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सीकर से दिल्ली तक: जब राजस्थान की एक लोकसभा सीट ने देश को दिए दो कृषि मंत्री

editor | Aug 20, 2026, 06:56 IST

​भारतीय राजनीति के इतिहास में कई ऐसी संसदीय सीटें रही हैं, जिन्होंने देश की सत्ता और नीतियों को दिशा दी है। लेकिन राजस्थान की सीकर लोकसभा सीट का इतिहास इस मामले में ऐतिहासिक है। 

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​भारतीय राजनीति के इतिहास में कई ऐसी संसदीय सीटें रही हैं, जिन्होंने देश की सत्ता और नीतियों को दिशा दी है। लेकिन राजस्थान की सीकर लोकसभा सीट का इतिहास इस मामले में ऐतिहासिक है। 

सीकर की माटी ने देश की संसद को दो कद्दावर किसान नेताओं के रूप में सौगात दी। इन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री का पद संभालकर देश की कृषि नीतियों की नई इबारत लिखी।

​ये दो दिग्गज नेता थे—चौधरी देवीलाल और डॉ. बलराम जाखड़। ​संयोग की बात यह है कि दोनों ही नेता मूल रूप से पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा से आते थे। लेकिन, सीकर की जनता ने उन्हें सिर-आंखों पर बिठाया। 

चौधरी देवीलाल ने 1989 में जनता दल के बैनर पर सीकर से जीत दर्ज की। वे केंद्र की विश्वनाथ प्रताप सिंह (वीपी सिंह) सरकार में डिप्टी पीएम के साथ ही केंद्रीय कृषि मंत्री बने। 

दूसरी ओर, 1991 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. बलराम जाखड़ ने इसी सीकर सीट से जीत हासिल की। वे पीवी नरसिम्हा राव सरकार में देश के कृषि मंत्री बने।

​देवीलाल: किंगमेकर से कृषि मंत्री तक का सफर

​हरियाणा के सिरसा जिले में जन्मे चौधरी देवीलाल को भारतीय राजनीति में सम्मान के साथ ताऊ कहा जाता था। उनका स्पष्ट मानना था कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। जब तक किसान समृद्ध नहीं होगा, देश आगे नहीं बढ़ सकता।

​वे दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे। 1980 के दशक के उत्तरार्ध में जब देश में कांग्रेस विरोधी लहर चल रही थी, तब देवीलाल ने विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने में अहम भूमिका निभाई। वे राजनीतिक गलियारों में किंगमेकर बन चुके थे।

​1989 का सीकर चुनाव

देवीलाल ने ​1989 के लोकसभा चुनाव के लिए राजस्थान की सीकर संसदीय सीट को चुना। उनका मुकाबला कांग्रेस के दिग्गज नेता बलराम जाखड़ से था।

​देवीलाल ने सीकर के किसानों के साथ सीधा संवाद साधा। चुनाव परिणाम एकतरफा साबित हुए। देवीलाल ने यह चुनाव बड़े अंतर से जीता। उन्हें संसद भेजकर दिल्ली की सत्ता की चाबी सौंपी।

​कृषि मंत्री के रूप में कार्यकाल (1989–1991)

​वीपी सिंह सरकार और बाद में चंद्रशेखर सरकार में उप-प्रधानमंत्री बने चौधरी देवीलाल ने कृषि मंत्रालय का प्रभार खुद अपने पास रखा। उनके कृषि मंत्री रहते हुए लिए गए प्रमुख फैसले निम्न हैं:

किसान कर्जमाफी: देवीलाल ने चुनावी वादे को निभाते हुए छोटे और सीमांत किसानों के 10,000 रुपए तक के कृषि ऋणों को माफ करने की घोषणा की। यह भारत के राजनीतिक इतिहास में अपनी तरह की पहली राष्ट्रव्यापी कर्जमाफी थी।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी): देवीलाल ने इस बात पर बल दिया कि फसलों के समर्थन मूल्य की गणना करते समय किसान की मेहनत, लागत और महंगाई दर को शामिल किया जाए। उन्होंने कृषि लागत एवं मूल्य आयोग के मापदंडों में किसान-हितैषी बदलाव करवाए।

​ग्रामीण बजट में बढ़ोतरी: देवीलाल का स्पष्ट रुख था कि केंद्रीय बजट का कम से कम 50% से 50% हिस्सा ग्रामीण विकास, सिंचाई और कृषि बुनियादी ढांचे पर खर्च होना चाहिए। उनका कहना था कि
जब तक खेत-खलिहान में हरियाली नहीं होगी, तब तक दिल्ली के महलों की चमक अधूरी है।

