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पीएम धन-धान्य कृषि योजना में एमपी का डिंडौरी बना राष्ट्रीय मॉडल, देशभर में अव्वल

newz@gmail.com | Sep 17, 2026, 20:01 IST

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के जुलाई 2026 मूल्यांकन में डिंडौरी पहले स्थान पर रहा। जिले ने 36 योजनाओं के समन्वय से कई कृषि क्षेत्रों में बेहतर काम किया।

डिंडौरी अव्वल

मध्य प्रदेश के डिंडौरी ने कृषि क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान बनाई है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के जुलाई 2026 मूल्यांकन में जिला पहले स्थान पर रहा। यह तुलना योजना के लिए चुने गए देश के 100 जिलों में हुई। जिले ने अलग-अलग विभागों की 36 योजनाओं को साथ जोड़कर काम किया। प्रशासन ने लगातार निगरानी, विभागीय तालमेल और जनभागीदारी पर जोर दिया। इन्हीं प्रयासों को पहली रैंक का प्रमुख आधार बताया गया है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जुलाई 2025 में इस योजना को मंजूरी दी थी। योजना छह वर्षों तक चलेगी और इसकी शुरुआत 2025-26 से हुई। इसका लक्ष्य कमजोर कृषि संकेतकों वाले जिलों में तेज सुधार लाना है।

योजना कैसे काम करती है

इस योजना में 11 विभागों की 36 मौजूदा योजनाएं जोड़ी गई हैं। राज्य योजनाओं और स्थानीय साझेदारियों को भी जिला कार्ययोजना में शामिल किया जाता है। हर जिले की जरूरत देखकर स्थानीय कृषि योजना तैयार होती है।

सरकार ने जिलों के चयन के लिए तीन मुख्य संकेतक रखे हैं। इनमें कम उत्पादकता और कम फसल सघनता शामिल हैं। किसानों को कम संस्थागत ऋण मिलना तीसरा संकेतक है।

प्रगति की समीक्षा हर महीने डिजिटल डैशबोर्ड पर होती है। इसके लिए 117 प्रमुख प्रदर्शन संकेतक तय किए गए हैं। नीति आयोग जिला योजनाओं की समीक्षा और मार्गदर्शन करता है। केंद्रीय नोडल अधिकारी भी नियमित प्रगति देखते हैं।

डिंडौरी की ताकत बनी कोदो-कुटकी

डिंडौरी की ग्रामीण अर्थव्यवस्था कृषि, वनोपज और स्थानीय रोजगार पर टिकी है। जिले में कोदो-कुटकी को खास बढ़ावा दिया गया। इसकी खेती 34,700 हेक्टेयर क्षेत्र में हो रही है। इससे 52,282 कृषक परिवार सीधे जुड़े हैं।

इस काम में 14 एफपीओ (Farmer Producer Organisation) भी भागीदार हैं। डिंडौरी की कोदो-कुटकी को जीआई टैग (Geographical Indication Tag) मिला है। इससे स्थानीय श्रीअन्न को बाजार में अलग पहचान मिली।

रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना ने खरीद को भी सहारा दिया। अब तक 5,036 किसानों से 3,000 क्विंटल कोदो-कुटकी खरीदी गई। मौजूदा वर्ष में 10,000 क्विंटल खरीदने का लक्ष्य रखा गया है।

प्राकृतिक खेती का विस्तार

जिले में प्राकृतिक और जैविक खेती का दायरा बढ़ाया गया है। इसके लिए 33 जैव संसाधन केंद्र बनाए गए। इन केंद्रों ने 67,155 लीटर प्राकृतिक खेती सामग्री तैयार की। इसमें वर्मी वॉश, जीवामृत और अग्न्यास्त्र शामिल हैं।

यह सामग्री 390 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल हुई। जिले के 15,928 किसान प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं। कुल 8,400 हेक्टेयर क्षेत्र का जैविक प्रमाणीकरण पूरा हुआ है।

वित्त वर्ष 2026-27 में जुलाई तक 6,364 किसान पंजीकृत हुए। उत्पादक संगठनों से 4,615 नए किसानों को भी जोड़ा गया। यह जुड़ाव सामूहिक खरीद, बिक्री और बेहतर बाजार पहुंच बढ़ा सकता है।

