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BIRC 2026: कोविंद ने बताया विकास का रास्ता, बेहतर बीज, प्रोसेसिंग और बाजार से बढ़ेगी किसानों की कमाई

newz@gmail.com | Oct 24, 2026, 17:13 IST

भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन 2026 में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने बेहतर बीज, वैज्ञानिक भंडारण, आधुनिक प्रोसेसिंग, टिकाऊ खेती और बाजार से सीधे जुड़ाव को जरूरी बताया।

BIRC 2026

BIRC 2026 में किसानों की आय पर जोर

भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चावल क्षेत्र के विकास पर अहम बात कही। उन्होंने कहा कि केवल चावल का उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। किसानों की आमदनी बढ़ना भी इस विकास का हिस्सा होना चाहिए। चावल उद्योग की तरक्की का लाभ गांवों तक पहुंचना जरूरी है।

यह बात भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (Bharat International Rice Conference) 2026 को संबोधित करते हुए कही गई। सम्मेलन में चावल उत्पादन, कारोबार और निर्यात से जुड़े मुद्दे चर्चा में रहे। कोविंद ने किसानों को बाजार से बेहतर तरीके से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने खेती में टिकाऊ तरीकों और उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने की जरूरत भी बताई।

उनके अनुसार, भारत को सिर्फ उत्पादन और निर्यात तक सीमित नहीं रहना चाहिए। चावल की गुणवत्ता, पर्यावरण संरक्षण और नई तकनीक पर भी काम करना होगा। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के अवसर बन सकते हैं। इसका लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मिल सकता है।

खेत से बाजार तक मजबूत व्यवस्था

कोविंद ने चावल की पूरी आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने की बात कही। इसमें बीज से लेकर बाजार तक के सभी चरण शामिल हैं। अच्छी गुणवत्ता वाले बीज इस प्रक्रिया की पहली जरूरत हैं। खेती के बेहतर तरीके भी उत्पादन और गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकते हैं।

कटाई के बाद फसल को सही तरीके से संभालना भी महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिक भंडारण से उपज को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है। बेहतर परिवहन व्यवस्था से चावल को बाजार तक पहुंचाना आसान होता है। इन सभी चरणों में सुधार से नुकसान घटाने के अवसर बनते हैं।

कोविंद ने चावल की मिलिंग और गुणवत्ता जांच में सुधार पर भी जोर दिया। पैकेजिंग और प्रसंस्करण बेहतर होने से उत्पाद का मूल्य बढ़ सकता है। भरोसेमंद आपूर्ति व्यवस्था कारोबारियों का विश्वास मजबूत कर सकती है। बेहतर ब्रांडिंग से भारतीय चावल को विदेशी बाजारों में पहचान मिल सकती है।

किसानों को बेहतर दाम कैसे मिलेंगे

कोविंद ने किसानों को कृषि बदलाव के केंद्र में रखने की जरूरत बताई। उन्होंने किसानों और कारोबारियों के बीच लंबे समय की साझेदारी पर जोर दिया। ऐसी साझेदारी से उपज की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है। बाजार के जोखिम कम करने में भी यह उपयोगी हो सकती है।

किसानों को समय पर बाजार की जानकारी मिलना जरूरी है। इससे वे अपनी उपज बेचने के फैसले बेहतर तरीके से ले सकते हैं। नई तकनीक और सही कृषि सलाह भी उनकी मदद कर सकती है। वैज्ञानिक भंडारण से फसल को सुरक्षित रखने के विकल्प बढ़ सकते हैं।

किसानों को बेहतर दाम दिलाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। बाजार की मांग और गुणवत्ता के मानकों को समझना भी जरूरी है। कारोबारियों के साथ बेहतर तालमेल से बिक्री के अवसर बढ़ सकते हैं। हालांकि, वास्तविक लाभ स्थानीय बाजार और उपज की गुणवत्ता पर निर्भर करेगा।

उत्पादन के साथ पानी और मिट्टी बचाएं

कोविंद ने खेती में प्राकृतिक संसाधनों को बचाने पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, उत्पादन बढ़ाते समय मिट्टी की सेहत का ध्यान रखना चाहिए। जल संसाधनों का सही उपयोग भी जरूरी है। जलवायु परिवर्तन खेती के सामने नई चुनौतियां पैदा कर रहा है।

इसलिए खेती, प्रसंस्करण और कृषि कारोबार के तरीकों में बदलाव जरूरी है। कम पानी में बेहतर उत्पादन हासिल करने के उपाय अपनाने चाहिए। आधुनिक तकनीक छोटे किसानों तक भी पहुंचनी चाहिए। छोटे कारोबारियों को भी ऐसी तकनीक का लाभ मिलना चाहिए।

इसके लिए शोध, निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को अहम बताया गया। स्थानीय जरूरतों के अनुसार सस्ते और उपयोगी समाधान विकसित करना जरूरी है। ऐसी तकनीक किसानों की लागत और संसाधनों पर दबाव घटाने में मदद कर सकती है। हालांकि, हर तकनीक की उपयोगिता क्षेत्र और फसल के अनुसार अलग हो सकती है।

