किसान की बात,सूत्र के साथ

आज एमपी के कई जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, सीजी में हल्की बारिश तो राजस्थान में धूलभरी आंधी के आसार

newz@gmail.com | Oct 3, 2026, 08:00 IST

शनिवार तीन अक्टूबर को एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बारिश के आसार हैं। एमपी के कई जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट है। राजस्थान में धूलभरी आंधी के साथ बारिश संभव है। किसानों को फसल और उपज सुरक्षित रखने की सलाह दी जाती है।

आज का मौसम

मध्य प्रदेश में तीन अक्टूबर को मौसम सक्रिय रहेगा। कई जिलों में बारिश और आंधी का अलर्ट है। पन्ना, उमरिया और गुना में बारिश संभव है। इंदौर और देवास में भी मौसम बदल सकता है। कटनी और नीमच में भी बारिश के आसार हैं। मुरैना, छिंदवाड़ा और अशोकनगर में भी चेतावनी है। इन इलाकों में तेज हवाएं चल सकती हैं। हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर रह सकती है। भोपाल में मौसम बदलने के आसार हैं। यहां अधिकतम तापमान 32 डिग्री रह सकता है। न्यूनतम तापमान 21 डिग्री तक रह सकता है।

इंदौर में किसान सावधान

इंदौर के लिए तीन अक्टूबर का मौसम अहम रहेगा। जिले को बारिश और आंधी वाले क्षेत्रों में रखा गया है। तेज हवा के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। खेतों में खड़ी फसलों पर इसका असर पड़ सकता है। तैयार उपज खुले में रखी है तो उसे ढकना जरूरी है। किसान स्थानीय मौसम चेतावनी के अनुसार काम करें।

बारिश के दौरान खेतों में दवा छिड़काव टालना बेहतर रहता है। तेज हवा में छिड़काव करने से नुकसान हो सकता है। कटाई का काम भी मौसम देखकर करना चाहिए। तैयार फसल को सुरक्षित और ऊंची जगह रखें।

राजस्थान में धूलभरी आंधी

राजस्थान में भी 3 अक्टूबर को मौसम बदलेगा। बीकानेर में बारिश के साथ धूलभरी आंधी संभव है। उदयपुर में भी बारिश का अलर्ट बताया गया है। कोटा और अजमेर में भी मौसम खराब रह सकता है। भरतपुर और भीलवाड़ा में बारिश संभव है। बूंदी और बारां में भी चेतावनी जारी है। यहां हवा की रफ्तार 50 किलोमीटर तक पहुंच सकती है।

जयपुर में अधिकतम तापमान 36 डिग्री रह सकता है। न्यूनतम तापमान करीब 23 डिग्री रहने का अनुमान है। धूलभरी आंधी से खेतों में काम प्रभावित हो सकता है। किसान खुले में रखी उपज को सुरक्षित करें। पशुओं के लिए भी सुरक्षित स्थान तैयार रखें।

छत्तीसगढ़ में बारिश के आसार

छत्तीसगढ़ में भी बारिश का दौर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उपलब्ध पूर्वानुमान में छह अक्टूबर तक बारिश है। इस दौरान कुछ जगह हल्की से मध्यम बारिश संभव है। तीन अक्टूबर को भी कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है। मौसम विभाग की जानकारी के अनुसार यह गतिविधि सीमित रह सकती है।

छत्तीसगढ़ में किसान धान और दूसरी फसलों पर नजर रखें। बारिश के दौरान खेतों में पानी जमा हो सकता है। कटाई के करीब पहुंची फसलों में विशेष सावधानी जरूरी है। कटी उपज खुले में रखने से नुकसान हो सकता है। स्थानीय कृषि मौसम सलाह देखकर ही जरूरी काम करें।

मानसून की वापसी जारी

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी जारी है। तीन अक्टूबर तक कई राज्यों से वापसी के हालात हैं। इनमें मध्य प्रदेश और राजस्थान भी शामिल हैं। छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्से भी वापसी क्षेत्र में हैं।

इसके बावजूद बारिश की गतिविधियां बनी हुई हैं। मौसम सिस्टम बारिश को कुछ इलाकों तक पहुंचा रहे हैं। इसलिए मानसून वापसी का मतलब सूखा मौसम नहीं है। किसानों को अगले कुछ दिनों की जानकारी देखनी चाहिए।

मौसम बदलने की वजह

मौसम में बदलाव कई सक्रिय सिस्टम से जुड़ा है। पश्चिम बंगाल के पास निम्न दबाव क्षेत्र बना है। उत्तर-पूर्व असम में भी परिसंचरण सक्रिय है। दक्षिण भारत के पास भी एक परिसंचरण मौजूद है। इन सिस्टम के असर से कई राज्यों में बारिश है।

मौसम विभाग के अनुसार तेज हवाएं भी चल सकती हैं। कुछ राज्यों में हवा 50 किलोमीटर तक पहुंच सकती है। इसलिए आंधी के समय खुले खेतों में सावधानी जरूरी है। बिजली गिरने के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहना चाहिए।

किसानों के लिए जरूरी सावधानी

तीन अक्टूबर की बारिश किसानों के लिए मिश्रित असर ला सकती है। सूखी जमीन वाले खेतों में बारिश राहत दे सकती है। वहीं तैयार फसल को नुकसान का खतरा बढ़ सकता है। कटाई और मड़ाई का काम मौसम देखकर करें। खुले में रखी उपज को तिरपाल से ढकें। अनाज को नमी से बचाने के लिए सुरक्षित रखें।

कीटनाशक या उर्वरक का छिड़काव बारिश में नहीं करें। तेज हवा के दौरान भी छिड़काव से बचना चाहिए। खेत में काम करते समय बिजली की चेतावनी जरूर देखें। मौसम साफ होने के बाद ही जरूरी काम शुरू करें। स्थानीय कृषि मौसम सलाह सबसे ज्यादा उपयोगी रहेगी।

फसल पर क्या असर होगा

एमपी और राजस्थान में कई किसान खरीफ फसल के चरण में हैं। ऐसे समय अचानक बारिश से काम प्रभावित हो सकता है। तैयार फसल की कटाई कुछ समय के लिए रुक सकती है। कटी फसल में नमी बढ़ने का खतरा रहता है। खुले में रखे अनाज पर भी असर पड़ सकता है।

छत्तीसगढ़ में धान प्रमुख फसलों में शामिल है। बारिश के दौरान खेतों की स्थिति पर नजर जरूरी है। जहां फसल पकने के करीब है, वहां सावधानी बढ़ानी चाहिए। खेतों में जल निकासी की व्यवस्था भी देखनी चाहिए।

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