बड़वानी जिले के गांव तलवाड़ा बुजुर्ग की सुनीता परमार आज एक सफल उद्यमी हैं। उन्होंने बीज प्रोसेसिंग की आधुनिक यूनिट शुरू की है। यूनिट का नाम अन्नपूर्णा कॉर्पोरेशन है। इसमें 15 स्थानीय लोगों को सीधा रोजगार मिल रहा है। यह सब मध्य प्रदेश सरकार की मदद से संभव हुआ। योजना का नाम एमएसएमई (Micro, Small and Medium Enterprises) प्रोत्साहन योजना है।
कौन हैं सुनीता परमार
सुनीता परमार बड़वानी जिले के ग्राम तलवाड़ा बुजुर्ग की रहने वाली हैं। उन्होंने मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर यह मुकाम पाया। उन्हें मध्य प्रदेश सरकार की योजना का सहारा भी मिला। आज वे इलाके के दूसरे लोगों के लिए रोजगार का जरिया बन गई हैं। संकल्प और मेहनत के साथ सही मार्गदर्शन मिले। तब साधारण महिला भी आगे बढ़ सकती है।

अन्नपूर्णा कॉर्पोरेशन क्या है
सुनीता ने अन्नपूर्णा कॉर्पोरेशन नाम से बीज प्रोसेसिंग यूनिट लगाई है। इसे आधुनिक यूनिट बताया गया है। उन्हें जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, बड़वानी का मार्गदर्शन और सहयोग मिला।
यहां मुख्य रूप से गेहूं, चना और सोयाबीन के बीज प्रोसेस होते हैं। दूसरे बीजों का काम भी यहीं होता है। प्रोसेसिंग के साथ ग्रेडिंग का काम भी किया जाता है। यह काम आधुनिक तकनीक से होता है। विज्ञप्ति में इस तकनीक के आगे लेजर लिखा गया है।
ग्रेडिंग का मतलब है बीज को गुणवत्ता के हिसाब से अलग-अलग श्रेणी में बांटना। इस यूनिट से किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध हो रहे हैं।

3.43 करोड़ की पूंजी का हिसाब
इस प्लांट की कुल पूंजी 3,43,59,383 रुपए बताई गई है। यानी यह करीब 3.43 करोड़ रुपए की परियोजना है। अब अनुदान का गणित देखें। जिला स्तरीय सहायता समिति ने 48 प्रतिशत अनुदान मंजूर किया है। यह रकम 1,64,92,504 रुपए है। यानी कुल पूंजी का करीब आधा हिस्सा सरकारी सहायता के रूप में मंजूर हुआ।
बचे हुए हिस्से का हिसाब भी समझें। कुल पूंजी में से अनुदान घटाएं तो 1,78,66,879 रुपए बचते हैं। यह हमारा सीधा गणित है। विज्ञप्ति में इस रकम के स्रोत का जिक्र नहीं है।
एमएसएमई प्रोत्साहन योजना से कितनी मदद
यह अनुदान एमएसएमई प्रोत्साहन योजना के तहत मिला है। इस योजना में महिला उद्यमियों के लिए विशेष प्रोत्साहन है। सुनीता परमार ने इसी का लाभ उठाया। इसे उद्योग विकास अनुदान कहा गया है।
अनुदान स्वीकृत हुआ है। इसका मतलब है कि मंजूरी मिल चुकी है। रकम कब और कैसे मिलेगी, यह जानकारी विज्ञप्ति में नहीं है। विज्ञप्ति के मुताबिक इस आर्थिक मदद से व्यावसायिक सफर आसान हुआ है। इससे सफर और मजबूत भी हुआ है।
सब्सिडी आसान भाषा में
सब्सिडी यानी सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता। इसका मकसद नए उद्यम को शुरुआती सहारा देना होता है। इस मामले में सहायता कुल पूंजी के 48 प्रतिशत के बराबर है। उद्यमी को पूरा खर्च अकेले नहीं उठाना पड़ता। इससे जोखिम कुछ कम होता है।
ऐसी मदद छोटे उद्यमियों के लिए राहत की बात होती है। खासकर तब, जब बड़ी पूंजी जुटाना मुश्किल हो।
15 लोगों को सीधा रोजगार
यह यूनिट सिर्फ कमाई का साधन नहीं है। इससे क्षेत्र के 15 स्थानीय लोगों को सीधा रोजगार मिल रहा है। विज्ञप्ति के मुताबिक इससे ग्रामीण परिवारों की आजीविका बेहतर हुई है। सीधे रोजगार का मतलब है कि ये लोग यूनिट में काम कर रहे हैं।
किसानों को क्या फायदा
बीज खेती की पहली सीढ़ी है। बीज अच्छा हो तो फसल की शुरुआत मजबूत होती है। इस यूनिट में बीज की प्रोसेसिंग और ग्रेडिंग होती है। किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध हो रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर ऐसी यूनिट हो तो बीज तक पहुंच आसान हो सकती है। साथ ही गांव के लोगों को काम का मौका भी मिलता है। ग्रेडिंग के बाद बीज एक जैसी गुणवत्ता का मिल सकता है। किसान के भरोसे के लिए यह बात अहम है।

इस कहानी से क्या सीखें
इस कहानी में तीन बातें साफ दिखती हैं। पहली बात है मजबूत इच्छाशक्ति। दूसरी बात है सही जगह से मार्गदर्शन। तीसरी बात है सरकारी योजना का समय पर लाभ। इन तीनों के मेल से यह उद्यम खड़ा हुआ। यानी सिर्फ पैसा काफी नहीं होता। योजना की जानकारी और सही सलाह भी उतनी ही जरूरी है।
दूसरी महिलाओं के लिए संदेश
ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं आगे आएं। वे शासन की योजनाओं का लाभ उठाएं। तब वे आर्थिक रूप से सशक्त हो सकती हैं। साथ ही समाज और अर्थव्यवस्था के विकास में भी योगदान दे सकती हैं। जानकारी के लिए जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र से संपर्क करें। सुनीता परमार को भी इसी केंद्र का मार्गदर्शन मिला था।
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