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CG की हल्दी-अदरक बीज योजना में घोटाला, 10 करोड़ की सब्सिडी में गड़बड़ी पर जांच के आदेश

newz@gmail.com | Sep 15, 2026, 21:32 IST

छत्तीसगढ़ में हल्दी-अदरक बीज योजना पर गंभीर सवाल उठे हैं। किसानों को अमानक और पुराने बीज देने के आरोप लगाए गए हैं।कई किसानों ने बीज नहीं मिलने की शिकायत भी की है। करीब 10 करोड़ रुपए की सब्सिडी में गड़बड़ी के आरोपों पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने जांच के आदेश दिए हैं।

हल्दी बीज घोटाला

छत्तीसगढ़ में हल्दी बीज योजना को लेकर विवाद बढ़ गया है। मसाला विस्तार योजना के तहत गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। मामले में राज्य के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने जांच के आदेश दिए हैं। आरोप योजना में करीब 10 करोड़ रुपए की सब्सिडी से जुड़े हैं। शिकायतों में अमानक बीज बांटने के आरोप लगाए गए हैं। बिना जरूरी सत्यापन भुगतान होने के आरोप भी सामने आए हैं।

मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच होगी। मंत्री ने रिकॉर्ड की जांच के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसमें बीज की गुणवत्ता से लेकर भुगतान तक जांच होगी।

25 करोड़ की इस योजना में क्या होना था

हॉर्टिकल्चर विभाग ने किसानों के लिए योजना बनाई थी। इस योजना में हल्दी और अदरक के बीज देने थे। किसानों को सब्सिडी वाले बीज डीबीटी के जरिए मिलने थे। डीबीटी यानी Direct Benefit Transfer के जरिए सहायता होनी थी। पूरी योजना का लक्ष्य 2076 हेक्टेयर क्षेत्र था। इस क्षेत्र में हल्दी और अदरक की खेती होनी थी।

योजना के लिए कुल 25 करोड़ रुपए का प्रावधान बताया गया। बीज की आपूर्ति के लिए 10 एजेंसियां तय थीं। इन एजेंसियों के जरिए किसानों को बीज मिलना था। लेकिन शिकायतों ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए। एक ही एजेंसी से कई जिलों में आपूर्ति का आरोप है। यह एजेंसी बीरगांव की बताई गई है।

रायपुर से लेकर कई जिलों तक आपूर्ति का दावा है। इनमें कोंडागांव और बीजापुर भी शामिल हैं। जगदलपुर समेत दूसरे जिलों में भी सप्लाई बताई गई है।

बीज की कीमत पर सवाल

शिकायतों में बीज की कीमत का मुद्दा भी उठाया गया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय का हवाला दिया गया है। मानक हल्दी बीज की कीमत करीब 70 रुपए किलो बताई गई। वहीं संबंधित एजेंसी ने 46 रुपए किलो में बीज दिया। इस कीमत के अंतर पर सवाल उठाए गए हैं। विशेषज्ञों के हवाले से गुणवत्ता को लेकर आशंका जताई गई।

हालांकि यह आरोप जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे। फिलहाल विभाग ने मामले की जांच शुरू करने का फैसला किया है। इससे बीज की खरीद और आपूर्ति की प्रक्रिया जांची जाएगी। बीज की गुणवत्ता के साथ दस्तावेज भी जांचे जाएंगे। मंत्री ने इसके लिए कई बिंदुओं पर परीक्षण कहा है। इससे पूरी प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

अमानक बीज का आरोप

शिकायतों में बीज के पंजीकरण पर भी सवाल हैं। आरोप है कि बीज का वैधानिक पंजीकरण नहीं था। टेंडर की शर्तों को लेकर भी शिकायत सामने आई है। आपूर्तिकर्ता के पास प्रमाणन से जुड़ी व्यवस्था पर सवाल हैं। बीज तैयार करने की वैधानिक व्यवस्था नहीं होने का आरोप है। लाइसेंस से जुड़े नियमों के पालन पर भी सवाल उठे।

