भारत में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून उम्मीद के मुताबिक नहीं बरसा। जून से सितंबर तक बारिश में बड़ी कमी दर्ज हुई। अब अक्टूबर का पूर्वानुमान भी चिंता बढ़ाने वाला है। IMD (India Meteorological Department) ने 30 सितंबर को आउटलुक जारी किया। इसके मुताबिक अक्टूबर में देश की बारिश सामान्य से कम रह सकती है। अधिकांश क्षेत्रों में कम बारिश होने की संभावना जताई गई है।
हालांकि कुछ इलाकों में स्थिति इससे अलग रह सकती है। उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश संभव है। दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में भी बेहतर बारिश के आसार हैं। पूर्वी भारत के कुछ इलाकों में भी बारिश सामान्य रह सकती है।
मानसून में 12.6 फीसदी की कमी
जून से सितंबर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून का मुख्य सीजन रहता है। इस दौरान देश में सामान्य बारिश 868.6 मिलीमीटर मानी जाती है। इस साल केवल 759 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इस तरह बारिश सामान्य से 12.6 प्रतिशत कम रही। यह 2001 के बाद चौथी सबसे कम मानसूनी बारिश बताई गई। कम बारिश का असर कई क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है।
मानसून की बारिश खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इससे खेतों के साथ जल स्रोतों को भी पानी मिलता है। बारिश कम होने पर सिंचाई की जरूरत बढ़ सकती है।
अक्टूबर में कम बारिश
IMD ने अक्टूबर के लिए भी कम बारिश का अनुमान दिया है। देश की मासिक बारिश सामान्य से नीचे रहने की संभावना है। अक्टूबर में बारिश LPA (Long Period Average) के 85 प्रतिशत से कम रह सकती है। इसका मतलब बारिश की कमी अक्टूबर में भी जारी रह सकती है।
देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश संभव है। हालांकि सभी राज्यों में स्थिति एक जैसी नहीं रहेगी। कुछ क्षेत्रों में सामान्य या ज्यादा बारिश भी हो सकती है।
पोस्ट-मानसून का अनुमान
अक्टूबर से दिसंबर तक पोस्ट-मानसून सीजन माना जाता है। इस अवधि के लिए भी पूर्वानुमान बहुत उत्साहजनक नहीं है। देश के अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश संभव है। उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में स्थिति बेहतर रह सकती है। दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में भी सामान्य बारिश की संभावना है।
दक्षिणी भारत में स्थिति देश से कुछ अलग रह सकती है। यहां अक्टूबर से दिसंबर तक सामान्य बारिश का अनुमान है। इसमें तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल शामिल हैं। तटीय आंध्र प्रदेश और यनम भी इस क्षेत्र में आते हैं। रायलसीमा, केरल, माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक भी शामिल हैं। इन क्षेत्रों में बारिश LPA के 88 से 112 प्रतिशत रह सकती है।
MP में कब होगी बारिश
मध्य प्रदेश में अक्टूबर की शुरुआत बारिश के साथ हो सकती है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की अवधि कुछ लंबी रह सकती है। यहां तीन अक्टूबर तक बारिश संभव है। बारिश सभी स्थानों पर एक साथ होने का अनुमान नहीं है। IMD ने कहीं-कहीं बारिश की संभावना जताई है।
किसानों के लिए यह पूर्वानुमान महत्वपूर्ण हो सकता है। कई क्षेत्रों में खरीफ फसलें कटाई के करीब हैं। ऐसे में स्थानीय मौसम देखकर कृषि गतिविधियां तय करना बेहतर रहेगा।
छत्तीसगढ़ में बारिश कब
छत्तीसगढ़ में बारिश कुछ दिनों बाद बढ़ सकती है। यहां दो से छह अक्टूबर के दौरान बारिश संभव है। विदर्भ में 30 सितंबर को बारिश की संभावना बताई गई है। इसके बाद पांच और छह अक्टूबर को फिर बारिश संभव है। मध्य भारत में बारिश स्थानीय मौसमी सिस्टम पर निर्भर रहेगी। इसलिए किसानों को दैनिक मौसम अपडेट देखते रहना चाहिए।
बिहार-UP में बारिश संभव
पूर्वी उत्तर प्रदेश में 30 सितंबर को बारिश संभव है। उत्तराखंड में भी कई दिनों तक मौसम सक्रिय रह सकता है। उत्तराखंड में दो अक्टूबर तक बारिश संभव है। इसके बाद पांच और छह अक्टूबर को बारिश हो सकती है।
झारखंड में भी दो अक्टूबर तक बारिश संभव है। बिहार में तीन से छह अक्टूबर तक बारिश हो सकती है। बिहार में चार से छह अक्टूबर तक तेज हवाएं चल सकती हैं। गरज और बिजली की गतिविधियां भी होने की संभावना है।
बंगाल की खाड़ी में सिस्टम
बंगाल की खाड़ी के आसपास मौसमी सिस्टम सक्रिय बने हुए हैं। म्यांमार के तटीय क्षेत्रों के पास एक सिस्टम बना था। डिप्रेशन कमजोर होकर वेल-मार्क्ड लो-प्रेशर एरिया में बदल गया। 30 सितंबर की सुबह इसकी स्थिति दर्ज की गई।
यह उत्तरी म्यांमार और दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश के आसपास मौजूद था। इसका असर मिजोरम और आसपास भी बना हुआ था। सिस्टम के उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने का अनुमान दिया गया। इसके और कमजोर होने की संभावना भी जताई गई।
कई सिस्टम अभी सक्रिय
उत्तर हरियाणा के आसपास पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय बताया गया है। यह चक्रवाती सर्कुलेशन के रूप में मौजूद है। पूर्वोत्तर असम में भी चक्रवाती सर्कुलेशन सक्रिय बताया गया। उत्तरी तटीय तमिलनाडु के आसपास भी ऐसा सिस्टम मौजूद है।
बंगाल की खाड़ी में भी अलग मौसमी गतिविधियां बनी हुई हैं। पूर्वी-मध्य अरब सागर के आसपास भी सर्कुलेशन सक्रिय बताया गया है। इन सिस्टमों के कारण कुछ राज्यों में बारिश जारी रह सकती है। हालांकि इससे देशव्यापी बारिश की कमी भरने की उम्मीद फिलहाल कम है।
किसानों के लिए क्यों अहम
खरीफ सीजन अब अपने अंतिम दौर में पहुंच रहा है। कई जगह धान और दूसरी फसलें पक रही हैं। कहीं कटाई भी शुरू होने वाली है। ऐसे समय बारिश का स्थानीय पूर्वानुमान किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। बारिश वाली जगहों पर कटी फसल सुरक्षित रखना जरूरी होगा।
दूसरी तरफ कम बारिश वाले क्षेत्रों में नमी महत्वपूर्ण रहेगी। रबी फसलों की तैयारी में भी मिट्टी की नमी जरूरी है। IMD अक्टूबर के अंत में अगला महत्वपूर्ण आउटलुक जारी करेगा। इसमें नवंबर की बारिश और तापमान का अनुमान शामिल रहेगा।
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