भोपाल | पशुपालन को लाभ का धंधा बनाकर ग्रामीण युवाओं और किसानों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मध्यप्रदेश शासन ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना शुरू की है। इस योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को 25 उच्च उत्पादक दुधारू गाय और भैंसों की आधुनिक डेयरी यूनिट लगाने के लिए बैंक ऋण के साथ मोटा अनुदान भी दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य डेयरी क्षेत्र को संगठित कर दूध उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय दोगुनी करना है।
आर्थिक मदद से खोला रास्ता
डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना में हितग्राही को 25 दुधारू पशुओं की पूरी डेयरी यूनिट स्थापित करने की मदद मिलती है। इसके लिए बैंकों के माध्यम से लगभग 42 लाख रुपए तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इस पर सरकार 25 से 33 प्रतिशत तक सब्सिडी भी दे रही है। यानी किसानों को ऋण राशि का 75 से 67 फीसदी पैसा ही बैंकों को लौटाना होता है। योजना के तहत सिर्फ पशु खरीद ही नहीं, शेड निर्माण, पशु बीमा और परिवहन के खर्च में भी सहायता दी जाती है। इससे डेयरी शुरू करने में आने वाली शुरुआती लागत कम होती है और हितग्राही स्वरोजगार से जुड़ने की कठिनाई से बच जाता है।
किसे मिल सकता है योजना का लाभ
योजना का लाभ लेने के लिए मध्यप्रदेश का मूल निवासी होना जरूरी है। इसके लिए आयु 21 वर्ष तय की गई है। प्रति यूनिट के लिए कम से कम 3.5 एकड़ कृषि जमीन होना जरूरी है। परिवार की संयुक्त भूमि भी इसमें मान्य होगी। साथ ही पशुपालन विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त संस्था से डेयरी प्रबंधन का प्रशिक्षण लेना जरूरी है।
सरकार दे रही आत्मनिर्भर बनाने सहारा
ट्रेनिंग से मार्केट लिंकेज तकइस योजना को सफल बनाने के लिए पशुपालन विभाग जिलों में जागरूकता शिविर चला रहा है। विकासखंड स्तर पर अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। जिससे कि वे इच्छुक युवाओं और महिला समूहों की पहचान कर उन्हें आवेदन प्रक्रिया समझाएं। आवेदन के बाद चयनित युवा को 5 से 7 दिन का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें पशुओं की नस्ल चयन, चारा प्रबंधन, साफ-सफाई, बीमारी की रोकथाम और दूध की गुणवत्ता बनाए रखने की जानकारी दी जाती है। बैंक लिंकेज के लिए भी विभाग द्वारा बैंकों के अधिकारियों के साथ समन्वय किया है। ऋण स्वीकृति में तेजी लाने के लिए हर जिले में नोडल बैंक अधिकारी तय किए गए हैं। विभाग दुग्ध संघों और निजी डेयरियों से अनुबंध कराकर हितग्राहियों को दूध बिक्री की गारंटी दिलाने पर भी काम कर रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट
अधिकारियों का कहना है कि एक 25 पशुओं की यूनिट से महीने में 300-400 लीटर तक दूध का उत्पादन हो सकता है। इससे न सिर्फ हितग्राही को हर महीने स्थिर आमदनी होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। चारा, शेड निर्माण और परिवहन से जुड़े लोगों को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। पशुपालन विभाग का लक्ष्य इस योजना के जरिए प्रदेश में आधुनिक डेयरियों की संख्या बढ़ाकर मध्यप्रदेश को दूध उत्पादन में देश में अग्रणी बनाना है।
