किसान की बात,सूत्र के साथ

यूपी में गन्ने का भाव 600 रुपए से ज्यादा करने की मांग, आंदोलन की तैयारी में किसान नेता राकेश टिकैत

newz@gmail.com | Oct 24, 2026, 17:54 IST

राकेश टिकैत ने उत्तर प्रदेश में गन्ने का भाव 600 रुपए प्रति क्विंटल से ज्यादा करने की मांग की। उन्होंने किसानों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन तेज करने, बकाया भुगतान और धान की उचित कीमत सुनिश्चित कराने की अपील की।

गन्ना भाव

गन्ने के दाम बढ़ाने की मांग

उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के उचित दाम की मांग तेज हो गई है। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने आवाज उठाई। उन्होंने राज्य सरकार से गन्ने का भाव बढ़ाने की मांग की। टिकैत के मुताबिक, किसानों को 600 रुपए प्रति क्विंटल से ज्यादा मिलने चाहिए।

लखनऊ के डालीबाग स्थित गन्ना संस्थान में किसान मजदूर पंचायत आयोजित हुई। टिकैत ने पंचायत को संबोधित किया। उन्होंने किसानों से अपनी मांगों के लिए एकजुट होने की अपील की। साथ ही शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन तेज करने को कहा।

टिकैत ने सवाल उठाया कि चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं। फिर गन्ने के दाम क्यों नहीं बढ़ाए जा रहे? उनका कहना था कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में किसानों को बेहतर कीमत मिलनी चाहिए।

उनकी मांग केवल गन्ने के भाव तक सीमित नहीं रही। पंचायत में बकाया भुगतान, धान खरीद और भूमि मुआवजे पर भी चर्चा हुई। टिकैत ने किसानों से अपनी मांगें अधिकारियों के सामने लिखित रूप में रखने को कहा।

600 रुपए प्रति क्विंटल की मांग

राकेश टिकैत ने गन्ने का भाव 600 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि खेती की लागत बढ़ने से किसानों पर दबाव बढ़ा है। खाद, बीज, डीजल और दूसरे कृषि खर्चों का असर खेती पर पड़ता है। ऐसे में फसल का उचित दाम मिलना जरूरी है।

टिकैत ने पिछली सरकारों के दौरान हुई बढ़ोतरी का भी जिक्र किया। उन्होंने गन्ने के भाव में 40 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी का हवाला दिया। उन्होंने सवाल किया कि मौजूदा सरकार किसानों को राहत क्यों नहीं दे सकती।

उन्होंने किसानों से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की अपील की। उनके मुताबिक, मांगों को लेकर लगातार आवाज उठाना जरूरी है। किसानों को अपनी शिकायतें और मांगें संबंधित अधिकारियों को लिखित रूप में देनी चाहिए। इससे उनकी मांगों को औपचारिक रूप से दर्ज कराया जा सकता है।

फिलहाल, यह टिकैत और किसान संगठन की मांग है। खबर में सरकार द्वारा नई कीमत घोषित किए जाने की जानकारी नहीं है। इसलिए 600 रुपए से ज्यादा का भाव अभी मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

किसानों की एकजुटता पर जोर

टिकैत ने अलग-अलग फसल उगाने वाले किसानों को साथ आने की सलाह दी। उन्होंने गन्ना, धान, आलू और मक्का उत्पादकों का जिक्र किया। उनके अनुसार, किसानों को अपने मुद्दे मिलकर उठाने चाहिए। अलग-अलग रहने से उनकी मांगों की ताकत कमजोर हो सकती है।

कृषि में हर फसल की लागत और बाजार की स्थिति अलग होती है। फिर भी उचित दाम और समय पर भुगतान कई किसानों की साझा चिंता है। किसान संगठन इन्हीं मुद्दों पर सामूहिक आवाज उठाने की कोशिश कर रहे हैं। पंचायत में भी इस एकजुटता पर जोर दिया गया।

धान की खरीद पर सवाल

किसान मजदूर पंचायत में धान की खरीद का मुद्दा भी उठा। टिकैत ने आरोप लगाया कि किसानों को अपेक्षित कीमत नहीं मिल रही। उनके मुताबिक, कुछ किसानों को करीब 1,000 रुपए प्रति क्विंटल कम भाव पर धान बेचना पड़ रहा है।

