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दिल्ली में 23 अक्टूबर से BIRC 2026, भारतीय चावल के लिए खुलेंगे नए बाजार, 150 के ज्यादा देशों के खरीदार आएंगे

Pawan Modiya | Oct 21, 2026, 11:45 IST

भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (BIRC 2026) 23 से 25 अक्टूबर तक दिल्ली में होगा। आयोजकों के अनुसार, 150 से अधिक देशों के खरीदारों ने 4,649 पंजीकरण कराए हैं। भारतीय निर्यातकों और विदेशी खरीदारों के बीच 2,038 कारोबारी बैठकें तय हैं।

चावल सम्मेलन

भारतीय चावल के कारोबार को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ाने की तैयारी है। इसके लिए भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन 2026 आयोजित किया जा रहा है। यह सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर तक नई दिल्ली में होगा। इसका आयोजन भारत मंडपम में किया जाएगा। सम्मेलन में भारतीय चावल निर्यातकों और विदेशी खरीदारों की भागीदारी रहेगी।

आयोजकों के अनुसार, 150 से अधिक देशों के खरीदारों ने पंजीकरण कराया है। कुल 4,649 खरीदार पंजीकरण दर्ज किए गए हैं। भारतीय निर्यातकों और विदेशी खरीदारों के बीच 2,038 कारोबारी बैठकें भी तय हैं।

भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (Indian Rice Exporters Federation, IREF) इस सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। इसमें 180 से अधिक कंपनियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। प्रदर्शनी के लिए दोनों हॉलों की जगह लगातार दूसरे साल पूरी बुक हो चुकी है।

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारतीय चावल के लिए नए बाजार तलाशना है। साथ ही, निर्यातकों को विदेशी खरीदारों से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे नए व्यापारिक संबंध बनाने और निर्यात की संभावनाएं समझने में मदद मिल सकती है।

किन देशों के खरीदार आएंगे?

सम्मेलन में अलग-अलग देशों के चावल खरीदार शामिल होंगे। इनमें कुवैत, दक्षिण अफ्रीका, बेनिन और नाइजीरिया के खरीदार भी शामिल हैं। संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब से भी भागीदारी रहेगी।

इन बाजारों में भारतीय चावल की मांग और कारोबार की संभावनाएं अलग-अलग हो सकती हैं। खरीदारों की पसंद चावल की किस्म, गुणवत्ता और कीमत पर निर्भर करती है। इसलिए निर्यातकों के लिए हर बाजार की जरूरत समझना जरूरी है।

भारतीय चावल कारोबार में बासमती और गैर-बासमती, दोनों किस्मों का महत्व है। अलग-अलग देशों में इनकी मांग और उपयोग अलग हो सकते हैं। सम्मेलन में कारोबारियों को बाजार की जरूरतों पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा।

विदेशी खरीदारों से सीधा संपर्क निर्यातकों को संभावित ग्राहकों की अपेक्षाएं समझने में मदद कर सकता है। वे गुणवत्ता, आपूर्ति, कीमत और भुगतान की शर्तों पर बातचीत कर सकेंगे। हालांकि, बैठकों का आयोजन अपने आप निर्यात सौदे की गारंटी नहीं देता।

भारतीय राज्यों की भी भागीदारी

सम्मेलन में देश के कई प्रमुख चावल उत्पादक और व्यापारिक राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनमें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और गुजरात शामिल हैं। तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक भी भागीदारी करेंगे।

मध्य प्रदेश के चावल कारोबारियों की भागीदारी भी दर्ज की गई है। राज्यवार पंजीकरण के आंकड़े देशभर से मिली दिलचस्पी दिखाते हैं। आयोजकों के मुताबिक, लगभग 91 प्रतिशत पंजीकरण दिल्ली के बाहर से हुए हैं।

राज्यवार आंकड़ों में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 13.1 प्रतिशत बताई गई है। दिल्ली की हिस्सेदारी 9.2 प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की हिस्सेदारी 8.4 प्रतिशत प्रत्येक बताई गई है। गुजरात की हिस्सेदारी 8.2 प्रतिशत है।

