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दुनियाभर में गेहूं की कीमतों में उछाल, जानें असली वजह और क्या हो सकता है समाधान

newz@gmail.com | Sep 10, 2026, 13:40 IST

रूस-यूक्रेन युद्ध और सूखे से गेहूं के दाम तेजी से बढ़े हैं। अनाज टर्मिनलों पर हमलों ने सप्लाई चेन तोड़ दी है। मिस्र और इंडोनेशिया जैसे आयातक देशों पर असर पड़ रहा है।

गेहूं के दाम

दुनिया भर में गेहूं की कीमतों में तेज उछाल आया है। इसकी बड़ी वजह रूस-यूक्रेन युद्ध है। ब्लैक सी क्षेत्र से गेहूं और अनाज का निर्यात बाधित हुआ है। कई देशों में सूखे और कम बारिश ने भी उत्पादन घटाया है। अनाज टर्मिनलों पर लगातार हमलों ने सप्लाई चेन तोड़ दी है। अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका जैसे बड़े उत्पादक क्षेत्रों पर भी दबाव बढ़ा है।

पिछले एक महीने में रूस और यूक्रेन ने हमले तेज किए हैं। दोनों देशों ने ब्लैक सी पर एक-दूसरे के अनाज टर्मिनल निशाना बनाए हैं। रूस दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं एक्सपोर्टर है। यूक्रेन भी टॉप 10 अनाज उत्पादक देशों में शामिल है। इसलिए इन हमलों का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है। अनाज बाजार का ग्लोबल बेंचमार्क शिकागो व्हीट फ्यूचर्स है। यह शुक्रवार को तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा। सोमवार को इनमें 0.54 फीसदी की मामूली गिरावट आई।

रोस्तोव में इमरजेंसी

पिछले एक महीने में बंदरगाहों और जहाजों पर हमले बढ़े हैं। इन हमलों ने अनाज टर्मिनलों का कामकाज बुरी तरह बाधित किया है। एक्सपोर्ट के पीक सीजन में शिपर्स को लोडिंग टालनी पड़ी है। कई बार कार्गो रद्द भी करना पड़ा है। रूसी मिसाइल हमलों ने यूक्रेन के अनाज एक्सपोर्ट को प्रभावित किया है। यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने भी रूस के शिपमेंट घटाए हैं। नोवोरोसिस्क और तमन बंदरगाहों पर हमलों से शिपिंग लागत बढ़ गई है।

बंदरगाहों पर बढ़े हमले

रूस के रोस्तोव क्षेत्र में शुक्रवार को इमरजेंसी घोषित की गई। अधिकारियों के मुताबिक अजोव सागर और ब्लैक सी बेसिन के बंदरगाह बंद हैं। नेविगेशन में रुकावट से खेतों में अनाज का ढेर लग गया है। इसी बीच दक्षिण अफ्रीका के स्वार्टलैंड में भी संकट गहरा रहा है। बढ़ता तापमान और कम बारिश वहां फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह इलाका दक्षिण अफ्रीका का करीब 20 फीसदी गेहूं पैदा करता है।

यूक्रेन के इंफ्रास्ट्रक्चर मंत्रालय ने आंकड़े जारी किए हैं। जुलाई में बंदरगाह पर खड़े जहाजों पर 35 हमले हुए। समुद्र में जहाजों पर 22 हमले दर्ज किए गए। बंदरगाह सुविधाओं पर कुल 67 हमले हुए। इसके मुकाबले पूरे 2025 में सिर्फ 14 हमले हुए थे। यह आंकड़ा हमलों में तेज बढ़ोतरी दिखाता है।

खाद्य संकट की आशंका

कीव के कृषि मंत्री ने बड़ा दावा किया। उनके मुताबिक हालिया रूसी हवाई हमलों ने बड़ा नुकसान किया है। रिटेलर्स की करीब 90 फीसदी फूड लॉजिस्टिक्स (खाद्य आपूर्ति व्यवस्था) तबाह हो गई है। गेहूं के ट्रांसपोर्ट में कमी से कीमतें बढ़ गई हैं। इससे दुनिया भर में खाद्य असुरक्षा का डर बढ़ गया है।

