घटना रविवार चार अक्टूबर की है। पुलिस के मुताबिक विलास कुर्हाड़े सुबह खेत जाने को कहकर निकले थे। इसके बाद उनका शव खेत में मिला। आसपास के लोगों ने इसकी जानकारी उनके परिवार को दी।
परिवार को खबर मिलने के बाद पुलिस को भी सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। मामले में रेनापुर पुलिस स्टेशन में आकस्मिक मौत की रिपोर्ट दर्ज की गई है।
परिवार पर टूटा दुख का पहाड़
परिवार ने पुलिस को बताया कि रविवार को ही विलास कुर्हाड़े का जन्मदिन था। उन्होंने अपना 44वां जन्मदिन पूरा किया था। घर में उनके जन्मदिन की खुशी मनाने की तैयारी चल रही थी। उसी दिन आई इस खबर से परिवार में मातम छा गया।
पुलिस की जांच जारी
पुलिस का कहना है कि इसकी वजह अभी साफ नहीं है। पुलिस परिवार के लोगों से भी जानकारी जुटा रही है। अब तक ऐसा कोई कारण सामने नहीं आया है। यानी वजह पक्के तौर पर नहीं कही जा सकती।
पुलिस के मुताबिक जांच पूरी होने के बाद ही सही कारण पता चलेगा। इसलिए किसी एक वजह को अभी तय नहीं माना जा सकता। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
लातूर में कम बारिश का असर
लातूर जिले में इस साल मानसून के दौरान कम बारिश हुई है। इसी वजह से राज्य सरकार ने जिले के कुछ इलाके सूखाग्रस्त घोषित किए हैं। बारिश की कमी का सीधा असर खेती पर पड़ा है।
पानी की कमी से किसानों को फसल बचाने में परेशानी हो रही है। लातूर के किसान पहले भी फसल खराब होने और आर्थिक परेशानी झेलते रहे हैं। कम बारिश ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। हालांकि इस मौत का सूखे से संबंध जांच का विषय है। इसलिए इस मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
पहले भी आया था मामला
रिपोर्ट के मुताबिक लातूर में पहले भी ऐसा एक मामला आया था। उनके परिवार का कहना था कि उन्होंने इस साल सोयाबीन की फसल लगाई थी। परिवार के अनुसार सूखे जैसे हालात में खड़ी फसल खराब हो गई थी।
परिवार ने बताया कि फसल के नुकसान और कर्ज को लेकर वह परेशान थे। यह परिवार का दावा है। पुलिस जांच में सभी पहलुओं को देखा जा रहा है।
सूखे पर सरकार के कदम
महाराष्ट्र सरकार सूखे की स्थिति को लेकर कई कदम उठा रही है। राज्य के 265 तालुका पहले ही सूखा प्रभावित घोषित किए जा चुके हैं। अब जनप्रतिनिधियों की मांग पर 19 और तालुकाओं में सर्वे का फैसला हुआ है।
इन इलाकों में पांच प्रमुख फसलों का 20 प्रतिशत सर्वे किया जाएगा। अधिकारी खेतों में जाकर फसल के नुकसान की जानकारी जुटाएंगे। सरकार ने रिपोर्ट जल्द सौंपने के निर्देश दिए हैं।
कैबिनेट की सूखा उप-समिति की बैठक हुई। इसमें चारे और पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था को कहा गया। पानी की कमी वाले गांवों में छोटे टैंकर भेजने के निर्देश भी हैं।
कर्ज वसूली पर भी निर्देश जारी
सूखा प्रभावित इलाकों में कर्ज को लेकर भी सरकार ने निर्देश दिए हैं। सहकारिता विभाग को निर्देश मिला है। निजी और जिला केंद्रीय सहकारी बैंक जबरन वसूली न करें। सूखा प्रभावित लोगों पर लोन वसूली का दबाव न डालने पर जोर है।
राष्ट्रीयकृत बैंकों को भी सूखे के सरकारी नियम मानने को कहा गया है। अधिकारियों को सूखा प्रभावित इलाकों में मुख्यालय न छोड़ने का निर्देश भी मिला है।
मुश्किल में किससे बात करें
आर्थिक तनाव किसी को भी भीतर से परेशान कर सकता है। ऐसे वक्त में अकेले चिंता ढोना ठीक नहीं है। किसी भरोसेमंद दोस्त, परिवार के सदस्य या पड़ोसी से खुलकर बात करें। अगर आसपास किसी को परेशान देखें, तो उसे अकेला न छोड़ें। उससे बात करें और मदद दिलाने में साथ दें।
अगर कोई खुद को बहुत परेशान महसूस करता है, तो तुरंत मदद लें। सरकार की मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन टेली-मानस का नंबर 14416 है। इमरजेंसी में नजदीकी अस्पताल या पुलिस की मदद लेना जरूरी है।
अब आगे क्या
अब सबकी नजर पुलिस जांच पर है। इस घटना ने इलाके के किसानों की परेशानियों की ओर फिर ध्यान खींचा है। जांच पूरी होने के बाद ही वजह साफ होगी। तब तक किसी अफवाह या अनुमान को सच मानना सही नहीं है। सूखे से जूझ रहे किसानों को सर्वे और राहत की जानकारी का इंतजार है। किसान तालुका के कृषि अधिकारी से राहत की जानकारी ले सकते हैं।