तमिलनाडु की हिस्सेदारी 6.2 प्रतिशत और मध्य प्रदेश की 5.2 प्रतिशत बताई गई है। कर्नाटक की हिस्सेदारी 5.1 प्रतिशत है। ये आंकड़े सम्मेलन के लिए हुए पंजीकरण से जुड़े हैं। इन्हें राज्यों के कुल चावल उत्पादन या निर्यात का हिस्सा नहीं समझना चाहिए।

IREF के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देव गर्ग ने इस भागीदारी को उत्साहजनक बताया है। उनके अनुसार, देशभर के कारोबारियों और विदेशी खरीदारों की रुचि बढ़ रही है। सम्मेलन से नए कारोबारी अवसर तैयार करने की कोशिश की जा रही है।

चावल निर्यात पर होंगे खास सत्र

सम्मेलन में 23 और 24 अक्टूबर को नौ ज्ञान सत्र आयोजित होंगे। इनमें वैश्विक मांग, आपूर्ति और कीमतों के रुझानों पर चर्चा होगी। निर्यात के नए अवसरों और कारोबारी जोखिमों पर भी बात होगी।

एक सत्र में वर्ष 2027 के चावल बाजार का अनुमान पेश किया जाएगा। इसमें विशेषज्ञ कीमतों में संभावित गिरावट और तेजी के संकेतों पर चर्चा करेंगे। S&P Global, BigMint, EY और IREF के विशेषज्ञ इसमें शामिल होंगे।

सम्मेलन में वर्ष 2027 के लिए चावल के दस संभावित बाजारों पर भी चर्चा होगी। इसमें बासमती और गैर-बासमती चावल के बाजारों का आकलन किया जाएगा। मांग, प्रतिस्पर्धा, कीमत और बाजार तक पहुंच जैसे पहलू देखे जाएंगे।

निर्यात के दौरान भुगतान में देरी या विवाद भी कारोबार को प्रभावित करते हैं। इसलिए भुगतान सुरक्षा, बीमा और ऋण से जुड़े विषय भी शामिल होंगे। माल ढुलाई की लागत और शिपिंग से जुड़े जोखिमों पर भी चर्चा होगी।

गुणवत्ता मानकों और प्रमाणन की जानकारी भी निर्यातकों के लिए अहम है। अलग-अलग देशों में आयात नियम और खाद्य सुरक्षा की शर्तें अलग हो सकती हैं। इन जरूरतों को समझने से निर्यातकों को बेहतर तैयारी करने में मदद मिल सकती है।

200 किस्मों का चावल संग्रह

सम्मेलन में ग्लोबल राइस आर्काइव नाम से विशेष प्रदर्शनी भी होगी। इसमें भारत और दूसरे देशों की करीब 200 चावल किस्में दिखाई जाएंगी। इससे चावल की विविधता और अलग-अलग किस्मों की खासियतें सामने आएंगी।

भारत में चावल की अनेक किस्में उगाई जाती हैं। उनकी खुशबू, दाने का आकार और पकने के बाद की बनावट अलग हो सकती है। खरीदार अपनी जरूरत के अनुसार किस्मों का चयन करते हैं। ऐसी प्रदर्शनी कारोबारियों को नए उत्पादों की जानकारी दे सकती है।

सम्मेलन का उद्देश्य केवल व्यापारिक बैठकें कराना नहीं है। इसमें तकनीक, गुणवत्ता और नए उत्पादों पर भी ध्यान दिया जाएगा। चावल से बने मूल्यवर्धित उत्पादों की संभावनाएं भी सामने लाई जाएंगी।

मूल्यवर्धित उत्पादों का मतलब है, किसी कृषि उपज से नए उपयोगी उत्पाद तैयार करना। इससे कारोबारियों को पारंपरिक अनाज बिक्री से आगे बढ़ने के विकल्प मिल सकते हैं। हालांकि, किसी नए उत्पाद की सफलता बाजार की मांग पर निर्भर करेगी।

25 अक्टूबर को चावल महोत्सव

सम्मेलन के अंतिम दिन 25 अक्टूबर को चावल महोत्सव आयोजित होगा। इसमें 50 से अधिक देशों के व्यंजन पेश किए जाएंगे। कार्यक्रम में बिरयानी की 25 से अधिक किस्में भी दिखाई जाएंगी।

महोत्सव में शेफ प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रखे गए हैं। परिवारों के लिए अलग गतिविधियां आयोजित करने की योजना है। इससे चावल की विविधता को आम लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।

खाने से जुड़े कार्यक्रम कारोबारियों को उपभोक्ताओं की पसंद समझने में भी मदद कर सकते हैं। अलग-अलग देशों में चावल पकाने के तरीके और इस्तेमाल अलग होते हैं। इससे उत्पादों की पैकिंग, गुणवत्ता और किस्मों की मांग को समझा जा सकता है।

पिछले सम्मेलन में क्या हुआ था?

