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खरीफ की बुवाई अब भी 17.7 लाख हेक्टेयर कम, दलहन का रकबा 2% बढ़ा, लेकिन धान 16% घटा

newz@gmail.com | Sep 9, 2026, 15:59 IST

देश में खरीफ बुवाई अब भी 17.7 लाख हेक्टेयर कम है। दलहन का रकबा 2% बढ़ा, जबकि धान की बुवाई में 16% की भारी कमी आई। जानिए मानसून और फसलों की पूरी रिपोर्ट।

खरीफ की बुवाई

देश में मानसून की बारिश इस साल शुरू से कमजोर रही है। इसका सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ा है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़े इसकी पूरी तस्वीर दिखाते हैं। 28 अगस्त तक देश में 1,086.3 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलें बोई जा चुकी थीं। पिछले साल इसी समय तक यह आंकड़ा 1,104 लाख हेक्टेयर था। यानी इस साल बुवाई का रकबा 17.7 लाख हेक्टेयर कम रहा। एक हफ्ते पहले यह कमी 18.9 लाख हेक्टेयर थी। यानी हालात में थोड़ा सुधार जरूर आया है।

एक निजी रिसर्च कंपनी की मानसून बुवाई रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक मोटे अनाज, दलहन की बुवाई बढ़ने से कुल कमी घटी है। लेकिन धान की बुवाई में बड़ी गिरावट अब भी चिंता बनी हुई है। साथ ही दक्षिण भारत में कमजोर बारिश भी किसानों की चिंता बढ़ा रही है।

बारिश में कितनी कमी

देश में एक जून से छह सितंबर तक 638.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। सामान्य स्तर के हिसाब से यह आंकड़ा 741.6 मिलीमीटर होना चाहिए था। इस तरह बारिश में करीब 14% की कमी रही। बारिश का बंटवारा भी असंतुलित रहा है। कम बारिश वाले इलाकों का हिस्सा एक हफ्ते में 39% से 49% हुआ। वहीं सामान्य बारिश वाले क्षेत्र का हिस्सा 54% से घटकर 46% रह गया। यानी कम बारिश वाला दायरा लगातार बढ़ रहा है।

किस क्षेत्र में कितनी मार

बारिश की यह कमी हर क्षेत्र में एक जैसी नहीं रही। दक्षिण प्रायद्वीप में सबसे ज्यादा 27% कम बारिश दर्ज हुई। पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में भी 24% की भारी कमी रही। उत्तर-पश्चिम भारत में यह कमी सिर्फ 8% रही। मध्य भारत में हालात सबसे बेहतर रहे और वहां सिर्फ 5% कमी दर्ज हुई। यानी देश के पूर्वी और दक्षिणी हिस्से मानसून की मार सबसे ज्यादा झेल रहे।

खरीफ बुवाई में दलहन ने दी राहत

खरीफ बुवाई के आंकड़ों में दलहन ने राहत दी है। दलहन का कुल रकबा पिछले साल से करीब 1.8 लाख हेक्टेयर ज्यादा रहा। उड़द की बुवाई में अच्छी बढ़त देखी गई है। अरहर यानी तुअर की बुवाई भी पिछले साल से आगे निकल गई है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार दलहन का रकबा 117.1 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। पिछले साल यह आंकड़ा 115.3 लाख हेक्टेयर था। यह किसानों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

धान की बुवाई में गिरावट

सबसे बड़ी गिरावट धान की बुवाई में दर्ज हुई है। इस साल धान का रकबा 421.8 लाख हेक्टेयर रहा। पिछले साल यह आंकड़ा 438.2 लाख हेक्टेयर था। इस तरह धान का रकबा 16.4 लाख हेक्टेयर कम रहा। कुल खरीफ बुवाई की कमी का करीब 93% हिस्सा अकेले धान से जुड़ा है। साफ है कि धान की सुस्त बुवाई ही सबसे बड़ी चिंता है। दक्षिण भारत में कमजोर बारिश ने इस गिरावट को और बढ़ाया है।

