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पारंपरिक अनाज छोड़ जबलपुर के किसान ने उगाए शिमला मिर्च, बैंगन, टमाटर; 12 एकड़ से कमा रहे दो लाख रुपया महीना

newz@gmail.com | Sep 21, 2026, 13:03 IST

जबलपुर के बघराजी गांव के किसान सुरेश कुशवाहा ने अनाज छोड़कर शिमला मिर्च, बैंगन और टमाटर की खेती अपनाई। रिपोर्ट के मुताबिक 12 एकड़ से उनकी मासिक आमदनी करीब 2 लाख रुपए हो गई है। आसपास के किसान भी प्रेरित हैं।

सब्जी की खेती

अनाज की खेती में साल में एक या दो बार ही आमदनी होती है। जबलपुर के एक किसान ने इसी चक्र को बदल दिया। बघराजी गांव के सुरेश कुशवाहा ने अनाज की जगह सब्जी की खेती अपनाई। यह जानकारी एक क्षेत्रीय हिंदी अखबार की 17 सितंबर की रिपोर्ट पर आधारित है। रिपोर्ट के मुताबिक उनकी मासिक आमदनी करीब 2 लाख रुपए तक पहुंच गई है।

आंकड़ों की अब तक किसी दूसरे स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें फिलहाल एक स्रोत से मिली ताजा जानकारी की तरह देखें। फिर भी यह कहानी किसानों के लिए कई सवालों के जवाब देती है। सब्जी की खेती में मुनाफा कैसे बढ़ता है, और जोखिम कहां रहता है।

15 लाख रुपए का शुरुआती निवेश

सुरेश के पास कुल 12 एकड़ जमीन है। उन्होंने इसमें से 6 एकड़ में शिमला मिर्च लगाई। 4 एकड़ में बैंगन और 2 एकड़ में टमाटर की खेती शुरू की। इस तरह तीन अलग सब्जियों में जमीन बांटी गई।

शुरुआत में उन्होंने खेती में करीब 15 लाख रुपए का निवेश किया। इसमें सिंचाई की व्यवस्था और खेत की तैयारी का खर्च शामिल था। अनाज की खेती में साल में एक या दो बार ही आमदनी होती थी। सब्जी में हर कुछ दिन पर उपज बिकती है। इससे उन्हें लगातार नकदी मिलने लगी।

हर चार दिन में तुड़ाई

उनके खेत से हर चार दिन में करीब 600 किलो टमाटर निकलता है। बैंगन और शिमला मिर्च मिलाकर करीब 25 क्विंटल उत्पादन मिल रहा है। इसी वजह से मासिक आमदनी करीब 2 लाख रुपए तक पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक यह अनाज की खेती की आमदनी से कहीं ज्यादा है।

सुरेश की खेती का मंत्र

सुरेश का कहना है कि सही फसल प्रबंधन से सब्जियां बेहतर उत्पादन देती हैं। वे समय पर सिंचाई, खाद और कीट प्रबंधन पर जोर देते हैं। उनका कहना है कि इससे जोखिम कम और मुनाफा ज्यादा रहता है। साथ ही वे मानते हैं कि इसमें मेहनत और निगरानी ज्यादा चाहिए। बदले में मुनाफा भी उतना ही बेहतर मिलता है।

सुरेश की सफलता से आसपास के गांवों के किसान प्रेरित हो रहे हैं। वे भी सब्जी की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। कई किसान सीधे उनसे मिलकर शिमला मिर्च और बैंगन की खेती सीख रहे हैं। स्थानीय मंडी में सब्जियों की मांग लगातार बनी रहती है। इसलिए उपज बेचने में ज्यादा दिक्कत नहीं आती। बिचौलियों पर निर्भरता भी पहले से कम हुई है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

विशेषज्ञ कहते हैं कि सब्जी की खेती अनाज से ज्यादा मुनाफा दे सकती है। लेकिन इसमें समय पर सिंचाई, कीट-रोग नियंत्रण और तुड़ाई जरूरी है। यह काम लगातार करना पड़ता है।

शुरुआत में मिट्टी जांच, उन्नत बीज और सिंचाई के साधनों में निवेश चाहिए। इसका असर एक-दो सीजन के बाद ही पूरी तरह दिखता है। जबलपुर के आसपास के कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को तकनीकी जानकारी दे रहे हैं।

तीन फसलें, कम जोखिम

सुरेश तीन अलग-अलग सब्जियां उगाते हैं। किसी एक फसल का भाव गिरे तो बाकी दो से आमदनी बनी रहती है। विशेषज्ञ ऐसी विविधता वाली खेती को जोखिम घटाने का अच्छा तरीका मानते हैं। यह उन किसानों के लिए खास है जो पहली बार सब्जी उगा रहे हैं।

अनाज बनाम सब्जी का फर्क

अनाज की खेती में उपज साल में एक-दो बार बिकती है। सब्जी की उपज हर कुछ दिन पर बिक सकती है। इसलिए खर्च चलाने के लिए नकदी लगातार मिलती रहती है।

खेती में खर्च साल भर चलते रहते हैं। बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी का पैसा समय पर देना पड़ता है। ऐसे में हर कुछ दिन की कमाई किसान को राहत देती है। सुरेश के मामले में भी यही बात सामने आई है।

किसान क्या सावधानी रखें

सब्जी की खेती शुरू करने से पहले सिंचाई का साधन देख लें। खेत की मिट्टी की जांच कराना भी जरूरी है। उन्नत बीज और खाद-कीट प्रबंधन की योजना पहले बनाएं। नजदीकी मंडी की मांग और भाव की जानकारी भी लें। जरूरत हो तो कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से सलाह लें।

स्थानीय मंडी के भाव रोज बदल सकते हैं। इसलिए किसान को भाव पर नजर रखनी पड़ती है। सुरेश की कहानी में भाव के उतार-चढ़ाव का जिक्र नहीं है। इसे भी ध्यान में रखना समझदारी होगी।

सुरेश ने शुरुआत में करीब 15 लाख रुपए लगाए थे। हर किसान के लिए इतना निवेश आसान नहीं हो सकता। इसलिए अपनी क्षमता के हिसाब से छोटे स्तर से शुरुआत भी सोची जा सकती है। सरकारी योजनाओं और अनुदान की जानकारी भी विभाग से जरूर लें। रिपोर्ट से साफ नहीं कि 2 लाख रुपए कुल आमदनी है या शुद्ध मुनाफा। इसलिए इसे शुद्ध मुनाफा न मानें।

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