भारतीय किसान संघ ने किसानों की परेशानियां सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखी हैं। संघ का प्रतिनिधिमंडल 16 अक्टूबर 2026 को मुरैना में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिला। इस मुलाकात में किसानों की कई मांगों वाला एक ज्ञापन सौंपा गया। संघ ने इन्हें क्षेत्र के किसानों की बड़ी समस्याएं बताया है। ज्ञापन में तीन मुद्दे उठाए गए हैं। पहला मुद्दा स्थानीय शक्कर कारखाने का है। दूसरा मुद्दा बाजरा की सरकारी खरीदी का है। तीसरा मुद्दा खाद और बिजली की आपूर्ति का है।
प्रतिनिधिमंडल में कौन रहा
प्रतिनिधिमंडल में संघ के कई पदाधिकारी शामिल थे। प्रांत कोषाध्यक्ष सतीश तिवारी इसमें मौजूद रहे। प्रांत कार्यकारिणी सदस्य संजीव मिश्रा भी साथ थे। इनके अलावा जिले के प्रमुख कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। इस तरह मुरैना के किसानों की बात प्रदेश के मुखिया तक पहुंची। संघ की ओर से प्रांत स्तर के पदाधिकारी भी मुलाकात में शामिल हुए।
शक्कर कारखाना फिर चालू करें
ज्ञापन की पहली मांग स्थानीय शक्कर कारखाने से जुड़ी है। संघ ने कारखाने को दोबारा चालू करने की मांग रखी है। यह तुरंत संभव न हो, तो समस्याओं का हल निकालने को कहा है।
आम तौर पर शक्कर कारखाना आसपास के किसानों के लिए बड़ा सहारा होता है। गन्ना उगाने वाले किसान अपनी फसल पास में ही बेच पाते हैं। कारखाने से मजदूरों और छोटे कारोबारियों को भी काम मिलता है। इसलिए कारखाना बंद होने का असर पूरे इलाके पर दिखता है।
ज्ञापन में कारखाने की मौजूदा हालत का ब्योरा सामने नहीं आया है। संघ ने सिर्फ इसे चालू करने या समस्याएं सुलझाने की मांग रखी है। आगे की तस्वीर सरकार के जवाब से ही साफ होगी।
बाजरा खरीदी की मांग
दूसरी मांग बाजरा की सरकारी खरीदी को लेकर है। संघ चाहता है कि खरीदी सुचारू तरीके से हो। साथ ही पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी रखने की मांग भी की गई है।
सुचारू खरीदी का मतलब है कि किसान को बार बार चक्कर न लगाने पड़ें। उसकी उपज समय पर तौली जाए और बिना देरी के खरीदी हो जाए। पारदर्शी खरीदी का मतलब है कि तौल, दाम और भुगतान की जानकारी साफ दिखे।
बाजरा खरीफ की फसल है। इसकी कटाई का दौर आम तौर पर इन्हीं दिनों में रहता है। ऐसे वक्त किसान को उपज बेचने की जल्दी रहती है। खरीदी में देरी हो, तो किसान को कम दाम पर बेचना पड़ सकता है।
खाद और बिजली की आपूर्ति
तीसरी मांग खाद और बिजली को लेकर है। संघ ने मांग की है कि किसानों को समय पर खाद मिले। खाद की मात्रा भी पर्याप्त होनी चाहिए। साथ ही बिजली की आपूर्ति बिना रुकावट के देने की मांग रखी गई है।
अक्टूबर के बाद रबी की बुवाई का दौर शुरू होता है। इस समय खेतों को खाद की सख्त जरूरत पड़ती है। सिंचाई के लिए बिजली भी उतनी ही जरूरी होती है। जरा सी देरी से खेती का पूरा चक्र बिगड़ सकता है।
इसी वजह से संगठन अक्सर इस मौसम में खाद और बिजली उठाते हैं। इस बार भारतीय किसान संघ मुरैना ने यह बात सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाई है।
मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन
ज्ञापन लेने के बाद मुख्यमंत्री ने इसे स्वीकार किया। उन्होंने सभी मांगों पर सहानुभूति के साथ विचार करने की बात कही। साथ ही जल्द उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया।
फिलहाल यह सिर्फ आश्वासन है। किसी भी मांग पर अंतिम फैसला अभी सामने नहीं आया है। किसी आदेश या समय सीमा की जानकारी भी नहीं दी गई है।
किसानों को क्या मिल सकता है
ये मांगें पूरी हों, तो मुरैना के किसानों को राहत मिल सकती है। कारखाना चालू हो, तो इलाके में रोजगार और कारोबार को सहारा मिल सकता है। बाजरा की खरीदी ठीक चली, तो किसान को उपज बेचने में आसानी होगी।
खाद समय पर मिली, तो बुवाई में देरी नहीं होगी। बिजली लगातार मिली, तो सिंचाई का काम समय पर निपटेगा। इन सबका सीधा असर पैदावार और किसान की कमाई पर पड़ता है।
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