किसान की बात,सूत्र के साथ

अल नीनो का असर: सरकार ने अनाज उत्पादन लक्ष्य घटाकर 373.93 मिलियन टन किया, शिवराज बोले- 12% बारिश कम हुई

newz@gmail.com | Sep 30, 2026, 13:37 IST

सरकार ने अल नीनो की चिंता के बीच 2026-27 के लिए अनाज उत्पादन लक्ष्य घटाकर 373.93 मिलियन टन किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक देश में बारिश 12 फीसदी कम हुई है, लेकिन यह बड़ा संकट नहीं है।

अनाज उत्पादन

सरकार ने अनाज उत्पादन का लक्ष्य घटा दिया है। यह फैसला अल नीनो (El Nino) की चिंताओं के बीच लिया गया है। 2026-27 फसल वर्ष के लिए नया लक्ष्य 373.93 मिलियन टन तय हुआ है। यह आंकड़ा पिछले साल के असली उत्पादन से भी कम है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुद यह जानकारी दी। उनके मुताबिक अभी देश में बारिश की करीब 12 प्रतिशत कमी है।

कितना घटा है लक्ष्य

2025-26 फसल वर्ष में देश में असल में 376.56 मिलियन टन अनाज पैदा हुआ था। नए साल का लक्ष्य इससे 2.63 मिलियन टन कम रखा गया है। हालांकि यह पिछले साल के 362 मिलियन टन के लक्ष्य से अब भी ज्यादा है। यानी असली उत्पादन के मुकाबले लक्ष्य घटा है। पर पिछले लक्ष्य से यह अब भी ऊंचा है।

खरीफ और रबी का अलग-अलग हिसाब

कुल लक्ष्य को दो हिस्सों में बांटा गया है। खरीफ सीजन के लिए 196.21 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य है। रबी सीजन के लिए यह लक्ष्य 177.72 मिलियन टन रखा गया है।

भारत में खरीफ यानी गर्मी और रबी यानी सर्दी में अलग फसलें उगती हैं। धान जैसी खरीफ फसलों की बुवाई अभी खत्म हुई है। गेहूं जैसी रबी फसलों की बुवाई अक्टूबर से शुरू होगी।

अल नीनो का क्या असर बताया गया

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया को यह जानकारी दी। उनके मुताबिक अल नीनो के आकलन पर ही यह लक्ष्य तय हुआ है। उन्होंने कहा कि पानी और मिट्टी की नमी को ध्यान में रखा गया है। जरूरत पड़ने पर फसल पैटर्न बदलने के लिए राज्यों से बातचीत भी हुई है।

रबी की बुवाई की योजना में भी अल नीनो को ध्यान में रखा गया। खरीफ सीजन में कुछ इलाकों में सूखा तो कुछ में बाढ़ जैसे हालात रहे। मंत्री के मुताबिक इन दोनों चुनौतियों को भी योजना में शामिल किया गया है। चौहान के मुताबिक कम बारिश वाले इलाकों में ज्यादा पानी वाली फसल नहीं उगेगी। ऐसी जगहों पर दलहन और तिलहन जैसी फसलों को प्राथमिकता दी जाएगी।

सूखे को लेकर सरकार की चिंता

मंत्री से पूछा गया कि साल के आखिर तक अल नीनो के और मजबूत होने का अनुमान है। इस पर उन्होंने कहा कि सरकार राज्यों के साथ लगातार बातचीत कर रही है। उनके मुताबिक बारिश और मिट्टी की नमी में इलाके के हिसाब से फर्क है। जहां सूखे जैसे हालात बनेंगे, वहां आपातकालीन उपाय अपनाए जाएंगे।

चौहान ने साफ कहा कि बारिश में करीब 12 प्रतिशत की कमी है। उनके मुताबिक सूखा तब माना जाता है, जब कमी 20 प्रतिशत से ज्यादा हो। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा संकट नहीं है। मुश्किलें कुछ खास इलाकों तक ही सीमित हैं।

