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मिलिए एमपी की जानकी बाई से… बलराम तालाब योजना और उन्नत खेती से आमदनी चार से पांच लाख तक पहुंच गई

Pawan Modiya | Oct 17, 2026, 15:15 IST

रायसेन के बेगवाकला गांव की जानकी बाई ने उन्नत खेती, बलराम तालाब योजना से मछली पालन और पशुपालन अपनाया। उनके मुताबिक सालाना आमदनी एक लाख रुपए से बढ़कर चार से पांच लाख रुपए हो गई है।

जानकी बाई

ग्रामीण इलाकों में सरकारी योजनाएं अब खेती का तरीका बदल रही हैं। रायसेन जिले की जानकी बाई इसकी एक मिसाल हैं। उन्होंने उन्नत खेती, मछली पालन और पशुपालन को साथ जोड़ा। उनके मुताबिक सालाना आमदनी अब चार से पांच लाख रुपए तक पहुंच गई है।

कौन हैं जानकी बाई

जानकी बाई रायसेन जिले के सिलवानी विकासखंड में रहती हैं। उनका गांव बेगवाकला है। परिवार के पास तीन एकड़ खेती की जमीन है। वे अपने पति के साथ मिलकर खेती का काम संभालती हैं।

उनका बेटा भी खेती में दिलचस्पी रखता है। ग्रामीण इलाकों में ऐसी योजनाएं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भूमिका निभा रही हैं। कई महिलाएं खेती के साथ पशुपालन और बागवानी भी अपना रही हैं। इससे परिवार की आर्थिक हालत मजबूत हो रही है।

तीन एकड़ खेती से शुरुआत

जानकी बाई ने बताया कि परिवार पहले पारंपरिक तरीके से खेती करता था। इस खेती से घर चलाना मुश्किल था। उनके मुताबिक वर्ष 2020 से पहले साल में बमुश्किल एक लाख रुपए मिलते थे। यह रकम महीने में औसतन आठ हजार रुपए से थोड़ी ज्यादा बैठती है। इतनी आमदनी में पूरे परिवार का खर्च चलाना आसान नहीं था।

शिविर से मिली नई राह

गांव में एक शिविर लगा था। वहां जानकी बाई को किसानों के लिए चल रही योजनाओं की जानकारी मिली। इसके बाद वे कृषि विभाग के विकासखंड कार्यालय पहुंचीं।

वहां उनकी मुलाकात बीटीएम (Block Technology Manager) रघुवीर सिंह कुशवाह से हुई। वे आत्मा परियोजना (Agricultural Technology Management Agency) से जुड़े हैं। उन्होंने जानकी बाई को उन्नत खेती के तरीके बताए। साथ ही योजनाओं की जानकारी भी दी।

प्रशिक्षण से बदली खेती

इसके बाद जानकी बाई और उनके पति ने प्रशिक्षण लिया। यह प्रशिक्षण कृषि विज्ञान केंद्र नकतरा और बनखेड़ी में हुआ। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने सब्जी की खेती शुरू की। उनके मुताबिक इससे उन्हें अच्छी आमदनी होने लगी। उनका कहना है कि पारंपरिक तरीके से हटकर उन्नत खेती बहुत फायदेमंद है।

बेटे ने भी सीखे नए तरीके

परिवार में सिर्फ माता-पिता ने ही नहीं सीखा। जानकी बाई के बेटे ने भी सरकार की योजना के तहत प्रशिक्षण लिया। उसने करनाल में उन्नत खेती का प्रशिक्षण पाया। इसके अलावा बेटे ने झांसी में मछली पालन और डेयरी पालन सीखा। आज परिवार के पास तालाब भी है और दुधारू पशु भी।

बलराम तालाब योजना का फायदा

जानकी बाई ने बलराम तालाब योजना के तहत वर्ष 2023 में तालाब बनवाया। यह तालाब एक एकड़ में बना है। तालाब बनने के बाद उन्होंने मछली पालन का काम शुरू किया। उनके मुताबिक मछली पालन से हर साल करीब डेढ़ लाख रुपए आय होती है। यह रकम 2020 से पहले की पूरे साल की कमाई से ज्यादा है।

तालाब के पानी से खेती के साथ अतिरिक्त कमाई का रास्ता खुलता है। खेती में अकेले मौसम पर निर्भर रहने का जोखिम भी कुछ कम होता है। यह एक सामान्य बात है और इसे खबर के तथ्यों से अलग समझें।

पशुपालन और नेट हाउस

जानकी बाई पशुपालन भी करती हैं। उनके पास अभी नौ दुधारू पशु हैं। पशुपालन भी परिवार की कमाई का एक साधन है। परिवार ने नेट हाउस भी बनाया है। नेट हाउस ढका हुआ ढांचा होता है। इसमें सब्जी जैसी फसलें सुरक्षित तरीके से उगाई जाती हैं। जानकी बाई इसमें सब्जी की खेती कर रही हैं।

खेत में फलदार पेड़ भी

इसके अलावा उन्होंने अपने खेत में आम, कटहल और सीताफल के पेड़ लगाए हैं। जानकी बाई के मुताबिक इनसे भी अच्छी आमदनी हो जाती है। इस तरह उनकी कमाई किसी एक फसल पर टिकी नहीं है। सब्जी, मछली, पशुपालन और फल, सबसे आमदनी के रास्ते खुले हैं।

आमदनी में कितना फर्क आया

जानकी बाई के मुताबिक 2020 से पहले खेती से बमुश्किल एक लाख रुपए मिलते थे। अब साल में लगभग चार से पांच लाख रुपए की आय होती है। यानी आमदनी में चार से पांच गुना तक का उछाल आया है। उनका कहना है कि इससे परिवार की आर्थिक उन्नति हुई है। जीवन स्तर में भी सुधार आया है।

अधिकारियों ने देखा खेत

जानकी बाई ने बताया कि जिला कृषि अधिकारी ने उनके खेत का दौरा किया। आत्मा परियोजना के संचालक भी खेत देखने पहुंचे। उन्होंने खेत का भ्रमण किया। उन्होंने इसके लिए सरकार और कृषि विभाग के अधिकारियों का धन्यवाद किया। उनके मुताबिक योजनाओं की जानकारी और प्रशिक्षण से बदलाव आया।

दूसरे किसानों के लिए सबक

इस कहानी से एक बात साफ होती है। सही जानकारी और प्रशिक्षण मिले, तो छोटी जोत भी अच्छी कमाई दे सकती है। जानकी बाई के पास सिर्फ तीन एकड़ जमीन है। किसान अपने विकासखंड के कृषि कार्यालय से योजनाओं की जानकारी ले सकते हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र में भी प्रशिक्षण के बारे में पूछा जा सकता है। योजना का लाभ लेने से पहले उसकी पात्रता और शर्तें जरूर पूछ लें। हर किसान की जमीन और हालात अलग होते हैं।

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