डॉ. बलराम जाखड़: आधुनिक कृषि के शिल्पकार (23 अगस्त 1923 – 3 फरवरी 2016) 

​पंजाब के फाजिल्का में जन्मे डॉ. बलराम जाखड़ उन विरले नेताओं में से थे, जो राजनीतिज्ञ होने के साथ ही उत्साही किसान और उत्कृष्ट प्रशासक भी थे।

​डॉ. जाखड़ के नाम भारतीय संसद का एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज है। वे 1980 से 1989 तक लगातार 10 साल तक लोकसभा अध्यक्ष रहे। 

​1991 में सीकर से वापसी

​1989 में सीकर से चुनाव हारने के बाद भी डॉ. जाखड़ ने क्षेत्र से अपना नाता नहीं तोड़ा। 1991 के आम चुनावों में कांग्रेस ने उन्हें दोबारा सीकर से मैदान में उतारा। 

इस बार सीकर की जनता ने डॉ. जाखड़ के अनुभव और कद पर भरोसा जताया और उन्हें भारी बहुमत से विजयी बनाकर संसद भेजा।

​जब पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व में केंद्र में कांग्रेस सरकार बनी तो डॉ. जाखड़ को देश के कृषि मंत्रालय का महत्वपूर्ण प्रभाग सौंपा गया।

​कृषि मंत्री के रूप में कार्यकाल (1991–1996)

​1991 का समय भारत के लिए आर्थिक उदारीकरण का दौर था। डॉ. मनमोहन सिंह देश के वित्त मंत्री थे और डॉ. बलराम जाखड़ कृषि मंत्री। 

जहां एक ओर देश के उद्योगों को खोला जा रहा था, वहीं डॉ. जाखड़ के सामने चुनौती थी कि भारतीय कृषि को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुरक्षित और आधुनिक बनाया जाए।

​उनके 5 साल के कार्यकाल की मुख्य उपलब्धियां

​कृषि अनुसंधान और आईसीएआर को मजबूती: डॉ. जाखड़ खुद एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले आधुनिक किसान थे। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद को मजबूत किया। लैब-टू-लैंड (प्रयोगशाला से खेत तक) तकनीक को बढ़ावा दिया।

​कृषि विज्ञान केंद्रों का विस्तार: उन्होंने देश के प्रत्येक जिले में कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित करने की योजना को गति दी। इससे वैज्ञानिक खेती और नई तकनीकों का ज्ञान सीधे किसानों तक पहुंचे।

​बागवानी और निर्यात प्रोत्साहन: डॉ. जाखड़ ने गेहूं, धान के अलावा फल, फूल और सब्जियों की खेती पर जोर दिया। उनके कार्यकाल में ही भारत ने कृषि उत्पादों के निर्यात की दिशा में बड़े कदम उठाए।

​राष्ट्रीय डेयरी और सहकारिता: राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और सहकारी समितियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादन (श्वेत क्रांति) को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही।

कृषि राजनीति का केंद्रबिंदु

​यह महज एक संयोग नहीं था कि सीकर ने देश को दो-दो कृषि मंत्री दिए। सीकर क्षेत्र शेखावाटी की उस माटी का प्रतिनिधित्व करता है, जहां का किसान जुझारूपन के लिए जाना जाता है।

सीकर की जनता हमेशा से राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराती रही है। जब देश में किसान कल्याण का मुद्दा गर्माया, तो सीकर ने ऐसे नेताओं को चुना जिनका राष्ट्रीय राजनीति में वजन था।

देवीलाल द्वारा शुरू की गई कर्जमाफी और जाखड़ द्वारा शुरू किया कृषि आधुनिकीकरण की जड़ें कहीं न कहीं सीकर की चुनावी जनादेश से जुड़ी हुई थीं।

एक अमिट विरासत

​देवीलाल और डॉ. बलराम जाखड़ भले ही अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से थे, लेकिन जब बात देश के किसान की आती थी तो दोनों का ध्येय एक ही था—किसान का सम्मान और उसकी आर्थिक उन्नति।

​राजस्थान का सीकर इतिहास के पन्नों में हमेशा इस बात के लिए दर्ज रहेगी कि उसने विपरीत धाराओं के दो महानायकों को चुना। इन्होंने देश की राजधानी में बैठकर अन्नदाता की किस्मत और नीतियों को बदलने का काम किया।

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