केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि कल्याण पोर्टल लॉन्च किया है। यह पोर्टल पहले से मौजूद व्यवस्था का संशोधित रूप है। इसका मकसद सरकारी योजनाओं की जानकारी सीधे किसान के मोबाइल तक पहुंचाना है। नवरात्र की नवमी पर इसकी शुरुआत की गई। अब छोटी जानकारी के लिए किसानों को सरकारी दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। योजनाएं, सब्सिडी और खेती की जानकारी एक ही जगह मिलेगी।
क्या है कृषि कल्याण पोर्टल
कृषि कल्याण पोर्टल केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का डिजिटल मंच है। यहां योजनाओं, सब्सिडी, नियमों और डिजिटल सेवाओं की जानकारी एक जगह है। किसान को अलग अलग जगह भटकना नहीं पड़ेगा। सरकार चाहती है कि जानकारी मोबाइल पर आसानी से मिले। खासकर छोटे सवालों के लिए दफ्तर जाने की जरूरत घटेगी।
पात्रता जांचें और ऑनलाइन आवेदन करें
इस पोर्टल पर किसान अपनी पात्रता जांच सकते हैं। यानी वे देख सकते हैं कि योजना का फायदा मिलेगा या नहीं। पात्र होने पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी बताई गई है। आवेदन से जुड़ी जानकारी भी पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी। इससे किसान को यह समझने में आसानी होगी कि आगे क्या करना है।
तीन बड़ी योजनाओं से जुड़ाव
यह पोर्टल तीन योजनाओं तक पहुंचने का साझा मंच भी है। ये हैं पीएम किसान, एग्रीस्टैक (AgriStack) और पीएम फसल बीमा योजना। अब इन योजनाओं की जानकारी तक पहुंच एक ही जगह से हो सकेगी। ये तीनों योजनाएं किसानों से सीधे जुड़ी हैं। पोर्टल इन तक पहुंचने का रास्ता आसान बनाता है।
डीबीटी से सीधे खाते में लाभ
पोर्टल पर डीबीटी (Direct Benefit Transfer) का भी जिक्र है। इसके तहत सब्सिडी और मदद सीधे बैंक खाते में पहुंचती है। इसका मकसद बिचौलियों की भूमिका घटाना है। साथ ही पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। इस व्यवस्था से बीच की कड़ियां कम करने की बात कही गई है।
खेती की जानकारी भी एक जगह
पोर्टल सिर्फ योजनाओं तक सीमित नहीं है। यहां खेती से जुड़ी कई जरूरी जानकारियां भी मिलेंगी। इनमें मौसम की जानकारी शामिल है। आधुनिक खेती की तकनीकों की जानकारी भी दी जाएगी।
बीज और खाद की उपलब्धता की जानकारी भी इसका हिस्सा बताई गई है। साथ ही मंडी में फसलों के भाव भी देखे जा सकेंगे। इससे किसान बुआई और बिक्री के फैसले बेहतर ले सकते हैं।
कम इंटरनेट में भी चलेगा
पोर्टल को हल्का और आसान बनाया गया है। यह साधारण स्मार्टफोन पर चल सकता है। कमजोर इंटरनेट में भी इसका इस्तेमाल हो सकेगा। यह पोर्टल मोबाइल फ्रेंडली है। दिव्यांग लोग भी इसका इस्तेमाल कर सकें, इसका ध्यान रखा गया है। दृष्टिबाधित लोग स्क्रीन रीडर की मदद से इसे इस्तेमाल कर सकेंगे।
मंत्री ने अधिकारियों को क्या कहा
चौहान ने अधिकारियों को कुछ जरूरी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर जानकारी सही रखी जाए। उसे समय पर अपडेट भी किया जाए। उन्होंने भाषा और प्रक्रिया को सरल रखने को भी कहा। मकसद है कि कम पढ़े लिखे छोटे और सीमांत किसान भी इसे चला सकें।
केवीके से मिलेगा प्रशिक्षण
किसानों को डिजिटल इस्तेमाल सिखाने के लिए प्रशिक्षण अभियान भी प्रस्तावित है। ये अभियान कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के जरिए चलाए जाएंगे। इससे किसान पोर्टल को चलाना सीख सकेंगे।
यह पोर्टल सिर्फ किसानों के लिए नहीं है। इसका इस्तेमाल किसान उत्पादक संगठन (FPO) भी कर सकेंगे। प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS) भी इससे जुड़ सकती हैं।
कृषि वैज्ञानिक और शोधकर्ता भी इसके उपयोगकर्ता बताए गए हैं। एग्री स्टार्टअप को भी इसमें जगह दी गई है। यानी यह पूरे कृषि तंत्र के लिए साझा मंच बनाने की कोशिश है।
किसानों के लिए क्या मायने
अगर पोर्टल सही तरह काम करता है, तो किसानों का समय बच सकता है। योजनाओं की जानकारी के लिए भटकना कम हो सकता है। मोबाइल पर जानकारी मिलने से छोटे किसानों को भी सुविधा होगी। हालांकि असली परीक्षा जमीन पर होगी। पोर्टल की जानकारी कितनी सही और ताजा रहती है, यह अहम रहेगा। प्रशिक्षण अभियान कितनी तेजी से चलते हैं, इस पर भी नजर रहेगी।
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