महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में सूखे की मार किसानों पर भारी पड़ रही है। कई इलाकों से सोयाबीन की फसल बर्बाद होने की खबरें आ रही हैं। इसी बीच लातूर और धाराशिव से दो किसानों की आत्महत्या के मामले आए हैं। दोनों किसानों के परिवारों का कहना है कि फसल बर्बाद हो गई थी। कर्ज चुकाने की चिंता भी लगातार बढ़ रही थी। हालांकि मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
मराठवाड़ा में सूखे का असर
मराठवाड़ा में इस साल बारिश की कमी रही है। इसका सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ा है। एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक यहां बारिश की कमी करीब 38 फीसदी रही।
सोयाबीन का उत्पादन भी सामान्य से कम रहने का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक यह सामान्य का सिर्फ 40 से 50 फीसदी रह सकता है। लातूर समेत कई जिलों में फसल पर गंभीर असर पड़ा है।
लातूर के देवकरा गांव का मामला
लातूर जिले की अहमदपुर तहसील के देवकरा गांव से पहला मामला आया है। यहां 60 वर्षीय किसान तुकाराम निवृत्ति गुट्टे की मौत हो गई। परिवार के मुताबिक वे करीब डेढ़ एकड़ जमीन पर खेती करते थे।
परिवार का आरोप है कि सूखे से सोयाबीन पूरी तरह बर्बाद हो गई थी। इसके बाद वे बैंक का कर्ज चुकाने को लेकर परेशान थे। उन्हें परिवार का खर्च चलाने की भी चिंता थी।
भतीजे सोमेश्वर गुट्टे के मुताबिक घटना से दो दिन पहले बात हुई थी। तब तुकाराम ने फसल बर्बाद होने और बैंक कर्ज की चिंता जताई थी। परिवार के मुताबिक उन्हें उम्मीद थी कि सोयाबीन बेचकर कर्ज चुका देंगे। फसल खराब होने से यह उम्मीद टूट गई। उन्हें यह चिंता भी थी कि कर्ज चुकाने के बाद घर कैसे चलेगा।
धाराशिव के खानापुर में मौत
दूसरा मामला धाराशिव जिले के खानापुर गांव का है। यहां 35 वर्षीय किसान दयानंद राठोड की मौत हो गई। परिवार के मुताबिक उनके पास करीब चार एकड़ जमीन थी। दयानंद ने इस साल सोयाबीन की खेती की थी। वे खेती के साथ गन्ना कटाई का काम भी करते थे। रिपोर्टों के अनुसार वे खेत में सोयाबीन की हालत देखने गए थे।
परिवार के मुताबिक फसल की हालत देखकर उन्हें लगा कि उपज कम होगी। सूखे से सोयाबीन को नुकसान हुआ था। आमदनी न होने और कर्ज की चिंता के बीच यह घटना हुई। दयानंद के परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं। परिजनों ने सरकार से तुरंत आर्थिक मदद देने की मांग की है। उन्होंने बच्चों के भविष्य के लिए भी सहायता मांगी है।
जिलाधिकारी दफ्तर पर प्रदर्शन
दयानंद की मौत के बाद परिजन शव लेकर धाराशिव जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। रिपोर्ट के मुताबिक परिवार और अन्य लोगों ने दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया। परिजनों ने आर्थिक सहायता की मांग रखी।
उन्होंने परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग भी की। यह मांग अभी सिर्फ परिवार की है। रिपोर्ट में प्रशासन की ओर से किसी जवाब का जिक्र नहीं है।
परिवारों के सवाल और मांग
परिवार का कहना है कि खेत में फसल नहीं हुई। कर्ज चुकाने का रास्ता भी नहीं बचा। ऐसे में घर चलाना मुश्किल हो गया था। परिवार का सवाल है कि फसल नुकसान पर सरकारी मदद मिलनी है। तो वह समय पर किसानों तक क्यों नहीं पहुंच रही। यह सवाल परिजनों की ओर से उठाया गया है।
सोयाबीन पर लागत का बोझ
किसानों के सामने सिर्फ फसल बचाने की चुनौती नहीं है। बीज, खाद और खेती पर लगा खर्च वापस निकालना भी मुश्किल हो रहा है। जिन किसानों ने कर्ज लिया है, उनकी चिंता और बढ़ गई है।
यानी सूखे का असर सिर्फ खेत तक सीमित नहीं रहता। यह परिवार की आमदनी और घर के खर्च तक पहुंचता है। इसलिए किसान सरकारी मदद का इंतजार कर रहे हैं।
बीड की खबरें भी चर्चा में
बीड से भी किसानों की मौत की खबरें आई हैं। आठ दिन में तीन मौतों का मामला सामने आया है। इन मामलों की अलग से पुष्टि और जांच की जरूरत है। इसीलिए अभी इन सभी घटनाओं को एक जैसा नहीं मान लेना चाहिए। हर मामले की वजह जांच के बाद ही साफ होगी। फिलहाल परिवारों के बयान ही सामने हैं।
जांच के बाद साफ होगी वजह
रिपोर्ट के मुताबिक मौत के कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। परिवारों ने फसल बर्बादी और कर्ज की चिंता को वजह बताया है। यह परिवारों का बयान है।
अब नजर प्रशासन और सरकार के रुख पर रहेगी। परिजनों की मांग पर क्या फैसला होता है, यह भी देखना होगा। मराठवाड़ा के किसान फसल नुकसान के आकलन और मदद का इंतजार कर रहे हैं।
मदद कहां मिल सकती है
अगर आप या आपका कोई परिचित तनाव में है, तो अकेले न रहें। अपनों से बात करें। टेली-मानस (Tele Mental Health Assistance and Networking Across States) पर भी बात करें। इसका हेल्पलाइन नंबर 14416 है।
