भोपाल. मध्यप्रदेश में किसानों के लिए सहकारी ऋण व्यवस्था आसान होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बलराम कृषि महोत्सव के तहत नीमच के किसानों से यह बात कही। कार्यक्रम नीमच की कृषि उपज मंडी, चंगेरा में आयोजित हुआ। मुख्यमंत्री ने खंडवा जिले से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भाग लिया। उन्होंने किसानों की खेती से जुड़ी जरूरतों पर चर्चा की। सरकारी योजनाओं और कृषि नवाचार पर भी बातचीत हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की जरूरतों पर योजनाएं बदली जा रही हैं। सहकारी क्षेत्र की ऋण व्यवस्था को सरल बनाने के प्रयास होंगे। इसका उद्देश्य किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध कराना है। रबी और खरीफ सीजन में ऋण की जरूरत बढ़ जाती है। ऋण जमा करने की प्रक्रिया को भी आसान बनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) के प्रशासक महेंद्र सिंह यादव मौजूद रहे। उन्होंने भी किसान कल्याण से जुड़े प्रयासों की जानकारी दी। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी शामिल हुए।
किसानों को समय पर मिलेगा ऋण
सहकारी ऋण व्यवस्था किसानों के लिए खेती का अहम सहारा है। खरीफ और रबी सीजन में किसानों को पूंजी की जरूरत होती है। बीज, खाद और अन्य खेती खर्चों के लिए ऋण जरूरी होता है। समय पर ऋण मिलने से किसान बुवाई समय पर कर पाते हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार व्यवस्था को किसान हितैषी बनाया जा रहा है। सरकार ऋण लेने में आने वाली कठिनाइयां कम करना चाहती है। ऋण जमा करने की तय अवधि से जुड़ी परेशानी भी देखी जाएगी। सहकारी संस्थाओं से मिलने वाली सुविधाएं समय पर देने पर जोर है।
सहकारी समितियों में किसानों की जमा राशि भी महत्वपूर्ण है। सरकार इसे समय पर खातों में पहुंचाने पर जोर दे रही है। समितियों में किसी अनियमितता को रोकने के प्रयास होंगे। इससे किसानों के भरोसे को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
नीमच की खेती की खासियत
मुख्यमंत्री ने नीमच की कृषि क्षमता की भी चर्चा की। उन्होंने जिले को उन्नत खेती के लिए महत्वपूर्ण बताया। नीमच में कई औषधीय फसलों की खेती होती है। इनमें अश्वगंधा, इसबगोल और तुलसी प्रमुख हैं। शतावरी, चिरायता, आंवला और बहेड़ा भी उगाए जाते हैं। नीम की खेती और उसका व्यापार भी क्षेत्र में होता है।
नीमच में चिया सीड का उत्पादन भी होता है। लहसुन, मेथी और धनिया भी प्रमुख कृषि उत्पाद हैं। इन फसलों का व्यापार जिले की अर्थव्यवस्था में योगदान देता है। मुख्यमंत्री ने किसानों को अर्थव्यवस्था की आधारशिला बताया।
नीमच मंडी में बढ़ी आवक
मुख्यमंत्री ने नीमच कृषि उपज मंडी के आंकड़े भी बताए। उन्होंने मंडी को ए-ग्रेड मंडी बताया। मंडी औषधीय फसलों के व्यापार का प्रमुख केंद्र है। यहां कृषि उपज की आवक लगातार बढ़ी है।
वर्ष 2023-24 में मंडी में 53.46 लाख क्विंटल आवक हुई। वर्ष 2025-26 में यह आवक करीब 72 लाख क्विंटल हुई। इसी अवधि में मंडी की आय भी बढ़ी। वर्ष 2025-26 में मंडी की आय करीब 34.5 करोड़ रुपए हुई।
आवक में यह बढ़ोतरी कृषि व्यापार के लिए अहम है। इससे जिले में कृषि कारोबार की सक्रियता दिखती है। किसानों की उपज को बेहतर बाजार मिलने का महत्व भी बढ़ता है। मंडी गतिविधियों का असर स्थानीय कारोबार पर भी पड़ता है।
प्राकृतिक खेती पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात कही। नीमच में 10 हजार एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में खेती हो रही है। इसमें प्राकृतिक और जैविक खेती शामिल है।
प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है। इससे गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादों को बढ़ावा मिल सकता है। मुख्यमंत्री ने आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने की अपील की। उन्होंने फसल विविधीकरण पर भी किसानों का ध्यान खींचा।