खाद्य सुरक्षा का व्यापक अर्थ

कोविंद ने खाद्य सुरक्षा को केवल अनाज उत्पादन तक सीमित नहीं माना। उनके अनुसार, लोगों को भोजन उचित कीमत पर मिलना भी जरूरी है। भोजन की उपलब्धता और पोषण भी इसके अहम हिस्से हैं। इस पूरी व्यवस्था में किसानों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

देश में पर्याप्त उत्पादन होने के बावजूद सभी लोगों तक भोजन पहुंचना जरूरी है। इसके लिए आपूर्ति व्यवस्था और बाजार तक पहुंच बेहतर होनी चाहिए। भंडारण और परिवहन में सुधार से भी मदद मिल सकती है। किसानों की आय बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा मिल सकता है।

खाद्य सुरक्षा के लिए टिकाऊ खेती भी जरूरी है। पानी और मिट्टी पर लगातार बढ़ते दबाव को समझना होगा। खेती के ऐसे तरीके अपनाने होंगे, जो लंबे समय तक उपयोगी रहें। इससे उत्पादन और प्राकृतिक संसाधनों के बीच संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है।

विकसित भारत 2047 की तीन प्राथमिकताएं

कोविंद ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का भी जिक्र किया। उन्होंने चावल क्षेत्र के लिए तीन प्रमुख प्राथमिकताएं बताईं। पहली प्राथमिकता किसानों को बाजार से बेहतर तरीके से जोड़ना है। इससे उन्हें अपनी उपज का उचित दाम दिलाने के अवसर बन सकते हैं।

दूसरी प्राथमिकता नई तकनीक और शोध में निवेश बढ़ाना है। इससे उत्पादकता और चावल की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है। शोध से प्राकृतिक संसाधनों को बचाने वाले उपाय भी विकसित किए जा सकते हैं। इन प्रयासों का लाभ छोटे किसानों तक पहुंचाना जरूरी है।

तीसरी प्राथमिकता पारदर्शी अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था को मजबूत करना है। कोविंद ने भरोसे और आपसी लाभ पर आधारित कारोबार की जरूरत बताई। पारदर्शिता से व्यापारिक साझेदारियों को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। इससे भारतीय चावल के लिए अंतरराष्ट्रीय अवसर बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है।

चावल कारोबार में सहयोग जरूरी

कोविंद ने भारत चावल निर्यातक महासंघ (Indian Rice Exporters Federation) को सम्मेलन आयोजित करने की बधाई दी। उन्होंने सम्मेलन में हुई चर्चाओं से सकारात्मक नतीजे निकलने की उम्मीद जताई। उनके अनुसार, किसानों, कारोबारियों और दूसरे पक्षों के बीच सहयोग जरूरी है।

चावल क्षेत्र में किसानों के अलावा मिलों और निर्यातकों की भी अहम भूमिका है। शोधकर्ता नई तकनीक और बेहतर उत्पादन तरीकों पर काम करते हैं। कारोबारियों को बाजार की मांग और गुणवत्ता के मानकों की जानकारी रहती है। इन सभी पक्षों के बीच तालमेल से पूरी व्यवस्था मजबूत हो सकती है।

सम्मेलन का उद्देश्य चावल क्षेत्र से जुड़े लोगों को साझा मंच देना भी है। यहां उत्पादन, गुणवत्ता, तकनीक और कारोबार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती है। ऐसी चर्चाएं नई साझेदारियों के अवसर बना सकती हैं। हालांकि, किसी सुझाव का वास्तविक लाभ उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

चावल उद्योग के सामने अगली चुनौती

भारत के चावल क्षेत्र के सामने अब उत्पादन के साथ मूल्य बढ़ाने की चुनौती है। बेहतर गुणवत्ता और प्रसंस्करण से अधिक अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके लिए खेत से बाजार तक पूरी व्यवस्था पर ध्यान देना होगा। किसानों को इस बदलाव का वास्तविक लाभ मिलना भी जरूरी है।

वैज्ञानिक भंडारण, बेहतर पैकेजिंग और भरोसेमंद बाजार व्यवस्था इस दिशा में मदद कर सकती है। पानी और मिट्टी का संरक्षण भी लंबे समय की जरूरत है। नई तकनीक छोटे किसानों के लिए उपयोगी और सस्ती होनी चाहिए। इससे विकास का लाभ अधिक लोगों तक पहुंच सकता है।

रामनाथ कोविंद का संदेश इसी व्यापक सोच पर केंद्रित रहा। चावल क्षेत्र की सफलता केवल उत्पादन या निर्यात के आंकड़ों से नहीं मापी जानी चाहिए। किसानों की आमदनी और गांवों में पैदा होने वाले अवसर भी महत्वपूर्ण हैं। टिकाऊ खेती और पारदर्शी कारोबार इस लक्ष्य की दिशा में अहम कदम हो सकते हैं।

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