मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में एक किसान ने नया रास्ता चुना है। किसान ने खेती के साथ खाद्य प्रसंस्करण कारोबार शुरू किया। गैरतगंज निवासी महेश रघुवंशी पहले पारंपरिक खेती करते थे। खेती की बढ़ती लागत से उनकी आय प्रभावित हो रही थी।
मौसम की अनिश्चितता भी उनके लिए बड़ी चुनौती थी। सालभर मेहनत के बाद परिवार चलाना मुश्किल होता था। महेश ने सरकारी योजना की जानकारी जुटाई। इसके बाद उन्होंने आटा प्रसंस्करण इकाई लगाने का निर्णय लिया।
खेती में कम मुनाफा
महेश रघुवंशी के पिता का नाम तुलसीराम रघुवंशी है। उनका परिवार लंबे समय से खेती करता रहा है। महेश के मुताबिक खेती में लागत लगातार बढ़ रही थी। दूसरी तरफ फसल का मुनाफा सीमित रहता था।
खराब मौसम से उत्पादन प्रभावित होने का खतरा भी रहता था। इसलिए उन्होंने अतिरिक्त आय का विकल्प खोजा। महेश ने खेती से जुड़े उत्पाद का कारोबार चुना। इससे उन्हें स्थानीय अनाज और बाजार दोनों का लाभ मिला।
सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना ने खोला रास्ता
महेश को उद्यानिकी कार्यालय से योजना की जानकारी मिली। उन्होंने गैरतगंज विकासखंड के कार्यालय में संपर्क किया। वहां अधिकारी सुरेंद्र रघुवंशी ने उन्हें आवेदन प्रक्रिया समझाई। महेश को जरूरी दस्तावेजों का मार्गदर्शन भी मिला।
उन्होंने पीएमएफएमई (Prime Minister Formalisation of Micro Food Processing Enterprises) योजना में आवेदन किया। इसका हिंदी नाम प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना है। यह योजना सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को आगे बढ़ाती है। इसमें पात्र परियोजनाओं को बैंक ऋण से जुड़ी सहायता मिलती है।
ऋण में 35 प्रतिशत अनुदान भी मिला
महेश ने योजना के तहत आटा उद्योग का प्रस्ताव तैयार किया। उनका ऋण भारतीय स्टेट बैंक से स्वीकृत हुआ। रिपोर्ट के अनुसार उन्हें परियोजना लागत पर 35 प्रतिशत अनुदान मिला। इस सहायता ने शुरुआती निवेश का बोझ कम किया।
अनुदान पूरी परियोजना राशि के बराबर नहीं होता। उद्यमी को अपनी हिस्सेदारी भी लगानी होती है। बैंक परियोजना और भुगतान क्षमता की जांच करता है। इसके बाद ऋण और अनुदान की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। महेश ने आधुनिक मशीनों वाली आटा मिल स्थापित की। उन्होंने इसका नाम वेदांश ओवर सीज फ्लोर मिल रखा।
आटा मिल में रोज 35 क्विंटल उत्पादन
मिल में आटा और दलिया तैयार किया जाता है। आधुनिक मशीनों से उत्पादन क्षमता भी बढ़ी है। महेश के अनुसार इकाई रोज 30 से 35 क्विंटल उत्पादन करती है। उत्पादों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान रखा जाता है।
मिल में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अनाज का उपयोग होता है। इससे किसानों के लिए नया बाजार भी बन सकता है। खाद्य प्रसंस्करण से कच्चे अनाज का मूल्य बढ़ता है। पैकिंग और ब्रांडिंग से बाजार का दायरा भी बढ़ता है।
भोपाल तक पहुंचा बाजार
मिल के उत्पाद गैरतगंज और रायसेन में बेचे जा रहे हैं। उनकी आपूर्ति भोपाल के बाजार तक भी होती है। आसपास के क्षेत्रों में भी उत्पाद पहुंच रहे हैं। इससे इकाई को नियमित ग्राहक मिलने लगे हैं।
महेश की मासिक आय 80 से 90 हजार रुपए बताई गई है। यह आंकड़ा किसान द्वारा साझा जानकारी पर आधारित है। आय कारोबार की मांग और लागत से बदल सकती है। इसलिए इसे सभी इकाइयों का तय लाभ नहीं समझना चाहिए।
स्थानीय लोगों को रोजगार
महेश की इकाई ने स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बनाया है। यहां आठ से दस लोग काम कर रहे हैं। इकाई में उत्पादन और पैकिंग का काम होता है। परिवहन तथा बिक्री के लिए भी लोगों की जरूरत पड़ती है।
इस तरह खेती से जुड़ा कारोबार ग्रामीण रोजगार बढ़ा सकता है। युवाओं को गांव में काम का विकल्प मिल सकता है। स्थानीय उपज का प्रसंस्करण उसी क्षेत्र में हो सकता है। इससे परिवहन लागत घटाने में भी मदद मिलती है।
बजट में 200 करोड़ का प्रावधान
मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष बनाया गया है। सरकार खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा दे रही है। रिपोर्ट के अनुसार बजट में योजना के लिए 200 करोड़ रुपए हैं। यह प्रावधान वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए है।
पिछले वित्तीय वर्ष का अनुमान 169.11 करोड़ रुपए था। नया प्रावधान इससे 18.25 प्रतिशत अधिक बताया गया है। सरकार अधिक किसानों और युवाओं को योजना से जोड़ना चाहती है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी इकाइयां बढ़ाना है।
महेश बने आत्मनिर्भर
महेश रघुवंशी ने योजना को किसानों के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार का आभार जताया। उनके मुताबिक योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने में सहायता दी। वह अब दूसरे लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।
महेश ने युवाओं से प्रसंस्करण इकाइयां लगाने की अपील की। उन्होंने खेती के साथ अतिरिक्त कारोबार अपनाने की सलाह दी। उनका अनुभव बताता है कि सही मार्गदर्शन जरूरी है। मजबूत बाजार योजना के बिना इकाई चलाना कठिन हो सकता है।
आवेदन कहां करें
इच्छुक किसान जिला उद्यानिकी कार्यालय से जानकारी ले सकते हैं। विकासखंड कार्यालय से भी मार्गदर्शन मिल सकता है। आवेदन से पहले कारोबारी योजना तैयार करनी चाहिए। इसमें मशीनें और कच्चा माल शामिल होना चाहिए।
उत्पादन क्षमता और संभावित बाजार भी तय करें। बैंक ऋण की शर्तें लिखित रूप से समझना जरूरी है। किसान केवल अधिकृत पोर्टल और कार्यालय का उपयोग करें। किसी एजेंट को बिना रसीद भुगतान नहीं करना चाहिए।
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