किसान की बात,सूत्र के साथ

खेती की पढ़ाई से दूर हो रहे छात्र कॉलेजों में हर साल घट रहे एडमिशन, खेती की पढ़ाई से दूर हो रहे छात्र

editor | Aug 20, 2026, 07:33 IST

BHOPAL. मध्य प्रदेश में खेती बाड़ी की मुश्किलों का असर कृषि कॉलेजों पर भी नजर आ रहा है। एग्रीकल्चर कोर्स में प्रवेश के लिए होने वाली परीक्षा PAT से भी छात्रों का मोह भंग हुआ है। साल दर साल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में कृषि संकाय के छात्रों की संख्या में कमी आई है। एमपी की दो एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और उनके संबद्ध सरकारी कॉलेजों में एडमिशन भी घट रहे हैं। कोरोना काल के बाद से बीएससी एग्रीकल्चर का सेशन एक सेमेस्टर लेट चल रहा है। जिससे सरकारी एग्रीकल्चर कॉलेज में एडमिशन लेने की स्थिति में छात्रों का एक साल बर्बाद हो जाता है। वहीं सरकारी कॉलेजों में फैकल्टी की कमी के चलते भी छात्र इनमें प्रवेश नहीं लेना चाहते।

mp agriculture colleges admission drop pat exam
Spread the love

BHOPAL. मध्य प्रदेश में खेती बाड़ी की मुश्किलों का असर कृषि कॉलेजों पर भी नजर आ रहा है। एग्रीकल्चर कोर्स में प्रवेश के लिए होने वाली परीक्षा PAT से भी छात्रों का मोह भंग हुआ है। साल दर साल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में कृषि संकाय के छात्रों की संख्या में कमी आई है। एमपी की दो एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और उनके संबद्ध सरकारी कॉलेजों में एडमिशन भी घट रहे हैं। कोरोना काल के बाद से बीएससी एग्रीकल्चर का सेशन एक सेमेस्टर लेट चल रहा है। जिससे सरकारी एग्रीकल्चर कॉलेज में एडमिशन लेने की स्थिति में छात्रों का एक साल बर्बाद हो जाता है। वहीं सरकारी कॉलेजों में फैकल्टी की कमी के चलते भी छात्र इनमें प्रवेश नहीं लेना चाहते।

खेती की अस्थिरता ने बढ़ाई दूरी

मध्य प्रदेश में आजीविका का सबसे बड़ा साधन खेती है। यहां 70 फीसदी से ज्यादा आबादी सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से किसानी पर निर्भर है। कृषि आधारित व्यवसाय और उद्योगों में रोजगार के अवसरों के चलते छात्र भी एग्रीकल्चर कोर्स में एडमिशन की दौड़ में रहते थे। हांलाकि बीते तीन सालों में इन पाठ्यक्रमों में छात्रों की दिलचस्पी घटी है। साल दर साल कृषि पाठ्यक्रमों की प्रवेश की संख्या घट रही है और कॉलेजों में सीटें खाली रह जाती हैं।

1800 सीटों पर भी छात्रों का टोटा

1.जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय में एग्रोनॉमी, सॉइल साइंस, एंटोमोलॉजी के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में 350 सीट हैं। जबकि कृषि स्नातक पाठ्यक्रम में जबलपुर, रीवा कॉलेज में 100-100, टीकमगढ़ कॉलेज में 90, गंज बासौदा, वारासिवनी, पवारखेड़ा कृषि कॉलेजों में 60-60 सीट हैं। जबलपुर एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग कॉलेज के साथ ही खुरई और पन्ना कृषि कॉलेज में सीटों की संख्या 70-70 है। जबकि उद्यानिकी कॉलेज रहली और छिंदवाड़ा में 60-60 वहीं जबलपुर फॉरेस्ट्री कॉलेज में 50 सीट हैं।

