किसान की बात,सूत्र के साथ

नेताजी सुभाष ICAR इंटरनेशनल फेलोशिप से विदेश में पीएचडी का मौका, जानें आवेदन की पूरी प्रक्रिया

newz@gmail.com | Sep 21, 2026, 13:45 IST

ICAR ने कृषि में मास्टर डिग्री वाले भारतीय और विदेशी उम्मीदवारों से नेताजी सुभाष ICAR इंटरनेशनल फेलोशिप के लिए आवेदन मांगे हैं। तीन साल की पीएचडी के लिए 30 फेलोशिप हैं। आवेदन 25 सितंबर 2026 तक ई-मेल से भेजने होंगे।

इंटरनेशनल फेलोशिप

कृषि में पीएचडी करने का सपना देखने वालों के लिए बड़ा मौका है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने नेताजी सुभाष इंटरनेशनल फेलोशिप के लिए आवेदन मांगे हैं। आवेदन की आखिरी तारीख 25 सितंबर 2026 है। अब कुछ ही दिन बचे हैं।

यह फेलोशिप भारतीय और विदेशी दोनों नागरिकों के लिए है। इसके तहत तय प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में डॉक्टरेट की पढ़ाई की जा सकेगी। यह जानकारी ICAR के नोटिस और उसके दिशा-निर्देशों पर आधारित है।

क्या है यह फेलोशिप

भारतीय उम्मीदवार तय विदेशी विश्वविद्यालयों और संस्थानों में पढ़ाई कर सकेंगे। विदेशी उम्मीदवारों को भारतीय कृषि विश्वविद्यालयों में पढ़ने का मौका मिलेगा। फेलोशिप तीन साल की होगी। कुल 30 फेलोशिप दी जाएंगी। दिशा-निर्देशों के मुताबिक बंटवारा अच्छे उम्मीदवारों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।

ICAR ने इस फेलोशिप के दो मकसद बताए हैं। पहला, कृषि की नई तकनीकों में सक्षम मानव संसाधन तैयार करना। दूसरा, विदेश में भारतीय कृषि व्यवस्था की ताकत दिखाना। परिषद का कहना है कि इससे वैज्ञानिक दूत तैयार होंगे। ये आगे चलकर सहयोग बढ़ाने में मदद करेंगे।

कौन कर सकता है आवेदन

आवेदन के लिए कृषि या संबद्ध विज्ञान में मास्टर डिग्री जरूरी है। दिशा-निर्देशों के मुताबिक 10 में से 6.60 OGPA (Overall Grade Point Average) चाहिए। या इसके बराबर 65 प्रतिशत अंक होने चाहिए।

फ्रेश उम्मीदवारों की उम्र अंतिम तारीख पर 35 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इन-सर्विस यानी नौकरी कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह सीमा 40 साल है। फ्रेश उम्मीदवार की डिग्री तय तारीख से दो साल के भीतर पूरी हुई हो। भारत के इन-सर्विस उम्मीदवार ICAR-कृषि विश्वविद्यालय व्यवस्था में कार्यरत होने चाहिए। इस व्यवस्था में राज्य कृषि विश्वविद्यालय, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय और डीम्ड विश्वविद्यालय आते हैं। नोटिफिकेशन में पात्रता की और बारीकियां दी जा सकती हैं।

कितनी राशि और सुविधाएं मिलेंगी

भारतीय फेलो विदेश जाएंगे तो उन्हें हर महीने अधिकतम 2,000 अमेरिकी डॉलर मिलेंगे। इसके अलावा हर साल 1,000 अमेरिकी डॉलर की एकमुश्त राशि भी मिलेगी। यह राशि तैयारी और अन्य खर्च के लिए होगी। विदेशी फेलो को भारत में हर महीने अधिकतम 40 हजार रुपए मिलेंगे। उन्हें हर साल 25 हजार रुपए की एकमुश्त राशि भी मिलेगी।

दोनों वर्गों को आने-जाने का इकोनॉमी क्लास हवाई टिकट दिया जाएगा। यह टिकट सबसे छोटे रास्ते से और ICAR की ओर से मिलेगा। पढ़ाई की फीस फेलो को अपनी राशि या संसाधन से भरनी होगी। मेडिकल बीमा और अन्य खर्च भी फेलो को खुद उठाने होंगे। इन-सर्विस फेलो को अपने संस्थान से वेतन और सुविधाएं मिलती रह सकती हैं। ये राशियां दिशा-निर्देशों में लिखी हैं और समय-समय पर बदली जा सकती हैं।

आवेदन कैसे भेजें

आवेदन 25 सितंबर 2026 तक भेजना होगा। आवेदन ADG (HRD) (Assistant Director General, Human Resource Development) को भेजना होगा। ई-मेल पता है adg.hrd.applications@gmail.com। ई-मेल की विषय पंक्ति में यह लिखना जरूरी है। विषय पंक्ति में लिखें: NSIF के लिए आवेदन, आवेदक का नाम और संपर्क नंबर। NSIF (Netaji Subhas International Fellowship) यानी नेताजी सुभाष इंटरनेशनल फेलोशिप।