मशीन और सिंचाई पर जोर

डिंडौरी में 38,518 हेक्टेयर क्षेत्र तक कृषि मशीनीकरण पहुंचा है। इसमें हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसी मशीनें शामिल हैं। किसानों को 305 उन्नत कृषि यंत्र भी दिए गए। इससे समय और श्रम बचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

वर्षा जल संरक्षण ढांचे 5,100 हेक्टेयर क्षेत्र में बनाए गए हैं। सूक्ष्म सिंचाई का उपयोग 678 हेक्टेयर क्षेत्र में सुनिश्चित हुआ। ये प्रयास उपलब्ध पानी का बेहतर उपयोग कर सकते हैं।

दलहन और तिलहन का क्षेत्र बढ़ाने पर भी काम चल रहा है। किसानों को ऋण, फसल बीमा और तकनीकी प्रशिक्षण से जोड़ा जा रहा है। प्रशिक्षण में कृषि विज्ञान केंद्र और ग्रामीण आजीविका मिशन शामिल हैं।

पशुपालन में भी प्रगति

क्षीरधारा ग्राम योजना के पहले चरण में 28 गांव चुने गए। इन गांवों में 72 शिविर लगाकर पूर्ण टीकाकरण किया गया। दूसरे चरण के लिए 144 नए गांव चुने गए हैं। चारा बीज योजना से 1,469 पशुपालकों को ज्वार बीज मिला। डेयरी प्लस योजना में 26 पशुपालकों को मुर्रा भैंसें दी गईं। कामधेनु योजना के जरिए डेयरी कारोबार को बढ़ावा दिया जा रहा है।

वर्ष 2025-26 से 3,94,667 पशुओं का उपचार किया गया। राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम में 4,07,800 टीके लगाए गए। विभाग ने इसे तय लक्ष्य की पूरी उपलब्धि बताया है। एफएमडी (Foot and Mouth Disease) टीकाकरण में डिंडौरी जिला जबलपुर संभाग में प्रथम रहा।

किन कामों से बढ़ी रैंक

जिले ने शिकायतों के समयबद्ध समाधान और किसान प्रशिक्षण में बेहतर काम किया। फसल कटाई प्रयोगों का तय लक्ष्य भी पूरा किया गया। प्राथमिक कृषि साख समितियों के डिजिटलीकरण पर प्रगति दर्ज हुई।

ऋण वितरण, आधार जोड़ने और राजस्व मामलों पर भी ध्यान रहा। उद्यानिकी, पशुपालन और ग्रामीण कौशल गतिविधियां भी मूल्यांकन में शामिल रहीं। इन क्षेत्रों के संयुक्त प्रदर्शन ने जिले की रैंक मजबूत की।

कलेक्टर का क्या कहना

डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने उपलब्धि पर सभी को बधाई दी। उन्होंने अधिकारियों, कर्मचारियों और किसानों की भागीदारी को अहम माना। उन्होंने बेहतर विभागीय तालमेल और लगातार निगरानी जारी रखने को कहा। जनभागीदारी से अधिक ग्रामीण परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना शुरू करते समय जिला आधारित रणनीति समझाई थी। उन्होंने स्थानीय मिट्टी और जलवायु अनुसार कार्ययोजना बनाने को कहा था। उनके अनुसार समन्वय और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा तेजी से बदलाव ला सकते हैं।

किसानों को क्या फायदा

यह रैंक किसी किसान को अलग नकद पुरस्कार मिलने की घोषणा नहीं है। इसका संबंध जिले में योजनाओं के संयुक्त क्रियान्वयन और मासिक प्रदर्शन से है। किसानों को लाभ संबंधित योजनाओं की पात्रता के अनुसार मिलेगा।

बेहतर सिंचाई से फसल जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। मशीनीकरण खेती का समय और श्रम घटा सकता है। प्राकृतिक खेती से स्थानीय संसाधनों का उपयोग बढ़ सकता है।

कोदो-कुटकी की खरीद और पहचान बाजार अवसर बढ़ा सकती है। पशुपालन और डेयरी से परिवारों को अतिरिक्त आय का रास्ता मिलता है। वास्तविक असर निरंतर निगरानी और लाभ की समान पहुंच पर निर्भर रहेगा।

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