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सितंबर में प्याज के थोक भाव में 30 फीसदी तक उछाल, जानिए आपके राज्य में क्या है रेट

newz@gmail.com | Sep 10, 2026, 13:10 IST

सितंबर 2026 में प्याज के थोक भाव में करीब 30% उछाल आया है। मणिपुर, मेघालय और केरल में भाव सबसे ऊंचे हैं। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी भाव में बड़ा उछाल। किसानों को फायदा मिला, लेकिन ग्राहकों को महंगा प्याज खरीदना पड़ रहा है।

प्याज के भाव

क्यों बढ़े प्याज के दाम

देशभर में इस समय प्याज की कीमतें चर्चा में हैं। राज्यवार थोक मूल्य विश्लेषण के मुताबिक सितंबर 2026 में औसत भाव 4,202.49 रुपए प्रति क्विंटल पहुंच गया। अगस्त में यह भाव 3,235.10 रुपए प्रति क्विंटल था। यानी सिर्फ एक महीने में औसतन 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

MP-राजस्थान का हाल

मध्य प्रदेश में प्याज के दाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। यहां थोक भाव पिछले साल से 338.8 फीसदी बढ़ा है। यह बढ़ोतरी देश के बड़े राज्यों में सबसे ज्यादा में से एक है। राजस्थान में प्याज का मौजूदा थोक भाव 3,200.61 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। दोनों राज्यों के आंकड़े साफ इशारा करते हैं। मध्य भारत में भी प्याज अब महंगा हो चुका है।

और किन राज्यों में महंगा प्याज

देश में सबसे महंगा प्याज इस समय मणिपुर में बिक रहा है। वहां थोक भाव 6,082.30 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। मेघालय में भाव 6,028.85 रुपए प्रति क्विंटल रहा। केरल में प्याज 5,841.77 रुपए प्रति क्विंटल बिका। तमिलनाडु में यह भाव 5,707.81 रुपए प्रति क्विंटल रहा। जम्मू-कश्मीर में प्याज 5,353.20 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। इन पांच राज्यों में प्याज की कीमत सबसे ज्यादा है।

मासिक और सालाना उछाल

मासिक बढ़ोतरी के मामले में गुजरात सबसे आगे रहा। वहां प्याज के दाम में 50.1 फीसदी का उछाल आया। उत्तर प्रदेश में भाव 45.4 फीसदी बढ़ा। पंजाब और महाराष्ट्र में यह बढ़ोतरी 43.3 फीसदी रही। चंडीगढ़ में दाम 44.2 फीसदी उछले। जम्मू-कश्मीर में भी 41.9 फीसदी की तेजी दिखी। इससे साफ है कि उत्तर और पश्चिम भारत में मांग ज्यादा है। सप्लाई इस मांग के मुकाबले कम पड़ रही है।

सालाना आधार पर देखें तो आंकड़े और चौंकाने वाले हैं। आंध्र प्रदेश में भाव पिछले साल से 536.5 फीसदी बढ़े हैं। महाराष्ट्र में दाम 264.2 फीसदी ज्यादा हैं। गुजरात में यह उछाल 257.3 फीसदी दर्ज हुआ। कर्नाटक में भाव 243.3 फीसदी तक बढ़ गए। पिछले साल के मुकाबले प्याज अब काफी महंगा हो चुका है।

यूपी-बिहार में क्या हाल

उत्तर प्रदेश में थोक भाव 2,821.58 रुपए प्रति क्विंटल से शुरू हुआ। महीने भर में यह 45.4 फीसदी बढ़कर मौजूदा स्तर पर पहुंचा। हरियाणा में भाव 3,608.76 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। बिहार में प्याज 4,234.89 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंचा। राजस्थान में यह भाव 3,200.61 रुपए प्रति क्विंटल रहा। इन आंकड़ों से साफ है कि उत्तर भारत में भी दाम बढ़े हैं।