फेलोशिप की पूरी जानकारी ICAR की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। वहां प्राथमिकता वाले अध्ययन क्षेत्र और आवेदन फॉर्म भी मिलेंगे। उम्मीदवार आवेदन से पहले इन्हें ध्यान से पढ़ें। दिशा-निर्देशों में ऑनलाइन आवेदन का जिक्र है। इस बार का नोटिस ई-मेल से आवेदन मांगता है। इसलिए सही तरीका ICAR की वेबसाइट पर जांच लें।

आवेदन से पहले की तैयारी

आवेदन के साथ दो रेफरी के नाम और ई-मेल देने होते हैं। इनमें से एक रेफरी उम्मीदवार का सुपरवाइजर हो तो बेहतर है। दूसरा रेफरी उस क्षेत्र का विशेषज्ञ होना चाहिए। उम्मीदवार का काम उसे अच्छी तरह पता होना चाहिए। परिषद रेफरी से सीधे राय मांग सकती है।

उम्मीदवार को खुद पीएचडी प्रवेश की मंजूरी लेनी होती है। विदेशी उम्मीदवार तय भारतीय कृषि विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेंगे। भारतीय उम्मीदवार तय विदेशी संस्थानों में प्रवेश की मंजूरी लेंगे। इस स्वीकृति पत्र को आवेदन के साथ लगाना बेहतर बताया गया है। उम्मीदवार को विश्वविद्यालय की दाखिला शर्तें पहले खुद जांचनी चाहिए। अध्ययन का क्षेत्र ICAR के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ही होना चाहिए।

कैसे होगा चयन

चयन में कई बातें देखी जाएंगी। इनमें अध्ययन क्षेत्र की अहमियत और प्रस्तावित रिसर्च प्लान शामिल है। उम्मीदवार का शैक्षणिक रिकॉर्ड, उपलब्धियां और काम का अनुभव भी देखा जाएगा। अंक के आधार पर चयन समिति इंटरव्यू लेगी। जरूरत पड़ी तो इंटरव्यू फोन या वीडियो से भी हो सकता है। विदेशी उम्मीदवारों का इंटरव्यू उनके देश में मौजूद विशेषज्ञ भी ले सकते हैं।

उम्मीदवार का आचरण शुरू से अच्छा होना जरूरी है। इसका प्रमाणपत्र आखिरी विश्वविद्यालय या मौजूदा नियोक्ता देगा। इंटरव्यू के समय दाखिले का स्वीकृति पत्र दिखाना होगा। इन-सर्विस भारतीय उम्मीदवारों को डेपुटेशन की मंजूरी भी देनी होगी। चयन के बाद एक साल के भीतर पंजीकरण कराना जरूरी है। देर होने पर फेलोशिप का ऑफर अपने आप खत्म हो जाएगा।

फेलोशिप की शर्तें

फेलोशिप की अवधि तीन साल की है और इसे बढ़ाया नहीं जाएगा। पढ़ाई पूरी न हो तो आगे का खर्च फेलो को खुद उठाना होगा। फेलो को हर छह महीने पर प्रगति रिपोर्ट देनी होगी। उसे अपना पूरा समय पढ़ाई और रिसर्च में लगाना होगा।

भारतीय फेलो को पीएचडी के बाद भारत लौटना होगा। चुने गए भारतीय फेलो को 10,000 अमेरिकी डॉलर की बैंक गारंटी देनी होगी। विदेशी फेलो की राशि से 2 लाख रुपए रोके जाएंगे। यह रकम पढ़ाई पूरी होने पर लौटा दी जाएगी।

किसान परिवारों के लिए मौका

कृषि में मास्टर डिग्री वाले किसान परिवारों के युवा भी आवेदन कर सकते हैं। शर्त सिर्फ यह है कि वे पात्रता पूरी करते हों। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के कृषि छात्र भी इसमें शामिल हो सकते हैं। ऐसे युवा विदेश की आधुनिक कृषि तकनीक सीखकर लौट सकते हैं। ICAR का मकसद भी तकनीकी क्षमता वाले लोग तैयार करना बताया गया है।

ये भी पढ़ें…

इफको अध्यक्ष दिलीप संघाणी बने ICA के एट लार्ज डायरेक्टर, भारतीय सहकारिता को मिलेगी ग्लोबल पहचान

भारतीय चावल निर्यात पर चीन की सख्ती, तीन कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द

IIWBR ने शुरू की गेहूं-जौ बीज की बुकिंग, ये है रजिस्ट्रेशन प्रोसेस, जरूरी किस्में और बीज पाने का तरीका

रूस के प्रस्ताव पर BRICS में बनेगा ग्रेन एक्सचेंज, अनाज की कीमत का उतार-चढ़ाव थमेगा

GENERAL newz@gmail.com

Read more