किसान की बात,सूत्र के साथ

नकली कीटनाशकों पर लगाम के लिए सरकार का प्लान तैयार, AI बताएगा किसानों को सही दवा, समय और मात्रा

newz@gmail.com | Sep 24, 2026, 12:45 IST

कृषि मंत्रालय के अधिकारी डॉ. सुभाष चंद के मुताबिक IPMS नकली कीटनाशकों की समस्या खत्म कर सकता है। उन्होंने उद्योग से किसानों के लिए AI टूल बनाने की अपील की। यह टूल कीट पहचानने और सही कीटनाशक चुनने में मदद करेगा।

नकली कीटनाशक

देश में बिकने वाली नकली कीटनाशक दवाओं पर सरकार का प्लान सामने आया है। कृषि मंत्रालय में CIB&RC (Central Insecticides Board and Registration Committee) सचिव डॉ. सुभाष चंद ने इस पर जानकारी दी। उनके मुताबिक एक खास सिस्टम इस समस्या में बड़ी मदद कर सकता है। इसका नाम है IPMS (Integrated Pest Management System) यानी समेकित कीट प्रबंधन प्रणाली। यह सिस्टम नकली कीटनाशकों की समस्या खत्म कर सकता है। उन्होंने उद्योग जगत से किसानों के लिए AI टूल बनाने की अपील भी की। यह टूल किसानों को कीट पहचानने और सही कीटनाशक चुनने में मदद करेगा।

डॉ. सुभाष चंद ने यह बात नई दिल्ली में कही। यह मौका क्रॉपलाइफ इंडिया के राष्ट्रीय सम्मेलन का था। सम्मेलन का विषय था, एआई फॉर एग्रीकल्चर ट्रांसफॉर्मेशन। इसमें कृषि और तकनीक क्षेत्र के कई बड़े विशेषज्ञ शामिल हुए।

नकली कीटनाशकों पर लगेगी लगाम

डॉ. चंद के मुताबिक राष्ट्रीय IPMS डेटाबेस में डीलर नेटवर्क की पूरी जानकारी है। इस नेटवर्क के जरिए कीटनाशक उत्पादों की जांच और ट्रैकिंग की जा सकती है। उनका कहना है कि यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होने पर फायदा होगा। इससे नकली कीटनाशकों को किसानों तक पहुंचने से रोका जा सकता है। उनके मुताबिक यह सिस्टम कीटनाशकों की प्रामाणिकता की गारंटी दे सकता है।

किसानों के लिए AI ऐप की अपील

डॉ. सुभाष चंद ने फसल सुरक्षा उद्योग से एक खास अपील भी की। उन्होंने एक AI आधारित टूल या मोबाइल ऐप बनाने को कहा। इस ऐप से किसान खेत में कीटों की पहचान आसानी से कर सकेंगे। साथ ही किसान यह भी जान सकेंगे कि कौन सा कीटनाशक सही है। ऐप उन्हें सही समय और सही मात्रा की जानकारी भी देगा। उनके मुताबिक इससे किसान वैज्ञानिक तरीके से फसल सुरक्षा अपना सकेंगे। यह तकनीक जिम्मेदारी के साथ कीटनाशक इस्तेमाल करने में भी मदद करेगी।

उद्योगों ने भी जताई AI अहमियत

सम्मेलन में उद्योग जगत के कई बड़े अधिकारियों ने भी अपनी राय रखी। क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन के अंकुर अग्रवाल के मुताबिक आने वाले समय में नवाचार बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि रोबोटिक्स भी खेती में अहम भूमिका निभा सकती है। रैलिस इंडिया के एमडी डॉ. ज्ञानेंद्र शुक्ला ने डिजिटल तकनीक पर जोर दिया। उनके मुताबिक AI उद्योग के अगले विकास को परिभाषित कर सकता है। बायर क्रॉपसाइंस के मोहन बाबू ने भी अहम बात कही। उनके मुताबिक फसल सुरक्षा अब सिर्फ केमिकल तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें AI, बेहतर बीज और जीन एडिटिंग भी शामिल होंगे।

जलवायु से बढ़ेगी खेती की चुनौती

BASF एग्रीकल्चरल सॉल्यूशंस के गिरिधर रनुवा ने जलवायु परिवर्तन का मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक आने वाले समय में परिणाम आधारित खेती जरूरी हो जाएगी। धानुका एग्रीटेक के राहुल धानुका ने भारतीय AI समाधानों पर भरोसा जताया। उनके मुताबिक यह तकनीक मशीनों की पहुंच बढ़ाने में मदद कर सकती है।