बढ़त की बड़ी वजहें

विशेषज्ञों ने इस उछाल के पीछे कई वजहें बताई हैं। मानसून की बारिश ने फसल को प्रभावित किया है। भंडारण से जुड़ी दिक्कतें भी एक बड़ी वजह हैं। नई फसल की आवक अभी मंडियों में सीमित है। अगर आवक जल्द नहीं बढ़ी तो मुश्किल बढ़ सकती है। आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में भी असर दिख सकता है। ग्राहकों को महंगा प्याज खरीदना पड़ सकता है।

किसानों को मिला फायदा

कीमतों में इस उछाल से किसानों को राहत मिली है। महाराष्ट्र प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भारत दिघोले ने इसे किसानों का फायदा बताया। उनके मुताबिक कई साल बाद ऐसा मौका आया है। इस बार किसानों की जेब में अच्छी कीमत जा रही है। दिघोले ने कहा कि किसान लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। उन्होंने बताया कि इस बार किसानों ने उपज सरकारी एजेंसियों को नहीं बेची।

ये एजेंसियां हैं नेफेड (National Agricultural Cooperative Marketing Federation) और एनसीसीएफ (National Cooperative Consumers Federation)। किसानों को डर था कि सरकार इस स्टॉक से दाम गिरा देगी। इससे किसानों को नुकसान होने का खतरा था। दिघोले के मुताबिक किसानों का यह फैसला सही साबित हुआ। अब उन्हें बाजार में बेहतर दाम मिल रहे हैं।

सरकारी खरीद पर सवाल

हालांकि सरकारी खरीद को लेकर भी कुछ सवाल उठे हैं। दिघोले ने बताया कि सीडब्ल्यूसी (Central Warehousing Corporation) ने इस बार प्याज खरीदा। शुरुआत में अच्छी क्वालिटी का प्याज नहीं मिल पाया। इसके बाद सरकार ने खरीद के नियमों में ढील दी। इससे कम क्वालिटी वाला प्याज भी खरीदा गया। नतीजा यह हुआ कि बाजार में कुछ खराब प्याज भी बिक रहा है। जबकि ग्राहकों को 60 रुपए किलो तक का रेट देना पड़ रहा है।

दिल्ली में बढ़ी मुनाफाखोरी

एक तरफ किसानों को सही दाम मिल रहा है। दूसरी तरफ बिचौलियों की जेब भारी हो रही है। मंडी में प्याज का थोक भाव 30 से 40 रुपए किलो है। लेकिन बाजार में ग्राहक को 60 से 70 रुपए किलो देना पड़ रहा है। यह अंतर खासकर दिल्ली में सबसे ज्यादा देखा जा रहा है।

सस्ता प्याज देना सरकार की जिम्मेदारी

महाराष्ट्र के कृषि पत्रकार संदीप भुजबल ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखी। उनके मुताबिक इतना बड़ा रेट अंतर सिर्फ दिल्ली-एनसीटी (National Capital Territory) इलाके में है। महाराष्ट्र में प्याज का भाव अधिकतम 40 रुपए किलो तक ही है। भुजबल ने कहा कि यह अंतर बाकी राज्यों में नहीं दिखता। उनके मुताबिक दिल्ली सरकार को इस पर निगरानी रखनी चाहिए। सरकार को ग्राहकों तक सस्ता प्याज पहुंचाने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इससे बिचौलियों की मनमानी पर रोक लग सकती है।

आगे क्या होगा असर

फिलहाल प्याज बाजार में स्थिति साफ है। किसानों को कई साल बाद अच्छा दाम मिल रहा है। लेकिन ग्राहकों की जेब पर बोझ बढ़ गया है। बीच में बिचौलिए ज्यादा फायदा उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में मंडियों में आवक बढ़ने की उम्मीद है। इससे कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है। तब तक ग्राहकों को महंगे प्याज से जूझना पड़ सकता है।

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