किसान की बात,सूत्र के साथ

एमपी में मूंगफली का भाव 11,000 रु., फिर भी किसान की उपज 75% घटी, लागत निकालना मुश्किल

newz@gmail.com | Oct 13, 2026, 17:37 IST

मध्य प्रदेश में मूंगफली का भाव करीब 11,000 रुपए प्रति क्विंटल है, फिर भी किसान परेशान हैं। कम बारिश से पांढुर्णा जिले में उपज 75 फीसदी तक घट गई है। किसान लागत निकालने में भी मुश्किल झेल रहे हैं।

मूंगफली

मध्य प्रदेश की मंडियों में मूंगफली के भाव इस बार चढ़े हुए हैं। भाव करीब 11,000 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। इसके बावजूद किसानों के चेहरे पर राहत नहीं दिख रही। वजह साफ है। इस साल बारिश कम हुई और उपज बुरी तरह घट गई। पांढुर्णा जिले में कई किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं।

भाव बढ़ा, पर माल नहीं बचा

ऊंचा भाव तभी फायदा देता है, जब खेत में उपज हो। इस बार यही कमी सबसे बड़ी परेशानी है। मंडी में भाव अच्छा है, लेकिन बेचने के लिए माल बहुत कम है।

पांढुर्णा जिले में कम बारिश का असर सीधे फसल पर पड़ा। मूंगफली के दाने ठीक से विकसित नहीं हो पाए। दाना कमजोर रहा तो पैदावार भी गिर गई। उपज में 75 फीसदी तक की गिरावट आई है। यानी जितनी फसल की उम्मीद थी, उसका एक चौथाई ही हाथ आया।

कम बारिश ने कैसे बिगाड़ा खेल

मूंगफली की फसल को बढ़वार के दौरान पानी की जरूरत पड़ती है। इस साल मानसून की बारिश कम रही। इसी वजह से फसल की बढ़वार प्रभावित हुई।

कम बारिश का असर सिर्फ पौधों पर नहीं पड़ा। दाने भी भरे नहीं। मूंगफली में दाना ही असली कमाई है। दाना कमजोर रहे तो खेत भरा दिखने पर भी उपज कम निकलती है। पांढुर्णा जिले के किसान इसी मार को झेल रहे हैं। उनके लिए मंडी का ऊंचा भाव राहत से ज्यादा चुभन बन गया है।

भाऊराव करदाते की कहानी

मरकावाड़ा गांव के भाऊराव करदाते ने एक एकड़ में मूंगफली बोई थी। सामान्य मौसम में उन्हें लगभग सात क्विंटल उपज की उम्मीद थी, लेकिन नतीजा उलटा निकला। उनका उत्पादन उम्मीद का सिर्फ 25 फीसदी रह गया। यानी जहां सात क्विंटल की आस थी, वहां बहुत कम फसल मिली। 25 फीसदी के हिसाब से उपज करीब पौने दो क्विंटल बैठती है।

भाव और उपज का गणित

अब इसे भाव के हिसाब से समझिए। 7 क्विंटल होते तो 11,000 रुपए के भाव से करीब 77,000 रुपए मिलते। यह भी सिर्फ एक अनुमान है। हालांकि उपज करीब पौने दो क्विंटल ही रही। इस हिसाब से बिक्री की रकम करीब 19,000 रुपए के आसपास बनती है। यानी कमाई चौथाई ही रह गई।

पैदावार कम, खर्च निकालना मुश्किल

किसान श्रीराम हिंगवे ने खेती के खर्च की बात रखी। उनके मुताबिक किसानों का काफी पैसा बीज पर लगता है। खाद पर भी बड़ा खर्च होता है। दवाइयों में भी अच्छा पैसा जाता है। खेत की तैयारी का खर्च अलग होता है। हिंगवे के मुताबिक कम पैदावार से यह खर्च वसूलना कठिन हो गया है। यानी किसान ने पैसा लगाया, पर फसल उसके मुताबिक नहीं लौटी।

लागत निकालना क्यों मुश्किल

खेती में लागत पहले लग जाती है। कमाई बाद में आती है। अगर फसल अच्छी हो, तो खर्च निकल जाता है। फसल कमजोर हो तो घाटा सीधे किसान की जेब पर पड़ता है।

मूंगफली में बीज, खाद, दवा और खेत की तैयारी पर खर्च होता है। यह रकम उपज चाहे जितनी भी हो, एक जैसी ही लगती है। उपज घटने से प्रति क्विंटल लागत बढ़ जाती है। इसी वजह से ऊंचा भाव भी राहत नहीं दे पा रहा। बेचने को माल ही कम है।

ऊंचे भाव का फायदा किसे

मंडी में भाव 11,000 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास है। यह अपने आप में अच्छा भाव माना जा सकता है, लेकिन इसका फायदा उसी को मिलता है, जिसके पास माल हो।

जिनकी उपज बहुत घटी, उन्हें इस भाव का पूरा लाभ नहीं मिल रहा। उनके पास बेचने को कम माल है। इसलिए कुल कमाई भी कम है। यानी भाव और कमाई एक चीज नहीं हैं। कमाई भाव और उपज, दोनों पर निर्भर करती है।

किसानों के सामने आगे की चिंता

किसानों की चिंता सिर्फ इस सीजन तक सीमित नहीं है। इसका असर अगली फसल की तैयारी पर भी पड़ सकता है। बीज, खाद और दवा के लिए फिर पैसा चाहिए होगा।

मौसम की अनिश्चितता भी बड़ी चिंता है। कम बारिश जैसी स्थिति में फसल पर बड़ा असर पड़ता है। किसान अपनी मेहनत और पूंजी दोनों जोखिम में डालते हैं।

किसानों को क्या करना चाहिए

फसल को नुकसान हुआ हो, तो किसान कृषि विभाग को जानकारी दें। वहां से सही प्रक्रिया की जानकारी मिल सकती है। नुकसान का रिकॉर्ड रखना भी जरूरी है। अगर फसल बीमा कराया हो, तो उसकी शर्तें देखें। बीमा कंपनी या विभाग से संपर्क करें। समय पर सूचना देना बहुत जरूरी होता है।

फिलहाल मंडी में भाव ऊंचा है, पर खेत में उपज कम है। पांढुर्णा के किसान इसी उलझन में हैं। अब देखना है कि इन्हें किसी तरह की राहत मिलती है या नहीं।

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