उन्होंने सरकार से धान की खरीद समय पर कराने की मांग की। किसानों को उपज का भुगतान भी जल्द मिलना चाहिए। समय पर खरीद और भुगतान से किसानों की आर्थिक जरूरतें पूरी करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, धान के भाव को लेकर लगाया गया आरोप टिकैत का बयान है।

धान बेचने में देरी होने पर किसानों को भंडारण और खर्च की समस्या हो सकती है। कुछ किसानों को अगली फसल की तैयारी भी करनी होती है। ऐसे में भुगतान का समय पर मिलना अहम रहता है। पंचायत में इन चिंताओं को भी उठाया गया।

गन्ने का बकाया भुगतान

गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा भी प्रमुख रहा। टिकैत ने चीनी मिलों से लंबित राशि चुकाने की मांग की। उन्होंने बजाज समूह की मिलों सहित अन्य मिलों का जिक्र किया। उन्होंने सिम्भावली चीनी मिल में भी किसानों का पैसा बकाया होने की बात कही।

गन्ना बेचने के बाद भुगतान में देरी होने से किसानों की नकदी प्रभावित हो सकती है। खेती के अगले चक्र के लिए उन्हें बीज, खाद और अन्य सामान खरीदना पड़ता है। घर के खर्च भी इसी आमदनी पर निर्भर हो सकते हैं। इसलिए बकाया भुगतान किसानों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है।

टिकैत ने बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा चलाने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी मिलों को नए मालिकों को सौंपने की व्यवस्था हो सकती है। इससे मिलों का संचालन फिर शुरू करने में मदद मिल सकती है। उनके सुझाव का उद्देश्य किसानों के बकाया भुगतान का रास्ता निकालना है।

हालांकि, पंचायत में उठाई गई मांगों और सरकारी फैसलों में अंतर है। बकाया राशि के निपटारे या मिलों के हस्तांतरण पर कोई नया आदेश यहां घोषित नहीं हुआ। इन मुद्दों पर आगे की कार्रवाई संबंधित पक्षों के फैसलों पर निर्भर करेगी।

जमीन मुआवजे की मांग

पंचायत में भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों का मुद्दा भी उठा। टिकैत ने उचित मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि जहां किसानों को कम मुआवजा मिला है, वहां दरों की समीक्षा होनी चाहिए।

उन्होंने 2013 के भूमि अधिग्रहण नियमों के आधार पर मुआवजा देने की बात कही। जमीन अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजा बड़ा सवाल होता है। उचित मुआवजे से वे अपनी जमीन के नुकसान की भरपाई कर सकते हैं। इसलिए दरों की समीक्षा की मांग महत्वपूर्ण है।

टिकैत ने किसानों के धरना-प्रदर्शन के लिए जगह मिलने में आ रही दिक्कतों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने किसानों को अपनी आवाज उठाने के अवसर मिलने की जरूरत बताई।

बिजली और किसानों के मुद्दे

टिकैत ने बिजली विभाग की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का समर्थन किया। उन्होंने बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर चिंता जताई। उनके अनुसार, इससे किसानों और दूसरे उपभोक्ताओं पर असर पड़ सकता है।

बिजली खेती के लिए जरूरी संसाधनों में शामिल है। सिंचाई और कृषि कार्यों में बिजली की उपलब्धता महत्वपूर्ण रहती है। इसलिए बिजली से जुड़े फैसलों पर किसानों की भी नजर रहती है। हालांकि, निजीकरण के असर को लेकर टिकैत ने आशंका जताई है, कोई निश्चित परिणाम नहीं बताया।

ये भी पढ़ें…

कर्नाटक के गन्ना किसानों ने रोका हुबली मार्च, सरकार को 26 नवंबर तक का समय दिया

गन्ना किसानों की शिकायतों पर केंद्र ने रमेश चंद की अध्यक्षता में बनाई उच्चस्तरीय समिति, दाम और तौल की होगी जांच

गन्ने के भाव को लेकर वार्ता बेनतीजा, किसानों का महाराष्ट्र और कर्नाटक में हाईवे रोको आंदोलन

महाराष्ट्र सरकार ने दी मामूली मदद, नाराज किसान ने सीएम को भेजा 5,000 रुपए का मनीऑर्डर और साड़ी

GENERAL newz@gmail.com

Read more