BHOPAL.मध्य प्रदेश की राजनीति ने देश को दो कृषि मंत्री दिए हैं। मौजूदा केंद्र सरकार में जहां कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की बागडोर शिवराज सिंह चौहान संभाल रहे हैं। जबकि 2019 से लेकर 2023 तक यह मंत्रालय नरेन्द्र सिंह तोमर के पास रह चुका है। दोनों ही नेता मध्य प्रदेश की राजनीति के कद्दावर नेता हैं। वे किसान परिवारों से आए हैं और खासे लोकप्रिय भी हैं। कृषि प्रधान अर्थवस्था वाले भारत में किसानों के कल्याण के लिए कई योजनाएं देने वाले वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान विदिशा संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर अब मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष का दायित्व संभाल रहे हैं।
भारत के केंद्र में स्थित मध्य प्रदेश भी कृषि प्रधान राज्य है। बात अर्थवस्था की हो या राजनीति की सबकी धुरी खेती और किसान ही हैं। इसलिए मध्य प्रदेश की राजनीति से केंद्रीय कृषि मंत्री बनने वाले दोनों ही नेताओं द्वारा किसान कल्याण के लिए कई कार्यक्रम चलाए गए हैं।
केन्द्रीय कृषि मंत्री के रूप में नरेन्द्र सिंह तोमर ने प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PM-KSMY), एग्री इंडिया हैकथॉन, और न्यूट्री-स्मार्ट विलेज जैसी प्रमुख योजनाओं की शुरुआत की थी। वहीं अब शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को सशक्त और आधुनिक बनाने के लिए खेत बचाओ अभियान, विकसित कृषि संकल्प अभियान और कृषि चौपाल जैसे अभियान शुरू किए हैं।
मध्य प्रदेश की राजनीति में भी खासा प्रभाव
किसान कल्याण के लिए काम करने वाले इन दोनों ही नेताओं का मध्य प्रदेश की राजनीति में खासा प्रभाव है। वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहचान किसान पुत्र के रूप में बन गई है। जबकि मध्य प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में काम कर चुके नरेन्द्र सिंह तोमर किसानों के दुख दर्द को खूब समझते हैं। यही वजह है कि ग्वालियर- चंबल अंचल में तोमर की पहुंच लगभग हर गांव के किसान तक हैं।
ग्वालियर- चंबल की राजनीति में दखल रखने वाले नरेन्द्र सिंह तोमर 2019 में मुरैना संसदीय क्षेत्र से लोकसभा में पहुंचे थे। इससे पहले वे ग्वालियर और मुरैना से पूर्व में भी सांसद रहे। उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का दायित्व सौंपा गया था।
मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष चुने जाने के बाद 7 दिसम्बर 2023 को लोकसभा से त्याग पत्र दे दिया था। वे केंद्रीय मंत्री के रूप में ग्रामीण विकास, पंचायती राज मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय भी संभाल चुके हैं।
वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान 18 साल तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। 2004 से 2023 तक वे मुख्यमंत्री रहे और 2024 विदिशा संसदीय क्षेत्र से लोकसभा पहुंचे। वे वर्तमान मोदी सरकार में कृषि एवं किसान कल्याण की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेई द्वारा विदिशा संसदीय सीट छोड़ने के बाद वे पहली बार यहां से लोकसभा पहुंचे थे। उसके बाद 1996, 1998, 1999 और 2004 में पांच बार सांसद चुने गए।
देश के कृषि मंत्री के रूप में इन दोनों नेताओं की भूमिका अहम रही है। नरेन्द्र सिंह तोमर ने खेती किसानी के अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए अहम योगदान दिया है। कृषि मंत्री रहने के दौरान पूर्वोत्तर में इम्फाल में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत 6 नए एग्रिकल्चर कॉलेज खुलवाए। असम के गोगामुख में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) को नए कैंपस में विस्तार दिलाया।
अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में कृषि कॉलेज, मिजोरम और सिक्किम में बागवानी कॉलेज, नागालैंड में पशुचिकित्सा विज्ञान कॉलेज तथा मणिपुर में खाद्य प्रौद्योगिकी कॉलेज की शुरूआत कराई। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी के अंतर्गत मध्य प्रदेश के मुरैना के पोरसा में नए उद्यानिकी महाविद्यालय की आधारशिला भी तोमर के कार्यकाल में रखी गई।
वहीं वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि अनुसंधान के क्षेत्र का विस्तार कर रहे हैं। उनके द्वारा किसानों को वैज्ञानिक खेती जागरुक करने का काम किया जा रहा है। जलवायु-अनुकूल फसलों की नई किस्में विकसित करने के साथ स्वदेशी पशु चिकित्सा टीकों को बढ़ावा दिया है। सूखा-रोधी और कीट-रोधी सैकड़ों उन्नत व बायोफोर्टिफाइड फसलों की नई किस्में किसानों को सौंप रहे हैं।
वे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)से अनुसंधान करा रहे हैं। किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने के लिए विकसित कृषि संकल्प अभियान शुरू किया है। जिसके तहत वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों को खेतों तक भेजकर किसानों को जानकारी और प्रशिक्षित किया जा रहा है। वे खुद इसराइल जैसे देशों का भ्रमण कर पानी की कम उपलब्धता के बीच अच्छी खेती की तकनीक और जानकारी किसानों तक पहुंचा रहे हैं।
नरेन्द्र सिंह तोमर ने केंद्रीय कृषि मंत्री रहते हुए कृषि अवसंरचना फंड (AIF)की शुरूआत की। इसके तहत ग्रामीण स्तर पर भंडारण, कोल्ड स्टोरेज व प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 1 लाख करोड़ रुपए का फंड रखा गया। उन्होंने देश भर में 10 हजार नए किसान उत्पादक संगठन (FPO) को गठन कर छोटे किसानों की बाजार तक पहुंच को मजबूत करने का मिशन भी शुरू किया था।
शिवराज सिंह चौहान द्वारा खेत बचाओ अभियान के जरिए मृदा संरक्षण, टिकाऊ खेती और भूमि की उर्वरता बढ़ाने की मुहिम को जन-आंदोलन का रूप दिया गया है। भारत को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए 6 वर्षीय कार्ययोजना लागू की गई है।
