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मिलिए एमपी की ड्रोन दीदी कविता से, सरकारी योजना में सीखा ड्रोन उड़ाना, पांच लाख से ज्यादा से कमाकर बनीं मिसाल

newz@gmail.com | Oct 2, 2026, 18:30 IST

मध्य प्रदेश के रेवापुर की कविता चौहान ने नमो ड्रोन प्रशिक्षण लिया। उन्होंने दो हजार एकड़ से ज्यादा खेतों में कीटनाशक छिड़काव किया। इस काम से 5.81 लाख रुपए से ज्यादा कमाए। इससे उनकी आय का नया जरिया बना।

नमो ड्रोन

मध्य प्रदेश के रेवापुर गांव की कविता चौहान की कहानी सामने आई है। उन्होंने छोटे व्यवसाय से अपनी आर्थिक यात्रा शुरू की। कविता संत सेवालाल स्व-सहायता समूह से जुड़ी थीं। इस समूह में कुल 11 महिलाएं शामिल हैं। समूह की नियमित बचत से आर्थिक गतिविधियां आगे बढ़ीं। समूह की बचत करीब 24 हजार रुपए तक पहुंची।

ग्राम संगठन और बैंक से समूह को ऋण मिला। इससे महिलाओं को छोटे व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिला। कविता ने समूह से 10 हजार रुपए का ऋण लिया। उन्होंने इस रकम से ऑनलाइन सेवाओं की दुकान शुरू की। उन्होंने बैंक बीसी (Business Correspondent) की सेवाएं भी शुरू कीं। इस काम से उन्हें नियमित आमदनी होने लगी।

दुकान से 18 से 20 हजार आय

कविता की ऑनलाइन और बैंक बीसी दुकान चलने लगी। इस व्यवसाय से उन्हें हर महीने आय मिलने लगी। यह आय 18 से 20 हजार रुपए थी। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ। बच्चों की पढ़ाई का खर्च संभालना भी आसान हुआ। घरेलू जरूरतों के लिए भी अतिरिक्त पैसा मिलने लगा।

छोटा कारोबार शुरू होने के बाद कविता ने दूसरा रास्ता तलाशा। उनकी नजर आधुनिक कृषि तकनीक पर गई। इसी दौरान उन्हें ड्रोन प्रशिक्षण का अवसर मिला। इसके बाद उनकी कमाई का नया जरिया तैयार हुआ।

ग्वालियर में लिया ड्रोन प्रशिक्षण

कविता ने ग्वालियर में आयोजित नमो ड्रोन प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण में उन्होंने ड्रोन संचालन की जानकारी हासिल की। उन्होंने कृषि क्षेत्र में ड्रोन इस्तेमाल करना भी सीखा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्होंने सेवा शुरू की।

उन्होंने किसानों के खेतों में ड्रोन से छिड़काव किया। इसमें मुख्य रूप से कीटनाशक छिड़काव की सेवा शामिल रही। कविता ने अपने गांव के आसपास भी सेवा दी। इससे किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक की सुविधा मिली। कविता के लिए भी रोजगार का नया रास्ता खुला।

ड्रोन प्रशिक्षण ने उनके पहले कारोबार को नया विस्तार दिया। अब उनकी आय केवल दुकान तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कृषि सेवा को अपनी कमाई से जोड़ दिया। यही काम आगे उनकी पहचान का कारण बना।

दो हजार एकड़ में छिड़काव

कविता चौहान ने दो हजार एकड़ से ज्यादा जमीन में काम किया। उन्होंने इन खेतों में ड्रोन से कीटनाशक का छिड़काव किया। इस काम से उनकी आय 5.81 लाख रुपए से ज्यादा हुई। यह कमाई सिर्फ खेती से हुई आमदनी नहीं थी। यह कृषि सेवा उपलब्ध कराने से मिली आय थी।
ड्रोन ने कविता को बड़े क्षेत्र में काम करने का मौका दिया। इसके साथ उनका तकनीकी कौशल भी विकसित हुआ।

कविता अब प्रशिक्षित ड्रोन दीदी के रूप में पहचानी जाती हैं। वह किसानों को ड्रोन आधारित कृषि सेवा उपलब्ध कराती हैं। उनकी कहानी में तकनीक और रोजगार दोनों पहलू जुड़े हैं। स्वयं सहायता समूह ने भी शुरुआत में साथ दिया।

गांव की महिलाओं को प्रेरणा

कविता की यात्रा सिर्फ उनकी अपनी आय तक सीमित नहीं है। वह दूसरी ग्रामीण महिलाओं को भी समूहों से जुड़ने कहती हैं। वह उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करती हैं। तकनीकी प्रशिक्षण को भी वह रोजगार का रास्ता मानती हैं।

कविता ने कई सरकारी योजनाओं का लाभ भी लिया। इनमें आयुष्मान कार्ड और उज्ज्वला योजना शामिल हैं। उन्होंने लाड़ली बहना योजना का लाभ भी लिया है।

स्वयं सहायता समूह ने उन्हें शुरुआती वित्तीय सहारा दिया। छोटे ऋण से उन्होंने अपना काम शुरू किया। बाद में उन्होंने कृषि ड्रोन का प्रशिक्षण लिया। इससे उनके लिए नया रोजगार क्षेत्र तैयार हुआ।

कृषि में बढ़ रहा ड्रोन का इस्तेमाल

कृषि क्षेत्र में ड्रोन का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इनका इस्तेमाल फसलों में छिड़काव के लिए किया जाता है। कृषि ड्रोन से खाद और दवाओं का छिड़काव संभव है। कई जगह फसल निगरानी में भी ड्रोन इस्तेमाल होते हैं।

ड्रोन दीदी मॉडल में महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। इससे ग्रामीण महिलाओं को कृषि सेवा से जोड़ा जाता है। कविता का उदाहरण इसी तरह के रोजगार को दिखाता है। उन्होंने प्रशिक्षण के बाद किसानों को सेवा देना शुरू किया।

कविता की कमाई का आंकड़ा उनके काम की मात्रा बताता है। उन्होंने दो हजार एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में छिड़काव किया। इस काम से 5.81 लाख रुपए से ज्यादा कमाए।

छोटे कारोबार से ड्रोन तक

कविता का सफर एक छोटे ऋण से शुरू हुआ। 10 हजार रुपए के ऋण से उन्होंने दुकान शुरू की। दुकान से उन्हें हर महीने 18 से 20 हजार रुपए मिले। फिर उन्होंने कृषि ड्रोन प्रशिक्षण का रास्ता चुना।

ग्वालियर में प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने सेवा शुरू की। उन्होंने आसपास के किसानों के खेतों में छिड़काव किया। धीरे-धीरे उनका काम दो हजार एकड़ से आगे पहुंचा। इससे उनकी कुल आय 5.81 लाख रुपए से ज्यादा हुई।

यह कहानी ग्रामीण महिलाओं के बदलते रोजगार विकल्प दिखाती है। स्वयं सहायता समूह और तकनीकी प्रशिक्षण इसमें अहम रहे। छोटे कारोबार से शुरुआत करके नया कौशल जोड़ा गया। इसके बाद कृषि सेवा को आय के साधन में बदला गया।

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