किसानों से अतिरिक्त आय वाले काम बढ़ाने को भी कहा गया। खेती के साथ दूसरी गतिविधियां आय के नए रास्ते खोल सकती हैं। इसमें पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन शामिल हैं।
सिंचाई से बढ़ेगा खेती का रकबा
नीमच जिले में सिंचाई परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई। रामपुरा-मनासा सूक्ष्म वृहद सिंचाई परियोजना का उल्लेख किया गया। इस परियोजना से 212 गांवों को सिंचाई लाभ मिलने की बात कही गई। इससे 67 हजार हेक्टेयर से ज्यादा भूमि सिंचित होगी।
जावद-नीमच सिंचाई योजना का भी उल्लेख हुआ। खुमान सिंह शिवाजी सिंचाई योजना की जानकारी भी दी गई। इन योजनाओं से एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा भूमि लाभान्वित होगी। सरकार के अनुसार इससे कृषि का रकबा बढ़ सकता है।
सिंचाई सुविधाएं बढ़ने से किसानों को कई फायदे हो सकते हैं। खेती का क्षेत्र बढ़ सकता है और फसल विकल्प बढ़ सकते हैं। पानी की उपलब्धता से उत्पादन योजना बनाना आसान हो सकता है। हालांकि वास्तविक लाभ परियोजनाओं के पूरा होने पर निर्भर करेगा।
खेती के साथ पशुपालन पर जोर
मुख्यमंत्री ने किसानों की आय बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने खेती के साथ पशुपालन बढ़ाने की बात कही। दुग्ध उत्पादन को भी आय का माध्यम बताया गया। मत्स्य पालन को भी बढ़ावा देने की बात कही गई।
गांधी सागर जलाशय का भी इस संदर्भ में उल्लेख हुआ। मत्स्य पालन से जुड़े परिवारों को आर्थिक मजबूती देने पर जोर है। इसके लिए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत बताई गई।
यह मॉडल किसानों की आय के कई स्रोत बना सकता है। एक ही फसल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। मौसम या बाजार जोखिम के समय इसका फायदा हो सकता है। हालांकि हर किसान के लिए मॉडल एक जैसा नहीं होगा।
चीता परियोजना से रोजगार की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने गांधी सागर अभयारण्य की भी चर्चा की। उन्होंने चीता परियोजना से पर्यटन बढ़ने की संभावना बताई। पर्यटन बढ़ने से स्थानीय रोजगार के अवसर बन सकते हैं। स्वरोजगार के नए रास्ते भी खुल सकते हैं। सरकार नीमच को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाना चाहती है। इसका असर स्थानीय कारोबार और सेवाओं पर भी पड़ सकता है।
किसानों और छात्रों का सम्मान
बलराम कृषि महोत्सव में प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। श्याम कारपेंटर को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। हरीश पाटीदार को भी सम्मानित किया गया। किशोर कुमार पाटीदार और अनिल धाकड़ को भी सम्मान मिला।
कार्यक्रम में 11 मेधावी छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया गया। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खेती की तकनीक बताई। विभागीय अधिकारियों ने भी योजनाओं की जानकारी दी। आयोजन स्थल पर कृषि तकनीक की प्रदर्शनी भी लगाई गई।
किसानों के लिए क्या बदलेगा
सहकारी ऋण व्यवस्था को सरल बनाने की घोषणा अहम है। इसका सीधा असर खेती के वित्तीय प्रबंधन पर पड़ सकता है। समय पर ऋण मिलने से बुवाई की तैयारी आसान हो सकती है। जमा राशि समय पर मिलने से किसानों को राहत मिल सकती है।
कार्यक्रम में कलेक्टर हिमांशु चंद्रा, अपर कलेक्टर बीएस कलेश सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। जावद विधायक ओमप्रकाश सकलेचा ने भी संबोधित किया। नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। मनासा विधायक अनिरुद्ध माधव मारू ने भी बात रखी।
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