पहला भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन वर्ष 2025 में आयोजित हुआ था। आयोजकों के अनुसार, उसमें 90 से अधिक देशों के लोग शामिल हुए थे। कुल 10,854 लोगों ने सम्मेलन में भाग लिया था। इनमें 1,083 अंतरराष्ट्रीय खरीदार शामिल थे।

सम्मेलन के बाद EY के आकलन में कारोबारी समझौतों और प्रतिबद्धताओं का उल्लेख हुआ था। इनके कुल मूल्य का आंकड़ा 33,453 करोड़ रुपए बताया गया था। ये प्रतिबद्धताएं करीब 86.3 लाख टन चावल से संबंधित थीं।

ये आंकड़े पिछले सम्मेलन के कारोबार से जुड़े हैं। इन्हें वर्ष 2026 के संभावित कारोबार का अनुमान नहीं माना जाना चाहिए। इस बार के लिए तुलनीय कारोबारी समझौतों की अनुमानित राशि जारी नहीं की गई है।

इस बार 2,038 कारोबारी बैठकों की तैयारी की गई है। आयोजकों को उम्मीद है कि इससे भारतीय चावल कारोबार को नए अवसर मिलेंगे। हालांकि, वास्तविक नतीजे बैठकों, समझौतों और बाद के निर्यात पर निर्भर करेंगे।

किसानों और कारोबारियों को क्या फायदा?

चावल के निर्यात में बढ़ोतरी से किसानों और मिलों के लिए अवसर बन सकते हैं। निर्यातक अधिक खरीदारों तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। इससे अलग-अलग किस्मों की मांग समझने में मदद मिल सकती है।

लेकिन अंतरराष्ट्रीय व्यापार का लाभ हर किसान तक अपने आप नहीं पहुंचता। इसका असर खरीद व्यवस्था, कीमत, गुणवत्ता और आपूर्ति की शर्तों पर निर्भर करता है। किसानों को मिलने वाला भाव स्थानीय बाजार और खरीददारों की मांग से भी प्रभावित होता है।

चावल मिलों और निर्यातकों के लिए गुणवत्ता मानकों को पूरा करना जरूरी है। समय पर माल भेजना और भुगतान सुरक्षित रखना भी अहम है। सम्मेलन में इन मुद्दों पर जानकारी मिलने की उम्मीद है।

किसानों के लिए बाजार की जानकारी उपयोगी है, खासकर जब वे फसल या किस्म चुनते हैं। फिर भी, केवल निर्यात की खबर देखकर उत्पादन बढ़ाने का फैसला नहीं करना चाहिए। स्थानीय कृषि सलाह, पानी की उपलब्धता और बिक्री की संभावनाओं को भी देखना चाहिए।

भारतीय चावल के लिए आगे की राह

BIRC 2026 भारतीय चावल कारोबार को वैश्विक खरीदारों से जोड़ने का मंच बनेगा। इसमें व्यापार, गुणवत्ता, तकनीक और बाजार की मांग पर चर्चा होगी। इससे निर्यातकों को नए बाजारों की तैयारी करने में मदद मिल सकती है।

भारत के लिए बड़ी चुनौती नए बाजारों में भरोसा बनाए रखना भी है। गुणवत्ता, समय पर आपूर्ति और भुगतान की सुरक्षा अहम रहेंगे। सम्मेलन में होने वाली बातचीत इन जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करेगी।

फिलहाल, 4,649 खरीदार पंजीकरण और 2,038 तय कारोबारी बैठकें आयोजन की तैयारी दिखाती हैं। सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर तक नई दिल्ली में होगा। इसके बाद ही नए समझौतों और कारोबारी नतीजों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

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