहीं हुई है। लेकिन मंत्रिमंडल के फैसले से साफ है कि योजना पांच साल और चलेगी। फिलहाल सालाना 6,000 रुपए की रकम में बदलाव की जानकारी नहीं दी गई है।
कृषि मंत्रालय के मुताबिक पंजीकृत किसान अपने खाते की स्थिति खुद देख सकते हैं। इसके लिए पीएम किसान का पोर्टल और मोबाइल ऐप मौजूद है। ई-केवाईसी (electronic Know Your Customer) पूरी न होने पर किस्त रुक सकती है।
किसान अब क्या करें
किसानों को सबसे पहले अपनी ई-केवाईसी पूरी कर लेनी चाहिए। इसके बाद पोर्टल या ऐप पर अपने खाते की स्थिति जांच लें। आधार सत्यापन अधूरा हो तो उसे भी पूरा कराएं। किसी दिक्कत में राज्य के कृषि विभाग या स्थानीय अधिकारी से संपर्क करें।
यह योजना सिर्फ पात्र किसान परिवारों के लिए है। इसलिए सही जानकारी और सही दस्तावेज रखना जरूरी है। फर्जी संदेश या कॉल पर अपनी बैंक जानकारी साझा न करें।
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