2050 तक घटेगी खेती की जमीन

सम्मेलन में क्रॉपलाइफ इंडिया और यस बैंक की एक रिपोर्ट भी जारी हुई। रिपोर्ट के मुताबिक शहरीकरण से जमीन के इस्तेमाल में बदलाव हो रहा है। इस वजह से 2050 तक बोया क्षेत्र 10 प्रतिशत तक घट सकता है। ऐसे में कम जमीन से ज्यादा उत्पादन लेना जरूरी हो जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार कीट और बीमारियों से हर साल बड़ा नुकसान होता है। यह नुकसान करीब 2 लाख करोड़ रुपए की कृषि उपज के बराबर है। जलवायु परिवर्तन से आगे यह चुनौती और बढ़ सकती है।

नीतिगत सुधार की भी उठी मांग

रिपोर्ट में फसल सुरक्षा क्षेत्र में कई सुधारों की जरूरत बताई गई है। इसमें डिजिटलीकरण बढ़ाने पर खास जोर दिया गया है। किसानों तक कृषि विस्तार सेवाओं की पहुंच मजबूत करने की भी बात हुई। घरेलू रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ावा देने की सिफारिश भी की गई। रिपोर्ट में सभी राज्यों में एक जैसे लाइसेंस सिस्टम की मांग भी शामिल है। इसे वन नेशन, वन लाइसेंस व्यवस्था का नाम दिया गया है। इसमें RDP (Regulatory Data Protection) यानी डेटा संरक्षण की भी मांग हुई। नए उत्पादों को पांच साल तक यह संरक्षण मिलना चाहिए।

सैटेलाइट-ड्रोन से भी निगरानी

सम्मेलन में कई तकनीकी कंपनियों ने अपने काम की जानकारी दी। आईबीएम रिसर्च इंडिया के अमित सिंघी ने पृथ्वी AI मॉडल के बारे में बताया। यह मॉडल सैटेलाइट तस्वीरों से फसलों की मैपिंग करता है। इससे फसल बीमा और पैदावार के अनुमान में मदद मिलती है। माइक्रोसॉफ्ट की सपना नौहरिया ने कंपनी के एक प्रोजेक्ट का जिक्र किया। यह प्रोजेक्ट बारामती में किसानों को कीट अलर्ट देने पर काम कर रहा है। कंपनी इसे अब दूसरे राज्यों तक भी ले जाना चाहती है।

खेती में बदल रहा तकनीक दायरा

महिंद्रा एंड महिंद्रा की रुचा नानावटी ने भी कंपनी की योजना साझा की। उनके मुताबिक कंपनी का ध्यान अब सिर्फ ट्रैक्टर तक सीमित नहीं है। कंपनी खेती के पूरे चक्र के लिए स्मार्ट सलाह वाले समाधान बना रही है। सैटश्योर एनालिटिक्स की अश्वथी नांबियार ने सैटेलाइट डेटा से जोखिम अनुमान पर बात की। जनरल एयरोनॉटिक्स के अभिषेक बर्मन ने AI और ड्रोन इमेजिंग का जिक्र किया। उनके मुताबिक इससे कृषि इनपुट का इस्तेमाल ज्यादा असरदार हो सकता है।

किसानों तक पहुंचना बड़ी चुनौती

सम्मेलन में शामिल विशेषज्ञों का एक जैसा नजरिया सामने आया। सभी ने AI, सैटेलाइट, ड्रोन और ट्रैक-एंड-ट्रेस सिस्टम को अहम बताया। इनसे खेती और फसल सुरक्षा के तरीकों में बड़ा बदलाव आ सकता है। लेकिन असली चुनौती किसानों तक इन तकनीकों को पहुंचाना है। यह तकनीक तभी सफल होगी जब आसान और सस्ती बनाई जाएगी। इसके साथ किसानों का भरोसा जीतना भी उतना ही जरूरी होगा।

ये भी पढ़ें…

चीनी MSP पर बोले गडकरी: सरकार दाम तय नहीं कर सकती, कीमत बाजार तय करेगा

हरियाणा में धान खरीद को लेकर किसानों का प्रदर्शन, हाईवे जाम किया, पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले

त्योहारी सीजन से पहले चीनी स्टॉक सीमा दोगुनी, गन्ना किसानों को भुगतान की उम्मीदें बढ़ीं

UPI से खाद-बीज पेमेंट पर पांच रुपए MDR, किसानों पर नहीं होगा सीधा बोझ, जानें 2,000 रुपए से ऊपर भुगतान के नए नियम

GENERAL newz@gmail.com

Read more