खाद की उपलब्धता पर क्या कहा

मंत्री ने खाद को लेकर भी अहम बात कही। उनके मुताबिक कीमतों में उतार-चढ़ाव जरूर है। कुछ मामलों में कीमतें करीब दोगुनी हुई हैं। इसके बावजूद उनके अनुसार खाद की उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है। उन्होंने कहा कि देश में खाद की कोई कमी नहीं है। रबी सीजन के लिए पर्याप्त सप्लाई रहेगी।

राज्यों ने 2026-27 के लिए खाद की जरूरत करीब 380 लाख टन बताई है। मौजूदा शुरुआती स्टॉक 163 लाख टन से ज्यादा है। पिछले साल रबी सीजन की शुरुआत में यह स्टॉक 122 लाख टन था।

खरीफ में किन फसलों का रकबा घटा

मंत्री के मुताबिक खरीफ सीजन में अल नीनो और कुछ इलाकों में सूखे-बाढ़ के बावजूद उत्पादन में बड़ी गिरावट नहीं आएगी। उन्होंने बताया कि सरकार ने अप्रैल में ही तैयारी शुरू कर दी थी। कुछ खरीफ फसलों का रकबा घटा है। पर कुल रकबा करीब पिछले साल जैसा ही रहा। सबसे ज्यादा कमी धान में आई है। धान का रकबा करीब 16.32 लाख हेक्टेयर घटा है।

मक्का, सोयाबीन और कपास के रकबे में भी कमी दर्ज हुई है। वहीं उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी, मूंग और अरहर का रकबा बढ़ा है। मंत्री के मुताबिक किसान दलहन और मोटे अनाज अपना रहे हैं।

राजस्थान में भी सूखे की चिंता

खेती के रकबे में कमी वाले राज्यों में राजस्थान का भी नाम है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और गुजरात में भी रकबा घटा है। इन राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ से करीब 6.11 लाख हेक्टेयर में फसलें प्रभावित हुई हैं। मंत्री के मुताबिक नुकसान का पूरा आकलन अभी किया जा रहा है।

राजस्थान का जिक्र सूखे की चिंता वाले राज्यों में भी हुआ है। मंत्री के अनुसार कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना को लेकर चिंता है। आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों को लेकर भी चिंता है। राजस्थान के कुछ हिस्सों को लेकर भी यही चिंता है। उन्होंने कहा कि राज्यों से विस्तृत रिपोर्ट का अभी इंतजार है। राज्य के अनुरोध पर एक केंद्रीय टीम 3 अक्टूबर को कर्नाटक का दौरा करेगी। यह दौरा वहां सूखे की स्थिति का जायजा लेने के लिए होगा।

किसानों के लिए क्या मायने

अनाज का लक्ष्य कम होना किसी एक फसल या राज्य की बात नहीं है। यह पूरे साल की खेती योजना से जुड़ा है। जिन इलाकों में बारिश कम हुई है, वहां फसल चुनने में सावधानी बेहतर रहेगी।

एमपी, सीजी और राजस्थान के किसान बुवाई से पहले नमी देख लें। सिंचाई का साधन भी जांच लें। जिन इलाकों में पानी की कमी है, वहां दलहन-तिलहन बेहतर विकल्प हो सकते हैं। खाद का स्टॉक पिछले साल से ज्यादा बताया गया है। इसलिए किल्लत की आशंका कम है। इसके बावजूद बुवाई से पहले स्थानीय कृषि विभाग से सलाह जरूर लें।

ये भी पढ़ें…

रबी अभियान सम्मेलन: शिवराज ने 10 राज्यों को दी 1082 करोड़ की मदद, तुअर-मसूर की पूरी खरीद का ऐलान

सरकार ने भारत में पैराक्वाट खरपतवारनाशी पर लगाया प्रतिबंध, जानें वजह और क्या होगा किसानों पर असर

भारतीय किसान संघ का महिला किसान सम्मेलन 30 सितंबर को दिल्ली में, सात हजार महिलाएं होंगी शामिल

महाराष्ट्र में 32 जिलों के 265 तालुका सूखाग्रस्त घोषित, किसानों को कर्ज और बिजली में राहत देगी राज्य सरकार

GENERAL newz@gmail.com

Read more