राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत 2047 के लक्ष्य से पहले आत्मनिर्भर बन सकता है। इसके लिए महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी अहम है। राष्ट्रपति गुरुवार 15 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में राष्ट्रीय सरस मेला 2026 को संबोधित कर रही थीं। यह कार्यक्रम पुन्नमी घाट पर आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाएं अब केवल अपने परिवार की आजीविका तक सीमित नहीं हैं। वे दूसरे लोगों को भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही हैं।
राष्ट्रपति के मुताबिक, स्वयं सहायता समूह महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर दे रहे हैं। इन समूहों के जरिए महिलाएं कारोबार शुरू कर रही हैं। वे अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर बना सकती हैं। उन्होंने महिलाओं से अपने कारोबार का विस्तार करने की अपील की। साथ ही, अधिक आय अर्जित करने के लिए नए अवसर तलाशने को कहा। उनका संदेश था कि ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक मजबूती देश की प्रगति को गति दे सकती है।
पहली बार दक्षिण भारत में मेला
राष्ट्रीय सरस मेला पहले आम तौर पर दिल्ली में आयोजित होता रहा है। इस बार इसका आयोजन पहली बार दक्षिण भारत के किसी राज्य में हुआ है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और आंध्र प्रदेश सरकार ने मिलकर यह आयोजन किया है। मेले का उद्देश्य ग्रामीण कारीगरों और महिला स्वयं सहायता समूहों को बाजार उपलब्ध कराना है। यहां महिलाएं अपने उत्पाद प्रदर्शित कर सकती हैं। वे सीधे ग्राहकों तक पहुंचकर बिक्री के अवसर भी बढ़ा सकती हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू ने सुझाव दिया कि यह मेला हर साल अलग-अलग राज्यों में आयोजित होना चाहिए। इससे महिला उद्यमियों को नए बाजारों तक पहुंचने का मौका मिलेगा। उनके उत्पादों की पहचान भी अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिलाएं स्थानीय संसाधनों से उत्पाद तैयार करती हैं। लेकिन उन्हें ग्राहकों और बाजार तक पहुंचने में मुश्किल होती है। ऐसे आयोजन उनके उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने में मदद कर सकते हैं।
‘करोड़पति दीदी’ बनाने का लक्ष्य
राष्ट्रपति ने कहा कि महिला सशक्तीकरण का लक्ष्य केवल ‘लखपति दीदी’ तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अब महिलाओं को ‘करोड़पति दीदी’ बनाने की दिशा में भी प्रयास जरूरी हैं। इसके लिए उन्हें कारोबार बढ़ाने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने बताया कि कुछ महिलाएं अपने कारोबार से हर महीने दो लाख रुपए से अधिक कमा रही हैं। यह ग्रामीण महिला उद्यमिता की संभावनाओं को दिखाता है। हालांकि, यह आंकड़ा सभी महिला उद्यमियों की कमाई नहीं दर्शाता।
महिलाओं की आमदनी बढ़ाने के लिए केवल कारोबार शुरू करना पर्याप्त नहीं है। उन्हें बेहतर बाजार, वित्तीय मदद और कारोबार चलाने की जानकारी भी चाहिए। उत्पादों की गुणवत्ता और उनकी सही कीमत भी महत्वपूर्ण हैं। राष्ट्रपति ने ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिला नेतृत्व वाले संगठनों को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों को अधिक संसाधन देने की जरूरत बताई। इससे महिलाओं की वित्तीय स्थिति और जागरूकता बेहतर हो सकती है।
बिचौलियों पर निर्भरता घटाने पर जोर
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलना चाहिए। इसके लिए बिक्री प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका कम करना जरूरी है। उन्होंने महिला किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने पर भी जोर दिया।
कई बार उत्पाद बनाने वाली महिलाओं को अंतिम बिक्री मूल्य का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। बाजार तक सीधी पहुंच मिलने से उन्हें बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ सकती है। इससे उनकी आमदनी और कारोबार दोनों को फायदा हो सकता है।
राष्ट्रपति ने डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल के प्रति जागरूकता बढ़ाने की भी बात कही। डिजिटल प्लेटफॉर्म से महिलाएं अपने उत्पादों की जानकारी अधिक ग्राहकों तक पहुंचा सकती हैं। वे दूसरे शहरों और राज्यों के बाजारों तक भी पहुंच सकती हैं।
हालांकि, ऑनलाइन कारोबार के लिए डिजिटल जानकारी के साथ भरोसेमंद भुगतान व्यवस्था जरूरी है। पैकेजिंग, उत्पाद की गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी भी महत्वपूर्ण हैं। महिलाओं को इन पहलुओं पर प्रशिक्षण मिले तो कारोबार बढ़ाना आसान हो सकता है।
650 स्टॉल पर उत्पादों की प्रदर्शनी