2.ग्वालियर कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध एग्रीकल्चर कॉलेज ग्वालियर, इंदौर और सीहोर में ग्रेजुएशन कोर्स में सीटों की संख्या 60-60 है। वहीं कृषि कॉलेज खंडवा और हॉर्टीकल्चर कॉलेज मंदसौर में 40-40 सीटें हैं। इनके अतिरिक्त ICAR कोटे की 15 फीसदी सीट भी इन कॉलेजों को मिली हैं। जबकि यूनिवर्सिटी ग्वालियर सहित इंदौर और सीहोर कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स एग्रोनॉमी, प्लांट ब्रीडिंग और हॉर्टीकल्चर में 200 सीट हैं। ICAR के नेशनल कोटे की 15 फीसदी सीटों को मिलाकर यूजी और पीजी की कुल सीटों की संख्या 500 से ज्यादा है।

तीन काउंसलिंग फिर भी खाली रहीं सीट

प्रदेश की सरकारी एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में सीटों पर एडमिशन के लिए 2025 में दो काउंसलिंग के बाद भी सीट खाली रह गई थीं। इसके लिए तीसरी बार काउंसलिंग करानी पड़ी फिर भी सीटों को पूरी तरह नहीं भरा जा सका था। प्रवेश परीक्षा में 12,563 छात्र सफल रहे थे। पहली ऑनलाइन काउंसलिंग में 1472 सीटों के लिए 2715 ने पंजीयन कराया। यानी प्रवेश परीक्षा में सफलता के बाद भी 9800 से ज्यादा छात्रों ने एडमिशन के लिए रुचि ही नहीं दिखाई।

यहां PAT की पाबंदी, वहां छूट

दरअसल जहां सरकारी कॉलेजों में सीट के लिए PAT की बाध्यता है। यानी प्री एग्रीकल्चर टेस्ट पास करने के बाद ही छात्र एडमिशन के लिए पात्र हो सकते हैं। इसमें भी उन्हें मेरिट के आधार पर कॉलेज आवंटित होते हैं। जिससे छात्रों को उनकी पसंद के कॉलेज नहीं मिल पाते या जो कॉलेज मिलते हैं वे घर से दूर या रेटिंग में कमजोर होते हैं। जबकि ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) से मान्यता हासिल कर निजी कॉलेज भी एग्रीकल्चर कोर्स चला रहे हैं। इनमें प्रवेश के लिए PAT की पाबंदी नहीं है।

फैकल्टी की कमी

एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में फैकल्टी की बेहद कमी है। यूजी- पीजी कोर्स के लिए स्थायी फैकल्टी के पद खाली हैं। वहीं छात्रों को शोध के लिए भी पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पा रही है। यूनिवर्सिटी और कॉलेज प्रबंधन की बेरुखी के कारण प्रवेश लेने वाले छात्र मैदानी अनुभव हासिल नहीं कर पाते। इस वजह से निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी उनसे छिन जाते हैं। निजी क्षेत्र में अनुभव को प्राथमिकता दी जाती हैं। सरकारी कृषि कॉलेजों के ज्यादातर छात्र यही पिछड़ जाते हैं।

प्रवेश परीक्षा में देरी

कृषि कॉलेजों में प्रवेश के लिए मध्य प्रदेश में कर्मचारी चयन मंडल द्वारा प्री एग्रीकल्चर टेस्ट (PAT)लिया जाता है। इसकी मेरिट के आधार पर कॉलेजों में छात्रों को सीट आवंटित होती है। बीते तीन साल से पीएटी काफी देरी से हो रही है। वर्तमान शैक्षणिक सत्र में भी यही स्थिति है। मार्च 2026 को PAT का विज्ञापन जारी हुआ था। मई माह में टेस्ट हुआ लेकिन रिजल्ट अब तक नहीं आया है। इससे पहले 2025 में भी प्री एग्रीकल्चर टेस्ट जुलाई में हुआ था और रिजल्ट सितम्बर में आया था।

GENERAL editor

Read more