कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महिला किसानों के लिए घोषणा की है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को खेती में उनके योगदान से पहचान मिलेगी। सिर्फ जमीन के मालिकाना हक से यह पहचान तय नहीं होगी। चौहान ने गरीबी मुक्त गांव अभियान की भी बात कही। इसकी शुरुआत रायसेन और विदिशा जिलों से होगी। यह शुरुआत एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की जाएगी।
सांची में महिला किसान सम्मेलन
यह घोषणा मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के सांची में हुई। यहां महिला किसान सम्मेलन आयोजित किया गया था। खबर के मुताबिक यह कार्यक्रम शुक्रवार को हुआ।
शिवराज ने मंच से महिलाओं की भूमिका पर बात की। खबर के मुताबिक खेती के ज्यादातर काम में महिलाएं हिस्सा लेती हैं। लेकिन उन्हें किसान के रूप में पहचान कम ही मिलती है। इसी कमी को दूर करने की बात कही गई।
जमीन नहीं, काम से मिलेगी पहचान
चौहान के मुताबिक महिलाओं को किसान की औपचारिक मान्यता देने की कोशिश होगी। यह मान्यता उनके काम के आधार पर होगी। यानी जमीन उनके नाम पर हो या नहीं, काम को गिना जाएगा।
जो महिलाएं खेतों में काम करती हैं, उन्हें भी महिला किसान माना जाए। जो फसल उगाती हैं, उन्हें भी यह पहचान मिले। पशुपालन करने वाली महिलाओं को भी इसमें शामिल किया जाए।
शिवराज ने कई क्षेत्रों में महिलाओं की भूमिका गिनाई। इनमें फल और सब्जी उत्पादन शामिल है। औषधीय पौधों की खेती और मछली पालन का भी जिक्र हुआ। मुर्गी पालन में भी महिलाओं की भागीदारी बताई गई।
गरीबी मुक्त गांव अभियान
यह अभियान हर गांव के हर परिवार को रोजगार से जोड़ने के लिए है। लक्ष्य है कि हर परिवार के पास कम से कम एक आजीविका साधन हो। इसमें खेती और खेती से जुड़ी प्रोसेसिंग शामिल होगी। पशुपालन, बकरी पालन और मछली पालन भी इसका हिस्सा होंगे। छोटे कारोबार को भी इसमें जगह दी गई है।
इस अभियान में महिला किसानों की भूमिका अहम रहने की उम्मीद है। इसका लक्ष्य हर परिवार को कमाई का एक पक्का साधन देना है।
दो जिलों में पायलट प्रोजेक्ट
अभियान की शुरुआत दो जिलों से होगी। ये जिले रायसेन और विदिशा हैं। पहले यहां प्रयोग के तौर पर काम किया जाएगा।
मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक दोनों जिलों के चुने गांवों का सर्वे होगा। सर्वे में ऐसे परिवार खोजे जाएंगे, जिनके पास स्थायी आजीविका नहीं है। ऐसे परिवारों को योजनाओं में प्राथमिकता दी जाएगी। अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो इसे पूरे प्रदेश में बढ़ाया जा सकता है। दूसरे राज्यों में भी इसे लागू करने की संभावना है।
प्रोसेसिंग यूनिट और कर्ज
चौहान ने छोटी प्रोसेसिंग यूनिट को बढ़ावा देने की बात कही। इनमें दाल मिल, तेल मिल और टमाटर केचप बनाने की यूनिट शामिल हैं। इससे गांव में ही रोजगार के मौके बन सकते हैं।
इन यूनिट के लिए कई तरह की मदद का प्रस्ताव है। इनमें प्रशिक्षण, मशीनें और तकनीकी सहायता शामिल हैं। बिना गारंटी या कम गारंटी पर कर्ज देने की भी बात कही गई है। इससे बिना संपत्ति वाली महिलाओं को सहारा मिल सकता है।
महिला संगठनों को प्राथमिकता
महिला किसान संगठनों को भी बढ़ावा मिलेगा। किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा। सरकारी खरीद में इन्हें प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इसका मतलब है कि उनकी उपज को खरीद में तरजीह मिल सकती है।
पौधरोपण से जुड़ने की अपील
कार्यक्रम में चौहान ने महिला किसानों के साथ पौधे लगाए। उन्होंने महिलाओं से पौधरोपण अभियान से जुड़ने की अपील की। साथ ही अपना नाम दर्ज कराने को भी कहा।
मान्यता क्यों है जरूरी
हर साल 15 अक्टूबर को राष्ट्रीय महिला किसान दिवस मनाया जाता है। खबर के मुताबिक खेती के ज्यादातर काम में महिलाएं शामिल रहती हैं। लेकिन जमीन के रिकॉर्ड में अक्सर उनका नाम नहीं होता।
इसका असर सरकारी योजनाओं तक पहुंच पर पड़ता है। संस्थागत कर्ज लेना भी मुश्किल हो जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक योगदान के आधार पर मान्यता मिलने से हालात बदल सकते हैं। इससे किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), बीमा और प्रशिक्षण तक पहुंच आसान हो सकती है।
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