महाराष्ट्र के बीड जिले में किसानों का गुस्सा अब खेतों में दिखने लगा है। मांजरा क्षेत्र के किसान फसल बर्बादी से बेहद परेशान हैं। उन्होंने सरकार के खिलाफ खुलकर विरोध प्रदर्शन किया। किसान खेतों में उतरे और जमकर नारेबाजी की। उन्होंने मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री के खिलाफ अपनी बात रखी। इस दौरान ‘बोम्बा मारा’ आंदोलन के जरिए आक्रोश जताया गया। किसानों ने सूखी सोयाबीन की फसल जलाई। उसके साथ सरकार के विवादित जीआर की भी होली जलाई गई। यानी किसानों ने फसल और सरकारी आदेश दोनों जला दिए।
मांजरा में क्या हुआ
मांजरा नदी के मैदानी इलाके को बीड जिले का ग्रीनबेल्ट माना जाता है। यही इलाका आज सूखे जैसे हालात से जूझ रहा है। किसानों के मुताबिक इस साल मानसून की कमी रही। इसका सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ा है। सोयाबीन और कपास की फसलें खेतों में सूख गई हैं। गन्ने की बढ़वार भी प्रभावित हुई है।
पिछले साल बाढ़, इस साल सूखा
किसानों का कहना है कि पिछले साल इसी समय भारी बारिश हुई थी। बाढ़ से खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई थीं। इस साल हालात बिल्कुल उलटे हैं। बारिश कम हुई और सूखे जैसी स्थिति बन गई। यानी इलाके के किसानों पर लगातार दूसरे साल मौसम की मार पड़ी है।
मदन परदेशी शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे के पूर्व तालुका प्रमुख हैं। उन्होंने भी यही बात रखी। उनके मुताबिक पिछले साल ओलावृष्टि हुई थी। धनेगांव बांध के पानी से भी फसलों को नुकसान हुआ। इस साल सूखे ने किसानों की मुश्किल और बढ़ा दी है।
सोयाबीन में नहीं भरा दाना
प्रदर्शन में शामिल किसानों के मुताबिक सूखे से सोयाबीन की फलियां गिर गईं। फसल में दाना भरने की स्थिति ही नहीं बन पाई। मदन परदेशी ने भी कहा कि सोयाबीन खेतों में खड़ी तो दिखती है। लेकिन उसमें दाना नहीं भर रहा है।
नाना ढगे मांजरा क्षेत्र के किसान हैं। उन्होंने कहा कि सोयाबीन की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। किसानों का कहना है कि खेती पर लागत पहले ही खर्च हो चुकी है। कई किसानों ने इसके लिए कर्ज भी लिया है। अब फसल खराब होने से उनकी आर्थिक मुश्किल और बढ़ गई है।
जीआर पर किसानों की नाराजगी
मदन के मुताबिक सरकार का जारी जीआर किसानों के लिए पर्याप्त नहीं है। इसी वजह से किसानों ने प्रदर्शन में इस आदेश की होली जलाई।
एक किसान ने आरोप लगाया कि सब्सिडी और सहायता के ऐलान हो रहे हैं। उसके मुताबिक इनका लाभ किसानों तक नहीं पहुंच रहा। उसने कहा कि सरकारी दफ्तरों में अलग-अलग कागजी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।
उसी किसान ने पुराने दौर की भी बात की। उसने कहा कि कृषि मंत्री पवार के समय दो बार सीधी मदद मिली थी। अब सहायता पाने की प्रक्रिया काफी जटिल हो गई है। ये बातें किसानों के आरोप और दावे हैं। इस रिपोर्ट में सरकार का पक्ष सामने नहीं आया है।
किसानों की मांग क्या है
मदन के मुताबिक किसान सोयाबीन जैसी फसलों के नुकसान पर मदद चाहते हैं। उनकी मांग है कि सरकार प्रति एकड़ 50 हजार रुपए दे। गन्ना किसानों के लिए प्रति एकड़ एक लाख रुपए की सहायता मांगी गई है।
किसानों के मुताबिक पर्याप्त मदद नहीं मिलने से उनका गुस्सा बढ़ रहा है। नाना ढगे ने सरकार से जल्द सहायता शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पहले किसानों के नुकसान का आकलन किया जाए। इसके बाद बिना कठिन शर्तों के राहत दी जाए।
किसानों ने मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री से अपील की है। उनकी मांग है कि प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत सहायता पहुंचाई जाए।
गन्ने और चारे की चिंता
नाना ढगे के मुताबिक गन्ने की हालत भी बहुत खराब है। गन्ने की बढ़वार रुक गई है। उन्होंने कहा कि फसल पर किया गया खर्च वापस मिलने की उम्मीद कम है।
उन्होंने चारे को लेकर भी चिंता जताई। फसल खराब होने से पशुओं के चारे की समस्या खड़ी हो सकती है। इसलिए किसान चाहते हैं कि राहत में चारे की व्यवस्था भी शामिल हो।
महाराष्ट्र में सूखे के हालात
अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य के दूसरे हिस्सों में भी सूखे का असर है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सूखे क्षेत्र का दायरा बढ़ सकता है। साथ ही मंडल स्तर पर फसल नुकसान का सर्वे होने की बात आई है।
एक अन्य रिपोर्ट में पोल्ट्री पर सूखे के असर की बात कही गई है। इसमें बताया गया कि मक्का महंगा होने से मुर्गी पालन की लागत बढ़ी है। फसल नुकसान के पंचनामे में किसान के हस्ताक्षर की व्यवस्था की भी खबर है।
इसी बीच कर्जमाफी की तीसरी किस्त जारी होने की रिपोर्ट भी आई। इसके मुताबिक 3.27 लाख किसानों को 3,161 करोड़ रुपए मिले हैं।
आगे किसानों की नजर
बीड के किसानों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर है। उनकी मांग साफ है। पहले नुकसान का सही आकलन हो। फिर जल्द आर्थिक मदद मिले। साथ ही पशुओं के चारे की व्यवस्था भी की जाए।
खेतों में सूखी फसल जलाने की तस्वीर किसानों की मुश्किल दिखाती है। अब देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है। फिलहाल इस प्रदर्शन पर सरकार की कोई प्रतिक्रिया रिपोर्ट में दर्ज नहीं है।
