मध्यप्रदेश के उमरिया जिले के एक किसान ने खेती का तरीका बदला है। सूर्यपाल सिंह ने सरकारी योजनाओं की मदद से आम का बाग लगाया है। इसके साथ वे खेत में सब्जियां भी उगा रहे हैं। उनके मुताबिक उन्हें करीब 20 हजार रुपए तक की अतिरिक्त आय मिल रही है। यह कहानी उन किसानों के लिए खास है। जो पारंपरिक खेती से आगे सोच रहे हैं।
एक एकड़ में आम का बाग, उसी जमीन पर सब्जी
सूर्यपाल सिंह उमरिया जिले के करकेली विकासखंड के आमाडोंगरी गांव के किसान हैं। उन्होंने सरकारी योजनाओं का फायदा लेकर अपनी खेती को आगे बढ़ाया है।
उन्होंने करीब एक एकड़ जमीन पर आम का फलोद्यान विकसित किया है। फलोद्यान यानी फलों का बाग। इसी जमीन पर वे सब्जियों की खेती भी कर रहे हैं।
योजना से मिले आम के पौधे
सूर्यपाल ने बताया कि साल 2025 में उन्हें आम के पौधे मिले। ये पौधे उद्यानिकी विभाग ने उपलब्ध कराए थे। यह मदद राष्ट्रीय बागवानी मिशन (National Horticulture Mission) के तहत मिली। योजना का नाम एकीकृत बागवानी विकास योजना है।
इन पौधों को उन्होंने अपने खेत में लगाया। इस तरह करीब एक एकड़ में आम की बागवानी शुरू हुई। बागवानी का मतलब फल, सब्जी और फूल जैसी फसलों की खेती है।
पहले सीमित थी आमदनी
सूर्यपाल के मुताबिक पहले वे मुख्य रूप से पारंपरिक खेती पर निर्भर थे। इससे उनकी आमदनी सीमित रहती थी। उन्होंने खुद यह बात बताई है। उद्यानिकी विभाग का मार्गदर्शन और योजनाओं की मदद मिलने के बाद हालात बदले। उनका कहना है कि फलोद्यान बनने के बाद खेती का उत्साह बढ़ा है।
सब्जियों से अतिरिक्त कमाई
आम की बागवानी के साथ सूर्यपाल अलग-अलग सब्जियां उगाते हैं। इससे उन्हें खेती से अतिरिक्त आमदनी मिल रही है। उनके मुताबिक आय के स्रोत पहले से बढ़े हैं। उन्हें लगभग 20 हजार रुपए तक अतिरिक्त आय हो रही है। किसान की बात से साफ है कि सब्जी और बागवानी से खेती में अतिरिक्त सहारा मिला है।
सिंचाई से आसान हुई खेती
सूर्यपाल को सिंचाई योजना का भी लाभ मिला। यह प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana) है। इससे उनके खेत में सिंचाई की बेहतर व्यवस्था बनी है। खेत में पानी की उपलब्धता भी बढ़ी है।
उनके मुताबिक इससे फसलों की उत्पादकता में सुधार हुआ है। खेती पहले की तुलना में आसान हो गई है। यानी पानी की चिंता कुछ कम हुई है। पर्याप्त सिंचाई से आम की बागवानी और सब्जियों का उत्पादन बेहतर चल रहा है। दोनों काम एक साथ संभालना अब आसान हुआ है।
आगे बढ़ाएंगे बागवानी
सूर्यपाल अब बागवानी का क्षेत्र और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। यह योजना अभी उनके मन में है। रिपोर्ट में नए रकबे या नई फसलों का ब्योरा नहीं है। उन्होंने कहा कि इस आय से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
उन्होंने कहा कि योजनाओं से किसानों को नए तरीके अपनाने का मौका मिलता है। उनके मुताबिक मदद और विभाग के मार्गदर्शन से खेती ज्यादा फायदेमंद हुई है। वे आत्मनिर्भर बनने की बात भी करते हैं।
योजनाओं की क्या भूमिका रही
इस कहानी में सरकारी योजनाओं की भूमिका अहम दिखती है। एक योजना से पौधे मिले। दूसरी योजना से सिंचाई की बेहतर व्यवस्था बनी। विभाग का मार्गदर्शन भी साथ रहा।
यानी किसान ने अकेले नहीं, बल्कि मदद और मार्गदर्शन के साथ आगे कदम बढ़ाया। यह सब किसान के बताए अनुभव पर आधारित है। रिपोर्ट में विभाग का अलग बयान नहीं है।
दूसरे किसान क्या सीखें
इस कहानी से किसान एक बात समझ सकते हैं। एक फसल पर टिके रहने के बजाय दूसरे विकल्प भी देखे जा सकते हैं। बाग के साथ सब्जी का तरीका इसी सोच का उदाहरण है।
हालांकि हर खेत की मिट्टी, पानी और हालात अलग होते हैं। इसलिए कोई भी किसान अपने इलाके के उद्यानिकी विभाग से सलाह जरूर ले। योजनाओं की पात्रता और प्रक्रिया वहीं से पता चलेगी।
ये भी पढ़ें…
अक्टूबर में लगाएं मूली, पालक समेत ये रबी सब्जियां, इनकी खेती से बढ़ सकती है आपकी आमदनी