गेहूं की कमी नहीं, सवाल खरीदने की क्षमता का है

जो ग्लॉबर ने इस पर अहम बात कही। वे इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (International Food Policy Research Institute) में रिसर्च फेलो हैं। उनके मुताबिक असली मुद्दा गेहूं के उत्पादन की मात्रा नहीं है। असल समस्या गेहूं को खरीदारों तक पहुंचाने की लागत है। ग्लॉबर ने अल जजीरा से कहा कि रूस-यूक्रेन के पास काफी स्टॉक है। लेकिन यह स्टॉक अभी बाजार तक नहीं पहुंच पा रहा है। अगर पहुंच भी रहा है तो बहुत ऊंची कीमत पर। उन्होंने कहा कि दुनिया में गेहूं की कोई कमी नहीं है। सवाल उपलब्धता का नहीं बल्कि खरीदने की क्षमता का है।

मिस्र-इंडोनेशिया पर असर

दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं आयातक देश मिस्र है। मिस्र आमतौर पर आयात पर सालाना करीब 3 अरब डॉलर खर्च करता है। 2026 की पहली छमाही में मिस्र का 82% स्टॉक इन्हीं दो देशों से आया। एशिया के दूसरे सबसे बड़े आयातक इंडोनेशिया पर भी असर पड़ा है। इंडोनेशिया ने 2023-24 के बीच यूक्रेन से 361 मिलियन डॉलर का गेहूं खरीदा। रूस से भी 102 मिलियन डॉलर का गेहूं खरीदा गया। इंडोनेशिया अपनी जरूरत का 15 से 20 फीसदी इन्हीं दो देशों से मंगाता है।

इंडोनेशिया के फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन के एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया। उनके मुताबिक मौजूदा स्टॉक से तत्काल जरूरतें पूरी हो सकती हैं। लेकिन उनके पास अतिरिक्त सप्लाई नहीं बची है। रूस-यूक्रेन से न आने वाले गेहूं के लिए विकल्प तलाशने होंगे। इनमें बुल्गारिया, ऑस्ट्रेलिया, रोमानिया और अर्जेंटीना शामिल हैं।

अमेरिका में भी घटी फसल

युद्ध के अलावा जलवायु परिवर्तन भी बड़ी वजह है। सूखे और कम बारिश ने गेहूं उत्पादन पर बुरा असर डाला है। यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (USDA) के मुताबिक अमेरिका में उत्पादन घट रहा है। एक जुलाई तक अनुमान 46.7 बुशेल प्रति एकड़ था। यह पिछले महीने से 0.1 बुशेल कम है। पिछले साल के औसत 54.9 बुशेल से यह 8.2 बुशेल कम है।

USDA के मुताबिक अगर ऐसा हुआ तो बड़ा रिकॉर्ड बनेगा। अमेरिका में उत्पादन 2015 के बाद सबसे कम होगा। 14 अगस्त की रिपोर्ट में विभाग ने वजह भी बताई। अमेरिका में गेहूं की खेती का रकबा लंबे समय से घट रहा है। ग्रेट प्लेन्स राज्यों में सूखे का व्यापक असर पड़ा है। यहां एचआरडब्ल्यू (Hard Red Winter Wheat) किस्म का गेहूं उगाया जाता है। कुल सप्लाई पिछले साल से 13 फीसदी कम रहने का अनुमान है। हालांकि ज्यादा शुरुआती स्टॉक से कुछ राहत मिली है।

क्या है समाधान

युद्ध के दौरान एक बड़ा समझौता भी हुआ था। जुलाई 2022 में ‘ब्लैक सी ग्रेन इनिशिएटिव’ (Black Sea Grain Initiative) लागू हुआ था। इसका मकसद यूक्रेनी बंदरगाहों से सुरक्षित निर्यात कराना था। इससे वैश्विक खाद्य कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलती थी। EU (European Union) के मुताबिक इस दौरान 1,000 से ज्यादा जहाज रवाना हुए। लेकिन रूस ने जुलाई 2023 में यह समझौता खत्म कर दिया।

जानकारों का कहना है कि मौजूदा संकट आसानी से नहीं सुलझेगा। कीमतें कम करने के लिए रूस-यूक्रेन को रणनीति बदलनी होगी। जलवायु परिवर्तन का असर घटाने के लिए भी कदम जरूरी हैं। सरकारें बेहतर जल प्रबंधन वाली नीतियां लागू कर सकती हैं। जलाशयों के इस्तेमाल से सूखे से बची फसलें बचाई जा सकती हैं। इससे उत्पादन में होने वाला नुकसान कम हो सकता है।

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