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छत्तीसगढ़ में 40 नए गौधाम को मंजूरी, शेड-पानी-बिजली का इंतजाम, मंडी बोर्ड से होगा खर्च

newz@gmail.com | Oct 7, 2026, 16:12 IST

छत्तीसगढ़ में पशुधन विकास विभाग ने गौधाम योजना के तहत 40 नए गौधाम को मंजूरी दी है। गौवंश के लिए शेड, पानी, बिजली और फेंसिंग पहले तैयार होगी। खर्च मंडी बोर्ड की राशि से होगा।

गौधाम

छत्तीसगढ़ में गौवंश के लिए 40 नए गौधाम बनने जा रहे हैं। पशुधन विकास विभाग ने गौधाम योजना के तहत इन्हें मंजूरी दे दी है। मकसद गौवंश का संरक्षण, संवर्धन और बेहतर देखभाल है। विभाग ने साफ कहा है कि शेड, पानी और बिजली का इंतजाम पहले होगा।

40 नए गौधाम को मंजूरी

विभाग ने प्रदेश में 40 नए गौधाम स्थापित करने की स्वीकृति दी है। यह मंजूरी गौधाम योजना के तहत मिली है। इस पहल में गौवंश के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं तैयार की जाएंगी। साथ ही उनकी सुरक्षा और देखभाल की व्यवस्था भी पक्की की जाएगी। यानी सरकार का ध्यान सिर्फ गौधाम खोलने पर नहीं है। जोर इस पर भी है कि वहां पहुंचने वाले पशुओं को सही माहौल मिले।

किन जिलों में बनेंगे गौधाम

विभाग के आदेश में आठ जिलों के नाम हैं। इनमें सरगुजा, बिलासपुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और रायपुर शामिल हैं। दुर्ग, बेमेतरा, नारायणपुर और जशपुर जिले भी सूची में हैं। इन जिलों में नए गौधाम की स्थापना को स्वीकृति दी गई है। आदेश में सरगुजा के अंबिकापुर की विश्वनाथ गोविंद ग्राम पंचायत का नाम भी है। बाकी जिलों के साथ इसे भी मंजूरी सूची में रखा गया है।

खर्च कहां से आएगा

आदेश में छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को निर्देश दिए गए हैं। निर्देश है कि स्थापना का पूरा खर्च योजना के प्रावधानों के हिसाब से होगा। यह रकम राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड, रायपुर से ली जाएगी। मंडी बोर्ड मंडियों से जुड़ा सरकारी बोर्ड है। यहां से आने वाली राशि को गौधाम पर खर्च किया जाएगा।

पहले तैयार होंगी सुविधाएं

इस आदेश की सबसे अहम बात यह है कि इंतजाम पहले होंगे। विभाग का निर्देश है कि गौवंश को भेजने से पहले सब इंतजाम पूरे हों। इनमें पर्याप्त पशु शेड, पानी, बिजली और फेंसिंग शामिल हैं।

साथ ही सुरक्षा और देखभाल की सुविधाएं भी पक्की करनी होंगी। इससे नए गौधामों में पशुओं के लिए जरूरी व्यवस्थाएं पहले से तैयार रहेंगी। इसका फायदा सीधा है। पशु पहुंचें और शेड, पानी या बिजली न हो, तो परेशानी बढ़ती है। पहले इंतजाम होने से यह जोखिम कम हो सकता है।

गौधाम योजना क्या है

गौधाम योजना छत्तीसगढ़ सरकार की योजना है। इसका मकसद बेसहारा पशुओं को सुरक्षित ठिकाना देना है। इसके साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की बात भी कही गई थी।

एक गौधाम में करीब 200 पशु रह सकते हैं। यह क्षमता के हिसाब से तय होगा। इन्हें सरकारी जमीन पर बनाने की बात कही गई थी। वहां फेंसिंग, पशु शेड, पानी और बिजली होना जरूरी बताया गया था।

योजना में संचालन की जिम्मेदारी पंजीकृत गौशाला समितियों को देने की बात थी। अगर समिति मना करे तो दूसरे संगठन आवेदन कर सकते हैं। इनमें एनजीओ, ट्रस्ट, किसान उत्पादक कंपनियां और सहकारी समितियां शामिल बताई गई थीं।

योजना का अब तक का सफर

इस साल 14 मार्च को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने योजना शुरू की। यह शुरुआत बिलासपुर में हुई। प्रदेश में 1,460 गौधाम बनेंगे। एक अधिकारी के मुताबिक तब 36 गौधाम को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है।

अब 40 नए गौधाम की मंजूरी इसी सिलसिले की अगली कड़ी है। सीधा गणित देखें तो 1,460 के लक्ष्य में 40 की हिस्सेदारी करीब 2.7 प्रतिशत बैठती है। योजना को अभी लंबा सफर तय करना है। आगे और गौधाम को मंजूरी मिलने की उम्मीद की जा सकती है।

गौवंश की देखभाल पर जोर

आदेश में गौवंश की सुरक्षा और देखभाल को सबसे ऊपर रखा गया है। पशुओं को भेजने से पहले उनके रहने की पूरी तैयारी जरूरी की गई है। इससे साफ है कि विभाग इंतजाम में ढील नहीं चाहता।

गौधाम में पानी और बिजली रोजमर्रा की देखभाल से जुड़े हैं। फेंसिंग से पशुओं की सुरक्षा में मदद मिलती है। शेड मौसम की मार से बचाव का काम करता है।

अब आगे क्या देखना होगा

अब नजर इस पर है कि 40 गौधाम का काम कब शुरू होता है। गौ सेवा आयोग को खर्च का इंतजाम आदेश के मुताबिक करना है। जिलों में बुनियादी सुविधाएं समय पर पूरी होना भी जरूरी होगा।

स्थानीय प्रशासन और संचालन संभालने वाली संस्थाओं की भूमिका भी अहम रहेगी। अगर सुविधाएं पहले पूरी हुईं, तो पशुओं की शिफ्टिंग बिना दिक्कत हो सकेगी। इसी से योजना की असली कसौटी तय होगी।

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