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गेंदे की खेती से महिला किसान की चमकी किस्मत, लागत सिर्फ 11 हजार, 0.12 हेक्टेयर में 40 क्विंटल फूल, 1.50 लाख की आय

newz@gmail.com | Oct 10, 2026, 16:24 IST

छिंदवाड़ा के चारगांव करबल की महिला किसान इंदिरा भादे ने 0.12 हेक्टेयर में गेंदे की खेती की। करीब 11 हजार रुपए की लागत से 40 क्विंटल फूल पैदा किए। बिक्री से 1.50 लाख रुपए से अधिक की सकल आय और 1.39 लाख रुपए से अधिक की शुद्ध आय मिली।

गेंदे की खेती

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में एक महिला किसान ने बेहतर आमदनी का उदाहरण पेश किया है। मोहखेड़ विकासखंड के चारगांव करबल गांव की इंदिरा भादे ने गेंदे की खेती अपनाई। सीमित जमीन होने के बावजूद उन्होंने अच्छी कमाई हासिल की। उनकी सफलता में सही फसल का चुनाव और देखभाल की अहम भूमिका रही।

इंदिरा के पास कुल 0.241 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसमें से उन्होंने करीब 0.120 हेक्टेयर क्षेत्र में गेंदे की खेती की। यह उनके कुल खेत का लगभग आधा हिस्सा है। उन्होंने जनवरी 2026 में गेंदे की सनसाईन यलो किस्म लगाई।

इस खेती पर पौधरोपण और दूसरे कृषि कार्यों सहित करीब 11 हजार रुपए खर्च हुए। फसल की देखभाल के लिए उन्होंने आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन से उन्हें खेती की योजना बनाने में मदद मिली।

ड्रिप सिंचाई से मिला सहारा

इंदिरा के खेत में ड्रिप सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। इस तरीके में पानी बूंद-बूंद करके पौधों की जड़ों तक पहुंचता है। इससे पानी का बेहतर उपयोग करने में मदद मिल सकती है। जरूरत के अनुसार सिंचाई करने से खेत में पानी का प्रबंधन भी आसान होता है।

गेंदे की फसल में सही समय पर सिंचाई और देखभाल जरूरी होती है। पौधों की बढ़वार और फूलों की गुणवत्ता पर इसका असर पड़ सकता है। फसल की जरूरत के अनुसार पानी देना किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, सिंचाई की जरूरत मिट्टी, मौसम और पौधों की स्थिति पर भी निर्भर करती है।

इंदिरा ने वैज्ञानिक तरीके से खेती करते हुए फसल प्रबंधन पर ध्यान दिया। उद्यानिकी विभाग का मार्गदर्शन भी उनके काम आया। सीमित जमीन में खेती करने वाले किसानों के लिए यह पहल उपयोगी उदाहरण है। इससे पता चलता है कि फसल का चुनाव आमदनी पर असर डाल सकता है।

40 क्विंटल फूलों का उत्पादन

फसल तैयार होने पर इंदिरा को करीब 40 क्विंटल गेंदे के फूल मिले। यह उत्पादन लगभग 0.120 हेक्टेयर जमीन से प्राप्त हुआ। फूलों की बिक्री से उन्हें अच्छी आमदनी हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बाजार में फूल 40 से 50 रुपए प्रति किलोग्राम बिके।

गेंदे के फूलों का उपयोग पूजा-पाठ, शादी-विवाह और सजावट में होता है। त्योहारों और आयोजनों के समय इनकी मांग बढ़ सकती है। लेकिन बाजार भाव हमेशा एक जैसे नहीं रहते। मांग, मौसम, फूलों की गुणवत्ता और स्थानीय बाजार के अनुसार कीमत बदल सकती है।

इंदिरा की फसल से 1.50 लाख रुपए से अधिक की सकल आय हुई। यह रकम फूल बेचने से मिली कुल कमाई है। इसमें से खेती की लागत घटाने पर शुद्ध आय का अनुमान मिलता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उनकी शुद्ध आय 1.39 लाख रुपए से अधिक रही।

