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दिल्ली में हुआ महिला किसान सम्मेलन: जमीन के अधिकार से लेकर जैविक खेती तक उठे बड़े मुद्दे, भागीदारी की मांग

newz@gmail.com | Oct 1, 2026, 15:30 IST

दिल्ली में भारतीय किसान संघ के महिला किसान सम्मेलन में हजारों महिलाएं जुटीं। सम्मेलन में जमीन के अधिकार, खेती में पहचान और नीतियों में भागीदारी पर चर्चा हुई। जैविक खेती, बीज संरक्षण, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण पर भी जोर दिया गया।

महिला किसान सम्मेलन

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में महिला किसानों का बड़ा सम्मेलन हुआ। इसका आयोजन भारतीय किसान संघ यानी BKS (Bharatiya Kisan Sangh) ने किया। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से महिला किसान पहुंचीं। सम्मेलन में खेती में महिलाओं की भूमिका प्रमुख मुद्दा रही। जमीन के मालिकाना हक से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। कृषि नीतियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की मांग सामने आई।

महिला किसान की पहचान पर जोर

BKS की अखिल भारतीय महिला संयोजक मंजू दीक्षित ने अपनी बात रखी। उन्होंने खेती में महिलाओं की भूमिका को पहचान देने पर जोर दिया। उनके मुताबिक किसान कहते ही अक्सर पुरुष की तस्वीर सामने आती है। जबकि महिलाएं भी सालभर खेती के कई काम करती हैं। इसके बावजूद उनके योगदान को पर्याप्त पहचान नहीं मिलती।

उन्होंने जमीन के मालिकाना अधिकार का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि जमीन में महिलाओं की हिस्सेदारी काफी कम है। इसलिए महिला किसानों के भूमि अधिकार पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कृषि नीतियों में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात कही। इससे महिलाओं की व्यावहारिक जरूरतें नीति निर्माण तक पहुंच सकती हैं।

कई राज्यों से पहुंचीं महिलाएं

सम्मेलन में देश के अलग-अलग क्षेत्रों से महिला किसान पहुंचीं। इनमें मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश की महिलाएं भी शामिल थीं। पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, कश्मीर और उत्तर प्रदेश से भी महिलाएं पहुंचीं। संगठन के मुताबिक हजारों महिला किसानों और कृषि मजदूरों ने भागीदारी की।

BKS के अनुसार संगठन के करीब 42 लाख सदस्य हैं। इनमें लगभग सात लाख महिलाएं कार्यकर्ता के रूप में जुड़ी हैं। ये महिला कार्यकर्ता गांव से लेकर राज्य स्तर तक सक्रिय हैं। वे जिला और तहसील स्तर पर भी संगठन के साथ काम करती हैं।

जैविक खेती पर हुआ मंथन

सम्मेलन में जैविक और रसायन-मुक्त खेती पर भी चर्चा हुई। पारंपरिक बीजों के संरक्षण को महत्वपूर्ण विषय के रूप में रखा गया। महिला किसानों से अपने खेती अनुभव साझा करने की अपील की गई। आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी साझा करने पर भी जोर दिया गया।

पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण पर भी चर्चा की गई। इनके जरिए ग्रामीण स्तर पर रोजगार बढ़ाने की संभावनाओं पर बात हुई। मिट्टी की सेहत को खेती के भविष्य से जोड़ा गया। जलवायु बदलाव के बीच टिकाऊ खेती की जरूरत भी बताई गई।

महिला किसानों का हुआ सम्मान

सम्मेलन में बेहतर काम करने वाली महिला किसानों को सम्मानित किया गया। इनमें जैविक खेती से जुड़ी महिला किसान शामिल थीं। गाय आधारित खेती और कृषि कारोबार में सक्रिय महिलाओं को सम्मान मिला। बीज संरक्षण और पशुपालन में काम करने वाली महिलाएं भी सम्मानित हुईं।

खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी महिला किसानों को भी मंच पर पहचान मिली। कार्यक्रम में सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की गईं। अलग-अलग राज्यों की महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में कार्यक्रम में शामिल हुईं। लोक गीतों और नृत्यों की प्रस्तुतियां भी कार्यक्रम का हिस्सा रहीं।

सम्मेलन में देशभर से प्राप्त प्रविष्टियों में से उत्कृष्ट कार्य करने वाली इन महिला किसानों को सम्मानित किया गया

  • ​गौ-कृषि-वाणिज्यम्: सुनंदा सायसिंग (महाराष्ट्र)
  • ​जैविक कृषि: दीपाली ओरांव (पश्चिम बंगाल)
  • ​बीज संरक्षण: कमला बेन (गुजरात)
  • ​पशुपालन: अंबा कालिंधी एवं श्रीमती पंपा गराई (पश्चिम बंगाल)
  • ​रोजगार सृजन: पुष्पा सिंह (बिहार)
  • ​खाद्य प्रसंस्करण: माया सिन्हा महापात्रा (ओडिशा), सुलता चटर्जी एवं शुक्ला बैरागी (पश्चिम बंगाल)

2047 के लक्ष्य पर चर्चा

BKS की राष्ट्रीय महासचिव मोहिनी मोहन मिश्रा ने सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने जैविक और रसायन-मुक्त खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने इसे वर्ष 2047 के विकसित भारत लक्ष्य से भी जोड़ा। उनके मुताबिक पौष्टिक भोजन के लिए टिकाऊ खेती को बढ़ाना जरूरी है।

संगठन के आयोजन सचिव दिनेश कुलकर्णी ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने आत्मनिर्भर महिला किसानों को पहचान देने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक इससे गांव और परिवारों को मजबूती मिल सकती है। इसका असर ग्रामीण समाज और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

2026 में क्यों खास आयोजन

यह आयोजन महिला किसानों पर वैश्विक चर्चा के बीच हुआ। वर्ष 2026 महिला किसानों के अंतरराष्ट्रीय वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। सम्मेलन में महिलाओं की कृषि पहचान पर खास जोर दिया गया। साथ ही उनके आर्थिक अधिकारों से जुड़े विषय भी सामने आए। खेती में महिलाओं की भागीदारी केवल खेतों तक सीमित नहीं है। पशुपालन और बीज संरक्षण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

खाद्य प्रसंस्करण और कृषि कारोबार में भी महिलाएं सक्रिय हो रही हैं। सम्मेलन में इन्हीं अलग-अलग भूमिकाओं को सामने लाने की कोशिश हुई। महिला किसानों के सामने जमीन का अधिकार बड़ा मुद्दा बना हुआ है। इसी कारण सम्मेलन में इस विषय को प्रमुखता से उठाया गया। संगठन ने कृषि नीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात कही। इससे महिला किसानों की जरूरतें निर्णय प्रक्रिया तक पहुंच सकती हैं।

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