सर्दी का मौसम आने वाला है। ऐसे में घर की छत, बालकनी या आंगन में सब्जी उगाना अच्छा रहेगा। बागवानी की सलाह है कि अक्टूबर और नवंबर में सर्दी की सब्जियां बोएं। इसके लिए कुछ जरूरी काम पहले से करने होंगे। यही काम तय करते हैं कि सर्दी में आपके पौधे कितने अच्छे से बढ़ेंगे।
सर्दी से पहले तैयारी क्यों
सर्दी में दिन छोटे हो जाते हैं। पौधों को कम धूप मिलती है। मिट्टी भी देर से सूखती है। इसलिए गर्मी वाली आदतें इस मौसम में काम नहीं करतीं। पहले से तैयारी करना समझदारी है। यह तैयारी पांच बड़े कामों में बंटी है। ये हैं मिट्टी, बीज, धूप, पानी और कीट से बचाव।
बड़े खेत या बगीचे की जरूरत नहीं है। फ्लैट में रहने वाले लोग भी बालकनी में गमले रख सकते हैं। भोपाल, रायपुर और जयपुर के घरों में भी यह तरीका अपनाया जा सकता है। आंगन वाले घरों में क्यारी बनाई जा सकती है।
पहला काम: मिट्टी तैयार करें
गमले या क्यारी में पौधा लगाने से पहले मिट्टी को ढीला करें। मिट्टी इतनी भुरभुरी होनी चाहिए कि जड़ें आसानी से फैल सकें। सख्त मिट्टी में जड़ों को बढ़ने में दिक्कत आती है।
अब इसमें सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिलाएं। ये दोनों खाद मिट्टी को पोषण देती हैं। पोषण मिलने से जड़ों को फैलने में मदद मिलती है।
गमलों में जल निकासी के छेद जरूर होने चाहिए। छेद न हों तो फालतू पानी भीतर रुक जाता है। रुका हुआ पानी जड़ों को सड़ा सकता है। इसलिए गमला खरीदते या तैयार करते समय यह बात जरूर देखें।
दूसरा काम: सर्दी के बीज बोएं
सर्दी के लिए पालक, मेथी, धनिया, मूली, गाजर और मटर सुझाए गए हैं। बीज बोते समय गहराई और दूरी का ध्यान रखें। बीजों के बीच सही दूरी रखें, ताकि पौधों को बढ़ने की जगह मिले।
धनिया और मेथी छोटे गमलों में भी अच्छी तरह उगते हैं। इसलिए छोटी बालकनी वाले लोग इन्हीं से शुरुआत कर सकते हैं।
गाजर और मूली का मामला थोड़ा अलग है। इन्हें गहरे गमले चाहिए। गहरे गमले न हों तो ऊंची क्यारी बनाई जा सकती है। जगह के हिसाब से फसल चुनना समझदारी है।
तीसरा काम: पौधों को धूप दें
सर्दी में दिन छोटे होते हैं। इसलिए पौधों को ऐसी जगह रखें, जहां पर्याप्त धूप आए। पालक, मेथी और धनिया को अच्छी रोशनी मिले तो वे बेहतर बढ़ते हैं।
ऐसी जगह से बचें, जहां दिन भर छाया रहती हो। बालकनी में गमले रखने से पहले धूप की दिशा देख लें। यह भी समझ लें कि दिन में धूप किस कोने तक पहुंचती है। उसी हिसाब से गमलों की जगह तय करें।
चौथा काम: पानी देने का तरीका
ठंड में मिट्टी देर से सूखती है। ज्यादा पानी देने से जड़ों को नुकसान हो सकता है। इसलिए रोज पानी डालने की आदत बदलनी होगी।
पानी देने से पहले मिट्टी की ऊपरी परत को छूकर देखें। परत सूखी लगे, तभी पानी दें। पानी देने का सबसे अच्छा समय सुबह है। मिट्टी को नम रखें, पर गमले में पानी जमा न होने दें।
सर्दी में पौधे धीरे बढ़ते हैं। इसलिए जल्दबाजी में ज्यादा पानी या ज्यादा खाद न डालें। धैर्य रखें और पौधों के बढ़ने का इंतजार करें।
पांचवां काम: खरपतवार और कीट
क्यारी और गमलों से बेकार घास समय-समय पर निकालते रहें। इससे पौधों को पूरी जगह और पोषण मिलता है।
पत्तियों के नीचे के हिस्से भी देखते रहें। वहां छोटे कीड़े या धब्बे हो सकते हैं। कोई दिक्कत दिखे तो पहले समस्या को पहचानें। फिर जरूरत के हिसाब से सुरक्षित तरीके से उसका इलाज करें।
पौधों के बीच हवा के लिए जगह रखें। इससे पत्तियां ज्यादा देर तक गीली नहीं रहतीं। समय-समय पर सफाई से पौधे साफ रहते हैं। उनकी हालत भी जल्दी दिख जाती है।
घर की सब्जी से क्या फायदा
इन पांच कामों को ठीक से करने पर ताजी सब्जियां उगाई जा सकती हैं। यह छत, बालकनी या आंगन में हो सकता है। इससे बाजार की सब्जियों पर होने वाला खर्च भी कम हो सकता है।
घर में उगी हरी सब्जियां सीधे रसोई में काम आती हैं। पालक, मेथी और धनिया रोज के खाने में आसानी से जुड़ जाते हैं। यह शौक घर के बच्चों और बड़ों को भी जोड़ सकता है। सब मिलकर पौधों की देखभाल कर सकते हैं।
शुरुआत करने वाले क्या करें
नए लोग छोटी शुरुआत करें। दो या तीन गमलों से काम शुरू किया जा सकता है। पहले धनिया या मेथी बोकर देखें। ये छोटे गमलों में भी उग जाते हैं।
अनुभव आने पर गाजर और मूली जैसी फसलें जोड़ें। हर हफ्ते पौधों को ध्यान से देखने की आदत डालें। मिट्टी की नमी, पत्तियों की हालत और धूप पर नजर रखें। छोटी दिक्कत शुरू में ही पकड़ में आ जाती है।
संक्षेप में पांच काम याद रखें। पहले मिट्टी तैयार करें और सही बीज बोएं। फिर पौधों को धूप दें। जरूरत के हिसाब से पानी दें। आखिर में कीटों से बचाव करें। अक्टूबर और नवंबर में तैयारी कर लें। इससे सर्दी की सब्जियां बोने का काम आसान हो जाता है।
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