11 हजार की लागत, बेहतर कमाई

इंदिरा ने गेंदे की खेती पर करीब 11 हजार रुपए खर्च किए। इसके मुकाबले उन्हें 1.50 लाख रुपए से अधिक की सकल आय मिली। लागत घटाने के बाद 1.39 लाख रुपए से अधिक की शुद्ध आय बताई गई है। यह गणना उपलब्ध जानकारी पर आधारित है।

हालांकि, शुद्ध आय का सही आकलन करते समय सभी खर्च शामिल करना जरूरी है। इसमें बीज या पौधों की कीमत, खाद, दवा और सिंचाई जैसे खर्च आते हैं। मजदूरी और परिवहन का खर्च भी कुल लागत में शामिल होना चाहिए। उपलब्ध विवरण में सभी खर्चों का अलग-अलग ब्योरा नहीं दिया गया है।

दूसरे किसानों को अपनी स्थिति के अनुसार लागत का हिसाब बनाना चाहिए। हर खेत में उत्पादन और बिक्री का भाव अलग हो सकता है। गेंदे की खेती से अच्छी कमाई की संभावना है, लेकिन मुनाफा निश्चित नहीं है। खेती शुरू करने से पहले स्थानीय बाजार की जानकारी लेना उपयोगी रहेगा।

महिला किसानों के लिए प्रेरणा

इंदिरा भादे की सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने सीमित जमीन में उद्यानिकी फसल उगाकर बेहतर आय हासिल की। यह उदाहरण दिखाता है कि खेती में विकल्प तलाशना जरूरी है। सही फसल और समय पर प्रबंधन से छोटे खेतों में भी अवसर बन सकते हैं।

महिला किसान परिवार की खेती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे फसल उत्पादन, पशुपालन और कृषि से जुड़े दूसरे काम संभालती हैं। प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी मिलने से उनके फैसले और बेहतर हो सकते हैं। उद्यानिकी जैसी गतिविधियां उन्हें कम क्षेत्र में अलग फसल आजमाने का अवसर देती हैं।

हालांकि, खेती में सफलता केवल मेहनत पर निर्भर नहीं करती। पानी की उपलब्धता, मिट्टी, मौसम, बाजार और पूंजी भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए किसी सफल किसान के तरीके को अपनाने से पहले अपने खेत की स्थिति समझना चाहिए। स्थानीय कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेना भी फायदेमंद हो सकता है।

गेंदे की खेती से पहले क्या जानें?

गेंदे की खेती शुरू करने से पहले किसान स्थानीय बाजार की मांग समझें। फूलों की बिक्री के लिए मंडी, फूल विक्रेता और दूसरे खरीदारों से संपर्क किया जा सकता है। इससे फसल तैयार होने पर बिक्री की योजना बनाने में मदद मिलती है। कीमत और खरीद की शर्तों की जानकारी पहले लेना बेहतर है।

किसानों को उपयुक्त किस्म चुनने पर भी ध्यान देना चाहिए। इंदिरा ने सनसाईन यलो किस्म की खेती की थी। लेकिन हर किस्म हर मौसम और क्षेत्र के लिए समान परिणाम नहीं देती। स्थानीय मौसम और मिट्टी के अनुसार किस्म का चुनाव करना चाहिए।

सिंचाई और पौधों की देखभाल की योजना भी जरूरी है। ड्रिप सिंचाई उपलब्ध होने पर पानी का उपयोग बेहतर ढंग से किया जा सकता है। फसल में कीट या रोग दिखाई देने पर समय पर विशेषज्ञ सलाह लेनी चाहिए। इससे नुकसान कम करने में मदद मिल सकती है।

फूलों की तुड़ाई के बाद उन्हें जल्दी बाजार तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण है। फूल नाजुक होते हैं और देर होने पर उनकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए उत्पादन के साथ परिवहन और बिक्री की व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए।

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