मोटे अनाज से सुधार

मोटे अनाज की बुवाई ने कुल आंकड़ों में सुधार लाने में मदद की है। मोटे अनाज का रकबा एक हफ्ते पहले 4.2 लाख हेक्टेयर कम था। अब यह कमी घटकर सिर्फ 1.1 लाख हेक्टेयर रह गई है। बाजरे की बुवाई बढ़ने से यह सुधार संभव हुआ है। साथ ही मक्का और रागी की कमी में भी गिरावट दर्ज हुई है। इसी वजह से मोटे अनाज की कुल स्थिति एक हफ्ते में बेहतर हुई है। कृषि विशेषज्ञ इसे एक अच्छा संकेत मान रहे हैं।

कपास-गन्ने का ये रहा हाल

कपास और गन्ने के मोर्चे पर तस्वीर मिली-जुली रही है। इस साल कपास का रकबा 109.2 लाख हेक्टेयर रहा। पिछले साल यह आंकड़ा 109.9 लाख हेक्टेयर था। यानी कपास की बुवाई में मामूली कमी आई है। एक हफ्ते में ही यह कमी 0.4 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 0.7 लाख हेक्टेयर हो गई। गन्ने का रकबा भी पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम रहा। गन्ने की बुवाई में करीब 0.4% की गिरावट दर्ज हुई है।

तिलहन-जूट में भी मामूली सुधार

तिलहन और जूट की बुवाई में भी हल्का बदलाव देखा गया। तिलहन का रकबा इस साल 192 लाख हेक्टेयर रहा। पिछले साल यह आंकड़ा 193.1 लाख हेक्टेयर था। यानी तिलहन की बुवाई में 1.1 लाख हेक्टेयर की कमी आई। इसके उलट जूट और मेस्ता की बुवाई में मामूली बढ़त रही। जूट व मेस्ता का रकबा 6.3 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया। पिछले साल यह आंकड़ा 6.2 लाख हेक्टेयर था।

आगे किसानों के लिए मायने

कुल मिलाकर तस्वीर साफ है, सुधार हुआ है पर कमी अब भी बनी है। दलहन और जूट जैसी फसलों ने राहत दी है। लेकिन धान की बड़ी गिरावट ने कुल आंकड़ों को नीचे खींचा है। आने वाले हफ्तों में अच्छी बारिश इस कमी को और कम कर सकती है। खासकर दक्षिण और पूर्वी राज्यों में अच्छी बारिश जरूरी मानी जा रही है।

किसानों की निगाहें अब आने वाले दिनों के मौसम पूर्वानुमान पर टिकी हैं। अगर बारिश सुधरती है तो धान की बुवाई में भी तेजी आ सकती है। कृषि मंत्रालय आने वाले हफ्तों में भी ताजा आंकड़े जारी करता रहेगा।

जरूरी FAQ

इस साल खरीफ बुवाई पिछले साल से कितनी कम है?
जवाब: 28 अगस्त तक देश में 1,086.3 लाख हेक्टेयर में खरीफ बुवाई हुई थी, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1,104 लाख हेक्टेयर था। इस तरह कुल बुवाई का रकबा 17.7 लाख हेक्टेयर कम रहा। एक हफ्ते पहले यह कमी 18.9 लाख हेक्टेयर थी, यानी हालात में थोड़ा सुधार आया है।

धान की बुवाई में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
जवाब: इस साल धान का रकबा 421.8 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल यह 438.2 लाख हेक्टेयर था। दक्षिण भारत में कमजोर मानसूनी बारिश धान की बुवाई घटने की मुख्य वजह मानी जा रही है। कुल खरीफ बुवाई में आई कमी का लगभग 93% हिस्सा अकेले धान से जुड़ा है।

कौन सी फसलों की बुवाई में सुधार देखा गया है?
जवाब: दलहन का रकबा पिछले साल से करीब 1.8 लाख हेक्टेयर ज्यादा रहा, खासकर उड़द और अरहर की बुवाई बढ़ी है। मोटे अनाज की बुवाई भी बाजरे की वजह से सुधरी है और जूट व मेस्ता का रकबा भी थोड़ा बढ़ा है।

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