किसान की बात,सूत्र के साथ

देशभर में 300 कृषि विज्ञान केंद्र अपग्रेड करेगी केंद्र सरकार, किसानों को मिलेगी आधुनिक तकनीक

newz@gmail.com | Sep 8, 2026, 20:32 IST

केंद्र सरकार मार्च 2027 तक 300 कृषि विज्ञान केंद्र अपग्रेड करेगी। दिसंबर 2028 तक सभी केंद्रों में इनक्यूबेशन-सह-कौशल केंद्र बनेंगे। शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से समय पर फंड और सक्रिय सहयोग मांगा है।

कृषि विज्ञान केंद्र

केंद्र सरकार कृषि विज्ञान केंद्रों को मजबूत बनाने की तैयारी कर रही है। पहले चरण में 300 प्राथमिकता वाले केंद्र चुने गए हैं। इनके बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स में सुधार किया जाएगा।

यह लक्ष्य मार्च 2027 तक पूरा करने की योजना है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कार्ययोजना की समीक्षा की। यह बैठक सात सितंबर को नई दिल्ली में हुई। बैठक में राज्यों की भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई। कर्मचारियों की कमी दूर करने का मुद्दा भी उठाया गया। केंद्रों को समय पर फंड देने की जरूरत बताई गई।

कृषि विज्ञान केंद्र क्यों जरूरी

कृषि विज्ञान केंद्र किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संपर्क बनाते हैं। यहां किसानों को नई कृषि तकनीकों की जानकारी मिलती है। केंद्र खेतों पर नई किस्मों का प्रदर्शन भी करते हैं। इन केंद्रों में फसल प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाता है। किसानों को मिट्टी और मौसम आधारित सलाह भी मिलती है। पशुपालन और बागवानी की तकनीक भी बताई जाती है।

आधुनिक केंद्र स्थानीय कृषि समस्याओं पर बेहतर काम कर सकेंगे। इससे किसानों तक शोध के नतीजे जल्दी पहुंच सकते हैं। ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण भी मिल सकता है।

शिवराज ने राज्यों से सहयोग मांगा

शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से सक्रिय सहयोग मांगा है। उन्होंने समय पर वित्तीय मदद देने की जरूरत बताई। संस्थागत सहयोग को भी योजना के लिए जरूरी बताया। चौहान के अनुसार केंद्र और राज्यों का तालमेल मजबूत होना चाहिए। केंद्रों में आधुनिक सुविधाएं और पर्याप्त कर्मचारी होने चाहिए। जिला स्तर की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि केंद्रों को किसानों की जरूरतों के मुताबिक बनाया जाए। नई कृषि चुनौतियों से निपटने की तैयारी भी जरूरी है। इसके लिए मानव संसाधन और आधुनिक तकनीक उपलब्ध होनी चाहिए। बैठक में कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी मौजूद रहे। मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया। DARE (Department of Agricultural Research and Education) के सचिव बैठक में उपस्थित थे। वह ICAR (Indian Council of Agricultural Research) के महानिदेशक भी हैं। यह जिम्मेदारी डॉ. मंगी लाल जाट संभाल रहे हैं।

बैठक में पांचवें मुख्य सचिव सम्मेलन की सिफारिशें भी देखी गईं। यह सम्मेलन वर्ष 2025 में आयोजित हुआ था। संबंधित फैसलों का काम तेज करने पर चर्चा हुई।

राज्यों की क्या भूमिका होगी

केंद्रों का उन्नयन केवल केंद्र सरकार के भरोसे नहीं होगा। इसमें राज्य सरकारों की सक्रिय भूमिका भी जरूरी रहेगी। राज्यों को वित्तीय और संस्थागत सहायता उपलब्ध करानी होगी। DARE सचिव ने राज्यों के मुख्य सचिवों से संपर्क किया है। केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों से भी चर्चा की गई है। इसका उद्देश्य जरूरी सहयोग और धन जुटाना है।

कई राज्यों ने कृषि विश्वविद्यालयों के जरिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। महाराष्ट्र और गुजरात में इस दिशा में काम बढ़ा है। गोवा और छत्तीसगढ़ ने भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। इन राज्यों में DPR (Detailed Project Report) प्राप्त हो चुकी हैं। ये रिपोर्ट विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों से मिली हैं। अन्य राज्य अभी तैयारी के अलग चरणों में हैं।

2028 का अगला लक्ष्य तय

सरकार ने एक दूसरा लक्ष्य भी तय किया है। दिसंबर 2028 तक सभी केंद्रों में नए कौशल केंद्र बनेंगे। इन्हें इनक्यूबेशन-सह-कौशल केंद्र कहा गया है। इन केंद्रों को कृषि आधारित कारोबारों से जोड़ा जाएगा। तकनीकी साझेदार संस्थानों की मदद भी ली जाएगी। हर जिले की कृषि संभावनाओं का अलग आकलन होगा।

