खरगोन में कपास किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। CCI (Cotton Corporation of India) ने अभी कपास की खरीद शुरू नहीं की है। इसी मांग पर किसानों ने आनंद नगर की कपास मंडी में प्रदर्शन किया। उन्होंने मंडी के गेट पर ताला लगा दिया। प्रदर्शन के बीच 45 साल के एक किसान की मौत भी हो गई। यह घटना मध्य प्रदेश के कपास किसानों की परेशानी को सामने लाती है।
खरगोन में क्यों भड़के किसान
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान कपास मंडी पहुंचे। उन्होंने मुख्य गेट पर ताला लगाया और धरने पर बैठ गए। किसानों ने नारेबाजी करते हुए CCI से जल्द खरीद शुरू करने की मांग की। मंडी में काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही।
किसानों का कहना है कि उन्हें अक्टूबर की शुरुआत से खरीद की उम्मीद थी। उन्हें भरोसा था कि शुरुआती दिनों से ही CCI कपास लेने लगेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब किसानों को अपनी उपज खुले बाजार में बेचनी पड़ रही है। वहां उन्हें कम दाम मिल रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि CCI की खरीद शुरू होने तक विरोध जारी रहेगा।
कपास भाव और किसानों का नुकसान
किसानों का दावा है कि खरगोन की कपास मंडी में भाव कम है। अभी कीमत करीब 6,000 से 8,000 रुपए प्रति क्विंटल है। CCI की खरीद में उन्हें 8,700 रुपए प्रति क्विंटल से ज्यादा की उम्मीद है। किसानों के मुताबिक कम भाव से हर क्विंटल पर बड़ा नुकसान हो रहा है।
अब सीधा हिसाब लगाकर देखें। 8,700 रुपए और 8,000 रुपए के बीच 700 रुपए का फर्क है। भाव 6,000 रुपए रहे तो यह फर्क 2,700 रुपए प्रति क्विंटल हो जाता है। 10 क्विंटल बेचने वाले किसान को 7,000 से 27,000 रुपए कम मिल सकते हैं। ये आंकड़े किसानों के दावे पर आधारित हैं।
CCI कपास खरीद की सरकारी एजेंसी है। बाजार में दाम कमजोर हों तो किसान इसी खरीद की ओर देखते हैं। इसलिए खरीद में देरी का असर सीधे किसान की जेब पर पड़ता है।
मंडी गेट बंद, बढ़ा तनाव
गेट बंद होने से उपज लेकर पहुंचे कई किसान परेशान हो गए। वाहन चालक भी मंडी में फंस गए। गेट खोलने को लेकर वाहन चालकों और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच कहासुनी हो गई। बाद में कुछ लोगों ने गेट खोल दिया। इससे दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। हालात संभालने के लिए पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा। मौके पर तहसीलदार, पुलिस और मंडी के अधिकारी भी पहुंचे।

मंडी सचिव ने क्या बताया
मंडी सचिव शर्मिला निनामा के मुताबिक किसानों की मुख्य मांग CCI की खरीद थी। उन्होंने बताया कि किसानों को जानकारी दी गई है। CCI 15 अक्टूबर से खरीद शुरू करेगा। मंडी प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से गेट खोलने की अपील भी की। मकसद था कि पहले से मंडी में मौजूद किसान और वाहन बाहर निकल सकें।
महासंघ के पदाधिकारी कैलाश पाटीदार ने भी यही बात दोहराई। उनके मुताबिक मंडी सचिव ने उन्हें खरीद की तारीख बताई है। यह तारीख 15 अक्टूबर है। पाटीदार ने किसानों की परेशानियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आंदोलन के दौरान हुई किसान की मौत को दुखद बताया।
प्रदर्शन के बीच किसान की मौत
प्रदर्शन के दौरान 45 साल के किसान अशोक मंगत वर्मा की तबीयत बिगड़ गई। बताया गया है कि वर्मा लेपा के रहने वाले थे। तबीयत बिगड़ने के बाद वे मंडी परिसर में गिर पड़े।
वहां मौजूद लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की। एसडीओपी (Sub Divisional Officer of Police) सौरभ तोमर के वाहन से उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मंडी सचिव के मुताबिक उन्हें किसान की मौत की जानकारी मिली है। शुरुआती तौर पर अटैक आने की बात बताई गई है। महासंघ के पदाधिकारियों ने भी घटना पर दुख जताया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। मौत की असली वजह चिकित्सकीय जांच के बाद ही साफ हो सकेगी।
अब आगे क्या होगा
अब सबकी नजर 15 अक्टूबर पर टिकी है। मंडी सचिव के मुताबिक उसी दिन से CCI की खरीद शुरू होनी है। खरीद तय समय पर शुरू हुई तो किसानों को राहत मिल सकती है। उन्हें बेहतर भाव की उम्मीद है।
तब तक किसानों के सामने बड़ा सवाल बना हुआ है। वे कम दाम पर उपज बेच दें या खरीद का इंतजार करें। यह फैसला हर किसान के लिए आसान नहीं है।
महासंघ पहले ही कह चुका है कि खरीद शुरू होने तक विरोध जारी रहेगा। ऐसे में प्रशासन के लिए तय तारीख पर खरीद शुरू कराना अहम होगा। मंडी में शांति बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
किसान क्या ध्यान रखें
कपास बेचने से पहले किसान मंडी कार्यालय से ताजा जानकारी जरूर लें। खरीद की तारीख, जरूरी कागज और प्रक्रिया के बारे में पूछ लें। अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय अधिकृत जानकारी का इंतजार करें। प्रदर्शन के दौरान आम किसानों और वाहन चालकों को भी परेशानी हुई। इसलिए आंदोलन शांतिपूर्ण रखना सबके हित में है।
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