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छत्तीसगढ़ के अंकित ने एकीकृत खेती मॉडल से बढ़ाए कमाई के रास्ते, दो तालाबों में मछली पालन, ऊपर खेती और मुर्गी पालन

newz@gmail.com | Sep 9, 2026, 14:28 IST

जशपुर के किसान अंकित लकड़ा ने धान आधारित खेती को एकीकृत कारोबार बनाया। दो तालाबों में मछली पालन होता है। ऊपर 1,000 से 1,200 मुर्गियों के शेड हैं। योजना से करीब आठ लाख रुपए सहायता मिली।

अंकित एकीकृत खेती

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में रतबा गांव है। यहां युवा किसान अंकित लकड़ा खेती करते हैं। पहले उनकी खेती मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर थी। खेतों में धान की फसल प्रमुखता से लगाई जाती थी।

इस व्यवस्था में कमाई का केवल एक मुख्य रास्ता था। खराब मौसम आने पर नुकसान का खतरा बढ़ जाता था। अंकित ने इस स्थिति को बदलने की योजना बनाई। उन्होंने उपलब्ध जमीन और पानी का बेहतर उपयोग शुरू किया। उनका खेत अब केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है। यहां मछली, मुर्गी और फल उत्पादन भी जुड़ गया।

दो तालाब बने आधार

अंकित ने अपने खेत में दो तालाब तैयार कराए। इन तालाबों में मछली पालन किया जा रहा है। तालाबों ने खेत में पानी की उपलब्धता भी बढ़ाई। गर्मियों में यही पानी सिंचाई के काम आता है। इससे खेती केवल वर्षा के मौसम तक सीमित नहीं रहती। किसान दूसरी फसलों की योजना भी बना सकता है।

जल प्रबंधन इस मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उपलब्ध पानी का कई गतिविधियों में उपयोग किया जाता है। खेत का एक संसाधन दूसरे काम में सहायता देता है। इससे अलग व्यवस्थाओं पर होने वाला खर्च घट सकता है।

तालाब के ऊपर बनाए मुर्गी शेड

दोनों तालाबों के ऊपर मुर्गियों के लिए शेड बनाए गए हैं। इनमें लगभग 1,000 से 1,200 मुर्गियों की क्षमता है। रिपोर्ट के अनुसार, मुर्गियों का अपशिष्ट तालाब में पहुंचता है। यह मछलियों के प्राकृतिक आहार में मदद करता है। इस व्यवस्था से बाहरी मछली आहार की जरूरत घट सकती है। हालांकि, पानी की गुणवत्ता पर नियमित निगरानी जरूरी है।

मुर्गी पालन से किसान को अलग आय स्रोत मिलता है। मछली तैयार होने पर दूसरा आय स्रोत उपलब्ध होता है। दोनों गतिविधियां एक ही जगह संचालित होती हैं। इससे जमीन का इस्तेमाल अधिक प्रभावी बनता है।

मेड़ों पर बागवानी, आम और लीची उगाई

अंकित ने तालाबों की मेड़ों को भी खाली नहीं छोड़ा। वहां आम और लीची के पौधे लगाए गए हैं। दूसरे फलदार पौधों को भी जगह दी गई है। भविष्य में इनसे अतिरिक्त आमदनी मिलने की उम्मीद है। पेड़ों की जड़ें मेड़ों को मजबूत रखने में मदद करती हैं। इससे मिट्टी का कटाव भी कम हो सकता है।

फलदार पौधे लंबी अवधि का निवेश माने जाते हैं। इसलिए उनका लाभ कुछ वर्षों बाद बढ़ सकता है। मछली और मुर्गी पालन जल्दी आय दे सकते हैं। बागवानी भविष्य के लिए नया सहारा बन सकती है।

सरकार से मिला आठ लाख का अनुदान

अंकित को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से सहायता मिली। उन्हें करीब आठ लाख रुपए का अनुदान मिला। यह राशि योजना के नियमों के तहत दी गई। इससे जरूरी ढांचा विकसित करने में मदद मिली। उन्हें तालाब लाइनर और पॉलीथिन की सुविधा भी मिली। बोर, मोटर और मछली आहार में सहयोग मिला।

कृषि और मत्स्य विभागों ने तकनीकी मार्गदर्शन दिया। इससे गतिविधियों को सही तरीके से जोड़ने में सहायता मिली। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग ने भी इस मॉडल की जानकारी साझा की। विभाग ने इसे खेती में उपयोगी नवाचार बताया है।

अंकित ने खेती को बनाया कारोबार

अंकित खेती को आधुनिक कारोबार की तरह देखते हैं। उनके अनुसार, हर संसाधन की पहले योजना बननी चाहिए। बाजार की मांग समझना भी उतना ही जरूरी है। उत्पादन के साथ बिक्री की तैयारी करनी चाहिए। एक फसल पर पूरी निर्भरता जोखिम बढ़ा सकती है। कई गतिविधियां होने से जोखिम बंटने की संभावना रहती है।

मछली, मुर्गी और फल अलग समय पर तैयार होते हैं। इससे सालभर आय के अवसर बन सकते हैं। अंकित का मॉडल ग्रामीण उद्यमिता का उदाहरण पेश करता है। यह खेती और छोटे कारोबार को साथ जोड़ता है।

दूसरे किसानों के लिए सीख

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एकीकृत खेती को उपयोगी विकल्प मानती है। ऐसे मॉडल कई कृषि गतिविधियों को आपस में जोड़ते हैं। छोटे किसानों को पहले स्थानीय स्थितियां जांचनी चाहिए। पानी, जमीन और बाजार का आकलन जरूरी है।

योजना की पात्रता भी जिले के अनुसार जांचनी होगी। इसके लिए कृषि या मत्स्य विभाग से संपर्क किया जा सकता है। प्रशिक्षण लेने के बाद ही बड़ा निवेश करना बेहतर होगा। इससे तकनीकी गलतियों का खतरा कम हो सकता है।

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