हर कृषि विज्ञान केंद्र के लिए अलग योजना बनाई जाएगी। योजनाएं राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजी जाएंगी। उनसे फंड और क्रियान्वयन में सहयोग मांगा जाएगा। इनक्यूबेशन केंद्र ग्रामीण कारोबार को शुरुआती सहायता दे सकते हैं। किसान उत्पादों की प्रोसेसिंग से जुड़ी जानकारी पा सकेंगे। ग्रामीण युवा कृषि आधारित उद्यम शुरू करना सीख सकेंगे।

कर्मचारियों पर भी चर्चा

बैठक में कृषि विज्ञान केंद्र कर्मचारियों के मुद्दे उठाए गए। वेतन और भत्तों से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा हुई। पदोन्नति संबंधी सुधारों की स्थिति भी देखी गई। इन प्रस्तावों को व्यय विभाग की मंजूरी मिल चुकी है। राज्यों की भूमिका कुछ कर्मचारी लाभों में महत्वपूर्ण रहेगी। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के योगदान पर भी चर्चा हुई।

सेवानिवृत्ति लाभ समय पर देने की जरूरत बताई गई। राज्यों से खाली पद जल्दी भरने को कहा गया। पर्याप्त कर्मचारियों के बिना केंद्रों का काम प्रभावित होता है। सरकार चाहती है कि जरूरी गतिविधियां लगातार चलती रहें। वैज्ञानिक और तकनीकी पदों पर समय से भर्ती जरूरी है। सहायक कर्मचारियों की उपलब्धता भी कामकाज को बेहतर बनाएगी।

दलहन-तिलहन पर काम

दलहन और तिलहन कार्यक्रमों की प्रगति भी समीक्षा में शामिल रही। वर्ष 2026-27 में क्लस्टर फ्रंटलाइन प्रदर्शन चलाए जा रहे हैं। यह कार्यक्रम 24 राज्यों में लागू किया जा रहा है। कार्यक्रम में 353 कृषि विज्ञान केंद्र और जिले शामिल हैं। इसके लिए 12 हजार 349 हेक्टेयर का लक्ष्य है। अभी तक 9 हजार 750 हेक्टेयर क्षेत्र कवर हुआ है।

बैठक में गुणवत्ता वाले बीज समय पर देने पर जोर रहा। किसानों को अनुशंसित किस्में उपलब्ध कराने की बात कही गई। प्रदर्शन कार्यक्रमों में बेहतर विभागीय तालमेल भी जरूरी बताया गया। कुछ राज्यों में फंड पहुंचने में देरी सामने आई है। राज्यों से धन का प्रवाह आसान बनाने को कहा गया। मौसमी कार्यक्रमों के लिए समय पर पैसा मिलना जरूरी है।

धन-धान्य योजना में भूमिका

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना पर भी चर्चा हुई। कृषि विज्ञान केंद्रों की इसमें अहम भूमिका तय की गई है। राज्यों से इन केंद्रों को पर्याप्त फंड देने को कहा गया। केंद्र जिला स्तर की कार्ययोजनाओं को लागू करने में सहयोग करेंगे। स्थानीय फसलों और समस्याओं के अनुसार गतिविधियां तय होंगी। प्रशिक्षण कार्यक्रमों का रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा।

जिला स्तर की गतिविधियां तय पोर्टल पर अपलोड होंगी। इससे काम की निगरानी और समीक्षा आसान बनेगी। कार्यक्रमों के नतीजों का सही आकलन भी हो सकेगा।

किसानों को क्या लाभ मिलेगा

उन्नयन पूरा होने पर केंद्रों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं। किसानों को आधुनिक तकनीक की जानकारी जल्दी मिल सकेगी। बेहतर बीज किस्मों का प्रदर्शन भी बढ़ सकता है। फसल रोगों और कीटों पर समय से सलाह मिल सकेगी। जलवायु से जुड़ी चुनौतियों पर प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। कृषि मशीनों का व्यावहारिक प्रदर्शन भी आसान होगा।

युवाओं के लिए कौशल विकास के अवसर बढ़ सकते हैं। कृषि आधारित कारोबारों को तकनीकी सहायता मिल सकती है। गांवों में रोजगार के नए रास्ते भी खुल सकते हैं। योजना का असर राज्यों के सहयोग पर निर्भर रहेगा। समय पर फंड और भर्ती सबसे बड़ी जरूरत होगी। मार्च 2027 की समयसीमा के लिए तेज काम जरूरी है।

ये भी पढ़ें…

किसान सम्मान निधि की सालाना रकम 10 हजार होने की चर्चा, 24वीं किस्त अक्टूबर में आने की संभावना, जानिए क्या है सच

मोदी सरकार का प्राकृतिक कृषि मिशन, 2030 तक देश के 85 लाख किसानों तक पहुंचेगी प्राकृतिक खेती

कृषि में PhD के लिए ICAR की इंटरनेशनल फेलोशिप, 25 सितंबर अंतिम तारीख, ऐसे करें आवेदन

खरीफ 2026 में सूखे का संकट गहराया, किसान सभा ने राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और 1.2 लाख करोड़ के पैकेज की मांग की

GENERAL newz@gmail.com

Read more