मछली और झींगा पालन में एक बड़ा नुकसान पूरी कमाई बहा सकता है। ऐसे जोखिम से बचाने के लिए केंद्र की एक योजना मदद दे रही है। यह मदद बीमा प्रीमियम पर मिलती है। यह जानकारी नई दिल्ली से सामने आई। योजना का नाम पीएम मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना है। इसमें बीमा खरीदने पर सरकार प्रीमियम का एक हिस्सा खुद देती है। इससे मछली पालकों पर बीमा का खर्च कम पड़ता है।
बीमा क्यों जरूरी है
मछली पालन में नुकसान अचानक आता है और अक्सर बहुत बड़ा होता है। बाढ़, बीमारी और मौसम की मार जैसे कारण इसमें शामिल हैं। खबर के मुताबिक दूसरे कारणों से हुआ नुकसान भी कवर होता है।
बीमा न हो तो किसान को अक्सर कर्ज लेना पड़ता है। उसी कर्ज से वह तालाब या इकाई दोबारा तैयार करता है। यही वजह है कि सरकार चाहती है कि ज्यादा किसान बीमा करवाएं।
पीएम मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना का मकसद भी यही है। यह किसानों को बीमा के लिए प्रेरित करती है। साथ ही नुकसान होने पर उन्हें तेजी से मुआवजा दिलाने की कोशिश करती है।
कितनी मिलेगी सब्सिडी
योजना के घटक 1-बी में बीमा प्रीमियम पर सब्सिडी दी जाती है। सामान्य वर्ग के किसानों को प्रीमियम का 40 प्रतिशत तक हिस्सा मिलता है। यह मदद प्रति हेक्टेयर अधिकतम 25,000 रुपए तक है।
एक किसान अधिकतम चार हेक्टेयर के लिए दावा कर सकता है। यानी कुल मदद की ऊपरी सीमा एक लाख रुपए बैठती है। यह प्रोत्साहन एक फसल चक्र के बीमा के लिए दिया जाता है।
उदाहरण के तौर पर समझिए। मान लें एक हेक्टेयर का प्रीमियम 50,000 रुपए है। तब 40 प्रतिशत यानी 20,000 रुपए बनते हैं। यह 25,000 रुपए की सीमा के अंदर है। यह उदाहरण सिर्फ समझाने के लिए है।
नई तकनीक वाली इकाइयों को मदद
आधुनिक तरीकों से मछली पालन करने वालों के लिए भी राहत है। केज कल्चर, बायोफ्लॉक, रेसवे और आरएएस (Recirculating Aquaculture System) पर भी मदद है। यह मदद 40 प्रतिशत तक मिलती है। यह सहायता अधिकतम एक लाख रुपए तक है। यह लाभ 1,800 घन मीटर तक की इकाइयों के लिए बताया गया है। इसलिए इकाई का आकार पहले जांच लेना ठीक रहेगा।
SC, ST और महिलाओं को फायदा
अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) और जनजाति (Scheduled Tribe) को अलग से फायदा है। महिला लाभार्थियों को भी यही फायदा मिलता है। इन्हें सामान्य वर्ग के किसानों से 10 प्रतिशत ज्यादा प्रोत्साहन दिया जाता है।
हालांकि कुल मदद 50 प्रतिशत होगी या नहीं। सीमा बदलेगी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। इसलिए सही हिसाब के लिए योजना के दिशानिर्देश देखना बेहतर रहेगा।
पैसा कैसे और कब मिलेगा
प्रोत्साहन की रकम सीधे किसान के बैंक खाते में पहुंचती है। यह भुगतान नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (National Fisheries Digital Platform) के जरिए होता है। रकम फसल चक्र के हिसाब से दी जाती है।
नुकसान पर क्लेम का तरीका
नुकसान होने पर किसान को तुरंत बीमा कंपनी को सूचना देनी होती है। इसके बाद क्षति आकलनकर्ता नुकसान की जांच करता है। फिर क्लेम का निपटारा होता है।
झींगा पालन के क्लेम 30 दिन में निपटाने का नियम है। मछली पालन के बाकी क्लेम 45 दिन में निपटाए जाने हैं। इसलिए सूचना देने में देरी नहीं करनी चाहिए।
बीमा कंपनियां कौन सी हैं
योजना में चार बीमा कंपनियां शामिल हैं। ये हैं ओरिएंटल इंश्योरेंस और एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया। साथ में न्यू इंडिया एश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस भी हैं। खबर के मुताबिक निजी बीमा कंपनियों को भी जोड़ा जा रहा है।
आवेदन कैसे करें
आवेदन की प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है। पहले अपने तालाब, टैंक या इकाई को उसी पोर्टल पर रजिस्टर कराएं। इसके बाद किसी मान्यता प्राप्त बीमा कंपनी से उस इकाई का बीमा खरीदें। आखिर में प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन करें।
सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब तक 316 आवेदन मिले हैं। ये आवेदन कुल 730.61 हेक्टेयर क्षेत्र के हैं। इनमें से 127 आवेदन मंजूर हो चुके हैं। 321.74 हेक्टेयर वाले किसानों को कुल 40.03 लाख रुपए का प्रोत्साहन मिल चुका है। ये आंकड़े सिर्फ बीमा प्रीमियम वाले घटक के हैं। इनकी तारीख या राज्यवार ब्योरा खबर में नहीं दिया गया है।
मछली पालकों की राय
मछली पालक संगठनों का कहना है कि यह मदद अहम है। खासकर छोटे और मझोले किसानों के लिए यह काम की है। संगठनों के मुताबिक आपदा या बीमारी के बाद यह मदद सहारा देती है।
किसान किन बातों का ध्यान रखें
रजिस्ट्रेशन और बीमा समय पर कराना फायदेमंद रहेगा। इकाई की जानकारी और दस्तावेज सही रखें। नुकसान होने पर देर न करें और कंपनी को तुरंत बताएं।
अनुसूचित जाति, जनजाति और महिला लाभार्थी अतिरिक्त लाभ की पुष्टि विभाग से कर लें। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के मछली पालक पात्रता की जानकारी लें। यह जानकारी अपने जिले के मत्स्य विभाग से मिल सकती है।
ये भी पढ़ें…
कामधेनु योजना की मदद से बढ़ाया डेयरी कारोबार, अब रोज 20 हजार रुपए तक हो रही भगवानदास की कमाई
एमपी के भोलाराम को खेत तालाब योजना से सिंचाई मिली, अब साल में दो फसलें और पहले से दोगुना लाभ
एमपी के अरुण ने बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन कर चमकाई किस्मत, फिश फीड बेचकर बढ़ाई अपनी कमाई
