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क्या है ATMA योजना, किसानों को कैसे मिलेगा इसका फायदा, जानिए वो सब जो आप जानना चाहते हैं

newz@gmail.com | Sep 9, 2026, 17:43 IST

ATMA यानी कृषि तकनीकी प्रबंधन एजेंसी योजना किसानों को प्रशिक्षण, प्रदर्शन, एक्सपोजर विजिट, किसान मेले और फार्म स्कूल से जोड़ती है। जानिए योजना के फायदे।

एटीएमए योजना

केंद्र सरकार ने साल 2005-06 में एटीएमए योजना शुरू की थी। इसे हिंदी में कृषि तकनीकी प्रबंधन एजेंसी कहा जाता है। यह योजना कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत चलती है। इसका मकसद किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ना है। यह योजना जिला स्तर पर काम करती है। हर जिले में एक स्वायत्त संस्था इसे लागू करती है।

इसकी खास बात है कि यह ऊपर से आदेश देने वाली व्यवस्था नहीं है। यह किसानों की जरूरत के हिसाब से काम करती है। यानी हर इलाके में उसी की जरूरत के मुताबिक मदद मिलती है। कहीं मोटे अनाज की खेती पर जोर रहता है, तो कहीं ड्रिप सिंचाई पर। योजना किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को आमने-सामने लाती है। इससे किसानों तक नई तकनीक सीधे पहुंचती है। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

क्या है एटीएमए योजना

एटीएमए योजना कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्रों और किसानों के बीच की कड़ी है। यह वैज्ञानिकों की जानकारी को खेत तक पहुंचाने का काम करती है। भारत में प्रति क्षेत्र फसल उपज अभी भी कम है। इसी वजह से यह योजना जरूरी मानी जाती है। योजना के तहत किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण मिलता है। खेत पर ही नई तकनीक का प्रदर्शन भी किया जाता है। इससे किसान बिना जोखिम उठाए नई विधि सीख पाते हैं।

प्रशिक्षण से मिलेगा ज्ञान

योजना के तहत सबसे पहला हिस्सा प्रशिक्षण है। इसका मकसद ज्ञान को कौशल में बदलना है। किसानों को खेती के नए तरीके सिखाए जाते हैं। इसमें बीज चुनाव, खाद प्रबंधन और सिंचाई जैसे विषय शामिल होते हैं। कृषि वैज्ञानिक खुद किसानों से बातचीत करते हैं। इससे किसानों की पुरानी शंकाएं भी दूर होती हैं। प्रशिक्षण के बाद किसान नई तकनीक अपनाने में आत्मविश्वास महसूस करते हैं।

प्रदर्शन से बढ़ेगी उपज

दूसरा हिस्सा खेत पर होने वाला प्रदर्शन है। इसका मकसद कौशल को उत्पादकता में बदलना है। किसी एक किसान के खेत में नई तकनीक आजमाई जाती है। आसपास के अन्य किसान इसे खुद अपनी आंखों से देखते हैं। इससे उन्हें भरोसा होता है कि तकनीक कारगर है। नतीजा दिखने पर बाकी किसान भी इसे अपनाने लगते हैं। इस तरह प्रदर्शन नई तकनीक फैलाने का सबसे असरदार तरीका बनता है।

एक्सपोजर विजिट का फायदा

तीसरा हिस्सा एक्सपोजर विजिट यानी भ्रमण कार्यक्रम है। इसमें किसानों को दूसरे इलाकों में ले जाया जाता है। वहां वे सफल किसानों के खेत और तरीके देखते हैं। इससे किसानों को नए अनुभव और नई सोच मिलती है। कई बार दूसरे राज्यों की तकनीक भी काम आ जाती है। यह भ्रमण किसानों की सोच का दायरा बढ़ाता है। लौटकर किसान अपने खेत में नए प्रयोग करते हैं।

किसान मेले में समाधान

चौथा हिस्सा किसान मेले हैं। यहां किसानों को एक जगह कई समाधान मिलते हैं। कृषि विभाग, बीज कंपनियां और वैज्ञानिक सब एक साथ मौजूद रहते हैं। किसान अपने सवाल सीधे विशेषज्ञों से पूछ सकते हैं। मेलों में नई मशीनें और तकनीक भी दिखाई जाती हैं। इससे किसानों को नए विकल्पों की जानकारी मिलती है। यह मेले जानकारी और संसाधन जुटाने का बड़ा मंच बनते हैं।

फार्म स्कूल में सीख

पांचवां हिस्सा फार्म स्कूल है। यहां किसान खुद खेत पर जाकर सीखते हैं। सीखी हुई बात को तुरंत अपनाने का मौका मिलता है। इससे किसान धीरे-धीरे आगे बढ़ते जाते हैं। फार्म स्कूल का मकसद सीखना, अपनाना और आगे बढ़ना है। यह तरीका खासकर छोटे किसानों के लिए मददगार है। उन्हें बिना बड़ा खर्च किए नई विधि सीखने का मौका मिलता है।

योजना से किसे फायदा

इस योजना का सबसे ज्यादा फायदा छोटे और सीमांत किसानों को मिलता है। जो किसान आधुनिक खेती से अनजान हैं, उन्हें खासतौर पर जोड़ा जाता है। महिला किसानों को भी योजना में शामिल किया जाता है। इससे गांव के हर वर्ग तक जानकारी पहुंचती है। योजना का बड़ा मकसद किसानों की आय दोगुनी करना है। सही जानकारी और तकनीक मिलने से उत्पादन भी बढ़ता है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद रहती है। साथ ही गांव में आधुनिक खेती को लेकर जागरूकता भी बढ़ती है। धीरे-धीरे ज्यादा किसान नई तकनीक अपनाना शुरू करते हैं।

कैसे जुड़ सकते हैं किसान

किसान अपने जिले के कृषि विभाग या केवीके से संपर्क कर सकते हैं। वहां से एटीएमए से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी मिलती है। ग्राम स्तर पर भी कई बार किसान गोष्ठी होती है। इसमें किसान सीधे नाम दर्ज करा सकते हैं। किसान मेलों और फार्म स्कूल की जानकारी स्थानीय कृषि कार्यालय देता है। समय-समय पर यह जानकारी पंचायत स्तर पर भी दी जाती है। इच्छुक किसान इन कार्यक्रमों में मुफ्त हिस्सा ले सकते हैं। जागरूक किसान ही इस योजना का पूरा फायदा उठा पाते हैं।

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