राष्ट्रीय सरस मेला 15 से 31 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है। आयोजन में करीब 650 स्टॉल लगाए गए हैं। यहां ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों से जुड़े उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं।
यह मेला महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों की बिक्री का अवसर देता है। साथ ही, ग्राहक अलग-अलग क्षेत्रों के उत्पादों को एक जगह देख सकते हैं। इससे स्थानीय उत्पादों को पहचान और नए खरीदार मिलने की संभावना बढ़ती है।
आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने सरस मेले को महिला समूहों की क्षमता और रचनात्मकता दिखाने वाला मंच बताया। उनके अनुसार, स्वयं सहायता समूह आर्थिक और सामाजिक बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
राज्यपाल ने समूहों को ऋण, कौशल विकास और बाजार से जोड़ने की जरूरत बताई। उन्होंने वित्तीय सहायता और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता प्रमाणन से उत्पादों की पहचान मजबूत हो सकती है। उन्होंने भरोसेमंद बाजार संपर्क को भी जरूरी बताया। इन सुविधाओं से महिला उद्यमियों को अपने कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इससे ग्रामीण उत्पादों को नए ग्राहकों तक पहुंचाने का रास्ता खुल सकता है।
आंध्र प्रदेश में 11 लाख समूह
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मेले को महिला शक्ति और उद्यमिता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि दशहरा उत्सव के दौरान इसके आयोजन से विजयवाड़ा की रौनक बढ़ी है। उन्होंने राष्ट्रपति के उद्घाटन को महिला शक्ति का प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने और उनके उत्पादों को पहचान दिलाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की प्रगति से परिवार और समाज को भी लाभ मिलता है। उनके अनुसार, महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करना सरकार के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
नायडू ने बताया कि आंध्र प्रदेश में 11 लाख स्वयं सहायता समूह हैं। उनके अनुसार, इन समूहों का कुल कारोबार 69,000 करोड़ रुपए है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में एक साल के दौरान एक लाख महिलाओं को उद्यमी बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने पांच लाख महिलाओं को कारोबारी बनाने का लक्ष्य बताया। साथ ही, 10 लाख महिलाओं को उद्यमी बनाने की योजना का जिक्र किया। ये लक्ष्य महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की राज्य सरकार की कोशिशों को दिखाते हैं।
‘स्वयं एपी’ ब्रांड से बिक्री
मुख्यमंत्री ने बताया कि महिला उद्यमियों के उत्पादों के लिए ‘स्वयं एपी’ ब्रांड शुरू किया गया है। इन उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की योजना भी है। इससे महिलाओं के उत्पादों को ऑनलाइन ग्राहकों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
ऑनलाइन बिक्री से बाजार का दायरा बढ़ सकता है। लेकिन इसके लिए उत्पादों की गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग और समय पर आपूर्ति जरूरी होगी। ग्राहकों की शिकायतों का समाधान और भरोसेमंद भुगतान व्यवस्था भी अहम है।
नायडू ने ‘स्त्री शक्ति’ मुफ्त बस यात्रा योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत महिलाएं 100 करोड़ यात्राएं कर चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी से ‘स्वर्ण आंध्र 2047’ का लक्ष्य हासिल करने की प्रतिबद्धता जताई।
‘शीमार्ट्स’ से बाजार देने की पहल
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू समूहों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं।
चौहान ने आंध्र प्रदेश में 11 लाख स्वयं सहायता समूहों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तकनीक के जरिए ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने समूहों के उत्पादों की मार्केटिंग के लिए ‘शीमार्ट्स’ के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराने की बात कही।
उनके अनुसार, विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महिला समूहों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। ग्रामीण महिलाओं को बाजार और तकनीक से जोड़ना इस दिशा में उपयोगी कदम हो सकता है।
राष्ट्रीय सरस मेले का मुख्य संदेश यही है कि महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता नहीं चाहिए। उन्हें अपने उत्पाद बेचने, कारोबार बढ़ाने और बेहतर आमदनी पाने के अवसर भी चाहिए। मजबूत स्वयं सहायता समूह, डिजिटल बाजार और बेहतर प्रशिक्षण इस लक्ष्य में मदद कर सकते हैं।
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