महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित किसानों के लिए राहत प्रक्रिया तेज हुई है। सरकार फसल नुकसान के पंचनामे तेजी से पूरे करा रही है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मुंबई में समीक्षा बैठक की। उन्होंने लगभग 45 प्रतिशत पंचनामे पूरे होने की जानकारी दी। बैठक में फसल नुकसान, जल भंडारण और सहायता प्रक्रिया देखी गई। अधिकारियों को बाकी पंचनामे जल्द पूरा करने के निर्देश मिले हैं।
65 लाख हेक्टेयर का सर्वे
कृषि विभाग के आंकड़ों में अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आई है। छह अक्टूबर तक 65.26 लाख हेक्टेयर का सर्वे पूरा हुआ। प्रभावित तालुकों में करीब 1.49 करोड़ हेक्टेयर खेती का क्षेत्र है। इस आधार पर वास्तविक प्रगति लगभग 43.75 प्रतिशत बनती है।
मंत्री ने इस आंकड़े को करीब 45 प्रतिशत बताया है। दोनों आंकड़ों का अंतर गोल प्रतिशत बताने के कारण दिखता है। राज्य के 32,905 प्रभावित गांवों में पंचनामे कराए जा रहे हैं। इनमें 22,758 गांवों में सर्वे प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। करीब 1.42 करोड़ किसानों की फसलें जांच के दायरे में हैं। इनमें लगभग 60 लाख किसानों के पंचनामे पूरे बताए गए हैं।
12 अक्टूबर तक लक्ष्य
राहत एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद पाटिल ने समयसीमा भी बताई है। सरकार बाकी पंचनामे 12 अक्टूबर तक पूरा करना चाहती है। कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने भी तेजी लाने के निर्देश दिए। अधिकारियों को गांवों में रहकर सही आकलन करने को कहा गया है।
सरकार चाहती है कि प्रभावित किसानों को दिवाली से पहले सहायता मिले। हालांकि, सहायता की समान राशि अभी घोषित नहीं हुई है। राशि वास्तविक नुकसान और सरकारी नियमों के अनुसार तय होगी। इसलिए प्रत्येक किसान को एक जैसी सहायता मिलना जरूरी नहीं है।
265 तालुके सूखाग्रस्त
महाराष्ट्र सरकार ने 26 सितंबर को सूखे की घोषणा की थी। राज्य के 358 तालुकों में 265 तालुके शामिल किए गए। यह संख्या राज्य के करीब 74 प्रतिशत तालुकों के बराबर है। छत्रपति संभाजीनगर संभाग में सर्वाधिक 74 तालुके शामिल हैं।
अमरावती संभाग में 56 तालुके प्रभावित घोषित किए गए हैं। नासिक संभाग के 49 तालुके सूची में शामिल हैं। नागपुर संभाग में 39 और पुणे संभाग में 35 तालुके हैं। ठाणे संभाग में कुल 12 तालुके प्रभावित माने गए हैं। ठाणे संभाग की सूची में रायगढ़ का एक तालुका शामिल है। रत्नागिरी के तीन और सिंधुदुर्ग के आठ तालुके शामिल हैं।
केंद्रीय टीमें करेंगी दौरा
सूखे की जमीनी स्थिति देखने केंद्रीय टीमें महाराष्ट्र आ सकती हैं। दौरा 10 या 12 अक्टूबर को संभावित है। तीन टीमें अलग-अलग प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर सकती हैं। एक टीम बीड और धाराशिव जिलों में जाएगी।
दूसरी टीम यवतमाल और वाशिम की स्थिति देख सकती है। तीसरी टीम अहिल्यानगर और सोलापुर का दौरा कर सकती है। टीमें फसल नुकसान और पानी की स्थिति का आकलन करेंगी। उनकी रिपोर्ट केंद्रीय सहायता प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकती है।
किसानों को क्या राहत मिलेगी
सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों के लिए कई राहत उपाय घोषित किए हैं। इनमें फसल ऋण का पुनर्गठन शामिल है। भू-राजस्व में रियायत देने की व्यवस्था भी लागू हो सकती है। कृषि बिजली बिलों में भी राहत देने की घोषणा हुई है।
सूखा प्रभावित किसानों पर कर्ज वसूली का दबाव नहीं बनाया जाएगा। सरकार ने बैंकों और निजी वित्त संस्थानों को चेतावनी दी है। फसल बीमा लागू करने में पारदर्शिता रखने के निर्देश भी मिले हैं। पात्र किसानों से बार-बार दस्तावेज नहीं मांगने को कहा गया है।
बैठक में ऋण संबंधी रिकॉर्ड पूरा करने पर भी जोर दिया गया। गांव स्तर पर उत्तराधिकार रिकॉर्ड ठीक करने को कहा गया है। केवाईसी (Know Your Customer) प्रक्रिया भी गांव स्तर पर पूरी होगी। इससे पात्र किसान राहत और ऋण लाभ से वंचित नहीं होंगे।
सहायता कैसे पहुंचेगी
पंचनामा राहत प्रक्रिया का पहला जरूरी चरण होता है। कर्मचारी खेत देखकर नुकसान का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार करते हैं। यह रिकॉर्ड संबंधित तहसील कार्यालय में जमा किया जाता है। जिला स्तर पर सभी आंकड़ों को एक साथ जोड़ा जाता है।
इसके बाद संभागीय आयुक्त सरकार को सहायता प्रस्ताव भेजते हैं। मंजूरी मिलने पर लाभार्थियों का डेटा ऑनलाइन दर्ज होता है। हर पात्र रिकॉर्ड के लिए एक विशेष क्रमांक बनाया जाता है। लाभार्थी सूची तहसील और ग्राम पंचायत स्तर पर प्रदर्शित होती है।
किसान सेवा केंद्र पर अपनी ई-केवाईसी पूरी कर सकते हैं। विभाग के अनुसार यह प्रक्रिया किसानों के लिए मुफ्त रहती है। सत्यापन के बाद सहायता आधार से जुड़े बैंक खाते में पहुंचती है। गलत रिकॉर्ड होने पर भुगतान में देरी हो सकती है।
पानी बचाने पर भी जोर
सरकार सूखाग्रस्त इलाकों में पानी का प्रबंधन भी कर रही है। पेयजल भंडार सुरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया गया है। निर्माण कार्यों में पीने योग्य पानी के इस्तेमाल पर रोक रहेगी। वहां सीवेज उपचार संयंत्र का पानी इस्तेमाल किया जा सकेगा। जल संसाधनों में दस प्रतिशत अतिरिक्त सुरक्षित भंडार रखने की योजना है। इसका उद्देश्य अगले मानसून तक पेयजल उपलब्ध रखना है।
किसानों के लिए जरूरी काम
किसान पंचनामा करते समय अपने खेत में मौजूद रहें। फसल और जमीन की जानकारी सही दर्ज कराना जरूरी है। किसान सर्वे रिकॉर्ड की जांच भी जरूर करें। नाम, क्षेत्रफल और फसल की जानकारी गलत नहीं होनी चाहिए।
बैंक खाते में आधार जुड़ा होना भी जरूरी है। मोबाइल नंबर चालू रखने से भुगतान जानकारी मिल सकती है। किसान सहायता राशि संबंधी अपुष्ट संदेशों से सावधान रहें। सरकार ने अभी समान मुआवजा दर घोषित नहीं की है।
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