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PDMC योजना: ड्रिप-मिनी स्प्रिंकलर पर एमपी के किसानों को 55% तक मिल रहा अनुदान, ऐसे कर सकते हैं आवेदन

newz@gmail.com | Sep 18, 2026, 15:38 IST

मध्य प्रदेश में पीडीएमसी (पर ड्रॉप मोर क्रॉप) योजना के तहत ड्रिप और मिनी स्प्रिंकलर पर किसानों को 45 से 55 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। इच्छुक किसान अपने विकासखंड के वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी या ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। किसान कियोस्क सेंटर के माध्यम से भी ऑनलाइन पंजीयन और आवेदन किया जा सकता है।

PDMC योजना

मध्य प्रदेश में किसानों को सिंचाई का नया साधन अपनाने का मौका है। उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण विभाग वर्ष 2026-27 में यह योजना चला रहा है। इसे ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ यानी पीडीएमसी योजना कहा जाता है। इसी कड़ी में पांढुर्णा जिले में किसानों से आवेदन मांगे गए हैं। ड्रिप और मिनी स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति को यहां बढ़ावा दिया जा रहा है। पात्र किसानों को इकाई लागत पर 55 प्रतिशत तक अनुदान मिल सकता है। यह मौका खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए फायदेमंद है।

वर्गवार तय हुए लक्ष्य

पीडीएमसी योजना के घटक पोर्टल स्प्रिंकलर में वर्गवार लक्ष्य तय किए गए हैं। अनुसूचित जनजाति यानी एसटी वर्ग के लिए 14 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है। अनुसूचित जाति यानी एससी वर्ग के लिए यह लक्ष्य 5 हेक्टेयर है। मिनी स्प्रिंकलर में सामान्य वर्ग का लक्ष्य 19.2 हेक्टेयर तय हुआ है। इसी में एसटी वर्ग के लिए 9.6 हेक्टेयर और एससी वर्ग के लिए 4.4 हेक्टेयर तय है। ड्रिप संयंत्र में भी एसटी और एससी वर्ग के लिए अलग लक्ष्य बचे हैं। एसटी वर्ग के लिए यह लक्ष्य 2.7 हेक्टेयर है। एससी वर्ग के लिए यह आंकड़ा 1.7 हेक्टेयर बताया गया है। इस तरह योजना का दायरा हर वर्ग के किसानों तक फैला है।

55 फीसदी तक मिलेगा अनुदान

योजना के तहत सामान्य किसानों को इकाई लागत का 45 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। लघु और सीमांत किसानों के लिए यह राशि बढ़कर 55 प्रतिशत हो जाती है। इसका मतलब है कि छोटी जोत वाले किसानों को ज्यादा राहत मिलेगी। ड्रिप और मिनी स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीक महंगी मानी जाती है। सब्सिडी की यह राशि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ कम करती है। इससे ज्यादा किसान इस तकनीक को अपनाने के लिए आगे आ सकते हैं।

सूक्ष्म सिंचाई क्यों जरूरी

ड्रिप सिंचाई में पानी सीधे पौधे की जड़ तक पहुंचाया जाता है। इससे पानी की बर्बादी काफी हद तक कम हो जाती है। मिनी स्प्रिंकलर में भी पानी का छिड़काव नियंत्रित तरीके से होता है। परंपरागत सिंचाई की तुलना में इन तकनीकों में पानी की बचत ज्यादा होती है। बिजली और मजदूरी की लागत में भी कमी आती है। खरपतवार की समस्या भी परंपरागत सिंचाई से कम रहती है। फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार देखा जाता है। यही वजह है कि सरकार इस तकनीक को लगातार बढ़ावा दे रही है।

कहां करें संपर्क

उद्यान विभाग ने इच्छुक किसानों से संपर्क करने की अपील की है। किसान अपने विकासखंड के वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी से मिल सकते हैं। ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी से भी जानकारी ली जा सकती है। ये अधिकारी योजना की पूरी जानकारी किसानों को देंगे। पात्रता और दस्तावेजों से जुड़े सवालों के जवाब भी यहीं मिलेंगे।

ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया

योजना का लाभ लेने किसान कियोस्क सेंटर की मदद ले सकते हैं। इसी सेंटर के जरिए ऑनलाइन पंजीयन और आवेदन किया जा सकता है। पोर्टल पर आवेदन से जुड़ी सभी जानकारी दर्ज करनी होती है। जरूरी दस्तावेज भी पोर्टल पर अपलोड करने होते हैं। आवेदन जमा होने के बाद विभागीय स्तर पर जांच होती है। पात्र पाए जाने पर किसान को अनुदान का लाभ मिल जाता है।

बुंदेलखंड के लिए भी मायने

पांढुर्णा जिला महाकौशल क्षेत्र में आता है। यहां सिंचाई के सीमित साधन लंबे समय से बड़ी चुनौती रहे हैं। कई इलाकों में बारिश पर निर्भरता ज्यादा है और भूजल स्तर भी सीमित है। ऐसे इलाकों में ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी तकनीक फसल को स्थिरता दे सकती है। कम पानी में भी बेहतर उत्पादन की गुंजाइश बनती है। इससे किसानों की आमदनी पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। पड़ोसी बुंदेलखंड क्षेत्र में भी पानी की कमी लंबे समय से चुनौती रही है। इससे वहां के किसानों को भी एक सबक मिल सकता है।

किसान इन बातों का रखें ध्यान

आवेदन से पहले किसान अपने खेत का रकबा और सिंचाई स्रोत जरूर जांच लें। जमीन से जुड़े दस्तावेज पहले से तैयार रखना बेहतर रहता है। जिस वर्ग में लक्ष्य तय है, उसी के हिसाब से आवेदन करना फायदेमंद होगा। लक्ष्य पूरा होने से पहले आवेदन करना बेहतर रहता है। इसलिए देरी किए बिना संबंधित अधिकारी से संपर्क करना उचित रहेगा। योजना से जुड़ी शर्तों को ठीक से समझकर ही आवेदन जमा करें। समय पर आवेदन करने वाले किसानों को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद रहती है।

फसल पर होगा सीधा असर

पानी की सही मात्रा मिलने से फसल की बढ़वार बेहतर होती है। समय पर सिंचाई मिलने से मौसम की मार का असर भी कम पड़ता है। ड्रिप सिंचाई अपनाने वाले किसान अक्सर बताते हैं कि पैदावार में सुधार आता है। साथ ही फसल की गुणवत्ता भी पहले से बेहतर रहती है। यही वजह है कि बागवानी और सब्जी खेती में इसकी मांग बढ़ रही है। आने वाले समय में यह तकनीक किसानों की पहली पसंद बन सकती है।

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