हल्दी की रोमा किस्म को लेकर भी शिकायत हुई। इसमें फर्जी लॉट नंबर इस्तेमाल करने का आरोप है। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। शिकायतों में बीज की उपयोग अवधि को लेकर भी सवाल हैं। नियमों के अनुसार अंकुरण बीज की अवधि नौ महीने बताई गई। आरोप है कि पुराने बीज बाद में किसानों को दिए गए।

शिकायत के अनुसार एक्सपायरी के करीब एक साल बाद आपूर्ति हुई। अगर आरोप सही मिले तो मामला गंभीर हो सकता है। इसी वजह से दस्तावेजों की जांच जरूरी हो गई है।

किसानों के नाम पर सवाल

मामले का सबसे अहम पहलू लाभार्थी किसानों से जुड़ा है। आधा दर्जन से ज्यादा जिलों के किसानों की शिकायत बताई गई। कुछ किसानों ने बीज नहीं मिलने की बात कही।

कुछ किसानों ने योजना का लाभ नहीं मिलने की बात कही। इसके बावजूद उनके नाम लाभार्थी सूची में बताए गए। इस दावे ने योजना की निगरानी पर सवाल खड़े किए। अगर रिकॉर्ड सही है तो लाभार्थी सूची जांचनी होगी। बीज वितरण का पूरा रिकॉर्ड भी सामने लाना होगा। इसके अलावा भुगतान से जुड़े दस्तावेज भी जांचने होंगे।

मंत्री ने दिए जांच के आदेश

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने कई बिंदुओं पर अनिवार्य परीक्षण करने कहा। इसमें बीजों के प्रमाणीकरण की जांच शामिल है। बीज के टैग और लॉट नंबर भी जांचे जाएंगे। एक्सपायरी डेट की भी जांच करने के निर्देश हैं।

आपूर्ति की दरों का परीक्षण भी किया जाएगा। किसानों को मिली सामग्री की मात्रा जांची जाएगी। नियमों के अनुसार भुगतान हुआ या नहीं, यह भी देखा जाएगा। मंत्री ने कार्रवाई की जानकारी तत्काल देने के निर्देश दिए हैं। इससे जांच की रिपोर्ट पर भी नजर रहेगी। जांच के बाद आरोपों की वास्तविक स्थिति साफ होगी।

अधिकारियों ने गड़बड़ी से किया इनकार

शिकायतों के बीच अधिकारियों का अलग दावा भी सामने आया। अधिकारियों ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया था। उन्होंने भुगतान की रकम को लेकर भी जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक लक्ष्य 6.22 करोड़ रुपए का था। इसके मुकाबले 1.38 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ था। यह आंकड़ा शिकायतों में बताए गए 10 करोड़ से अलग है।

इस अंतर को देखते हुए जांच और महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि योजना के कुल प्रावधान और भुगतान अलग आंकड़े हैं। जांच में वास्तविक भुगतान की स्थिति सामने आ सकती है। जनसंपर्क संचालनालय ने भी खबरों को भ्रामक बताया था। अब जांच के आदेश के बाद मामला फिर चर्चा में है।

किन जिलों पर नजर

रिपोर्ट के अनुसार कई जिलों में शिकायतें सामने आई हैं। जगदलपुर, कोंडागांव, धमतरी, राजनांदगांव, दुर्ग, बिलासपुर, अंबिकापुर और बलरामपुर, जशपुर और महासमुंद में गड़बड़ी के आरोप हैं। रिपोर्ट में कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल हैं। असिस्टेंट और डिप्टी डायरेक्टर स्तर के अधिकारी बताए गए हैं। इन अधिकारियों ने भुगतान प्रक्रिया में भूमिका निभाई, ऐसा आरोप है। आरोप है कि एक संस्था के बिलों पर भुगतान हुआ। बीज प्रमाणित नहीं होने के बावजूद भुगतान का आरोप है। इन आरोपों की जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय होगी।

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